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भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, 2030 तक बन सकता है दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था: मोदी

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ग्रेटर नोएडा. आम जनता को मुनासिब दाम पर स्वच्छ और समुचित ऊर्जा आपूर्ति पर जोर देते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि कच्चे तेल का मूल्य निर्धारण जिम्मेदारी के साथ करने की जरूरत है ताकि इसमें उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हितों का संतुलन बना रहे.

पेट्रोलियम क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पेट्रोटेक- 2019 का उद्घाटन करते हुये मोदी ने कहा कि लंबे समय से कच्चे तेल के दाम में बड़ा उतार- चढ़ाव देखा गया है. ऐसे में जरूरी है कि तेल के दाम जिम्मेदारी के साथ तय हों जिसमें उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हितों के बीच संतुलन बना रहे.

हाल के महीनों में कच्चे तेल के दाम में काफी उतार- चढ़ाव आया है जिससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष समस्याएं खड़ी हुई हैं. भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है. पिछले साल अक्ट्रबर में अंतरराष्ट्रीय बजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश में पेट्रोल, डीजल के खुदरा दाम रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गये थे.

प्राकृतिक गैस के दाम में भी तेजी आ गयी थी और इस कारण गैस आधारित ताप बिजलीघरों में इसका इस्तेमाल करना कठिन हो गया था क्यों कि महंगी गैस की वजह से बिजली भी महंगी हो जाती है. गैस का इस्तेमाल कोयले और तरल ईंधन की तुलना में कम प्रदूषणकारी है.

उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे. मोदी ने कहा कि आज दुनिया के देशों के समक्ष अपने नागरिकों को सस्ती, स्वच्छ और भरोसेमंद ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती है. अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास के लिये उचित दाम पर, अनवरत ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है.

उन्होंने कहा, ‘‘ इससे गरीब और समाज के वंचित तबके को भी आर्थिक लाभ में भागीदारी निभाने का अवसर मिलता है.’’ मोदी ने कहा कि तेल और गैस केवल एक व्यापारिक माल भर नहीं है. ये आवश्यकता बन गए हैं. .. आम आदमी की रसोई हो या फिर हवाईजहाज, ईंधन की हर जगह जरूरत है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा आबादी ऐसी है जिसे बिजली उपलब्ध नहीं है. कई ऐसे भी लोग हैं जिनकी स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच नहीं है. भारत ने इस दिशा में तेजी से पहल की है. लोगों को स्वच्छ ऊर्जा के साथ साथ बिजली भी उपलब्ध कराई जा रही है. देश में ईंधन, ऊर्जा की मांग सालाना पांच प्रतिशत से भी अधिक तेजी से बढ़ रही है.

मोदी ने कहा कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवसथा बना हुआ है. दुनिया की प्रमुख एजेंसियों आईएमएफ और विश्वबैंक ने कहा है कि आने वाले सालों में भारत तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा. वर्तमान में भारत दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था है और ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है.

इंडिया एक्स्पो मार्ट में आयोजित इस सम्मेलन में दुनियाभर के पेट्रोलियम उत्पादक और उपभोक्ता देशों के करीब सात हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. तीन दिन का यह सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 10 फरवरी को शुरू हो गयी थी और यह 12 फरवरी तक चलेगी. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने रविवार को प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जिसमें भारत सहित दुनियाभर की पेट्रोलियम एवं ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां भाग ले रही हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में पश्चिम से पूर्व तक ऊर्जा उपभोग में बदलाव आ रहा है. शेल गैस की खोज के बाद अमेरिका तेल एवं गैस का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है. सौर ऊर्जा और दूसरे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अधिक प्रतिस्पर्धी स्रोत बन गये हैं. नये स्रोत
आज ऊर्जा के परंपरागत साधनों के मुकाबले अधिक वहनीय विकल्प बनकर उभरे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ऊर्जा कंपनियों के लिये लगातार आकर्षक बाजार बना हुआ है. भारत दुनिया में तेल, गैस तथा अन्य ऊर्जा का उपभोक्ता देश है. देश में 2040 तक ऊर्जा की मांग दोगुने से अधिक बढ़ने का अनुमान है.’’ ऊर्जा क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में दूर दराज ग्रामीण इलाकों तक बिजली पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है. इस वर्ष मार्च तक देश के सभी घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जायेगा.

बिजली पारेषण और वितरण नुकसान को कम करने के प्रयास किये जा रहे हैं. विश्वबैंक के कारोबार सुगमता सूचकांक में भारत बिजली कनेक्शन में सुगमता की रैंकिग में 2014 में 111वें पायादान पर था जबकि 2018 की रपट में देश 29वें पायदान पर पहुंच गया है.

उन्होंने कहा, ‘‘उजाला योजना के तहत कम खपत वाले एलईडी बल्बों की बड़े पैमाने पर आपूर्ति की गई जिससे वार्षि 17,000 करोड़ रुपये की बिजली की बचत हुई है. गरीबों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के लिये उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 6.4 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन दिया जा चुका है. इससे देश में खाना पकाने की गैस 90 प्रतिशत आबादी तक पहुंच गई है. पांच साल पहले 55 प्रतिशत आबादी तक ही यह सुविधा थी.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने तेल एवं गैस क्षेत्र की नीतियों में भी व्यापक बदलाव किये हैं. पुराने स्रोतों से तेल प्राप्ति बढ़ाने के वास्ते नई प्रौद्योगिकी अपनाने के लिये प्रोत्साहन दिये गये हैं. पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त किया जा चुका है. रिफाइंिनग क्षेत्र भी नियंत्रण मुक्त हैं. भारत आज रिफाइंिनग क्षेत्र में चौथे स्थान पर है. वर्ष 2030 तक देश की रिफाइंिनग क्षमता में 20 करोड़ टन की और वृद्धि होने का अनुमान है.

उन्होंने कहा कि गैस पाइपलाइन का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है. 16 हजार किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है जबकि 11 हजार किलोमीटर निर्माणाधीन है. जैव ईंधन विकास की दिशा में भी तेजी से कदम बढ़ाये जा रहे हैं. देश के 11 राज्यों में दूसरी पीढ़ी की 12 जैव- रिफाइनरियां लगाई जा रही हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने तेल एवं गैस की समूची श्रंखला में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन दिया है. तेल, गैस क्षेत्र में भारत आकर्षक निवेश स्थल बन गया है. सउदी अरब की आरमको, फ्रांस की टोटल, एक्सोन मोबिल, बीपी और शेल सहित कई कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रही हैं.’’

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