Home व्यापार दीर्घकालिक कृषि प्रणाली में ही छुपा है सतत विकास का मूल मंत्र

दीर्घकालिक कृषि प्रणाली में ही छुपा है सतत विकास का मूल मंत्र

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नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने दीर्घकालिक कृषि प्रणाली को सतत विकास का अहम हिस्सा बताते हुये कहा है कि सिचाई के प्रभावी साधन विकसित करने की जरूरत पर बल दिया जाना चाहिए जिससे ‘पानी की प्रत्येक बूंद’ का इस्तेमाल कर उपज को बढ़ाया जा सके.

नायडू ने सोमवार को ऊर्जा संसाधनों के शोध से संबद्ध संस्थान ‘टेरी’ द्वारा आयोजित विश्व सतत विकास सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि हरित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये जैवतकनीक और नैनो तकनीक के उपयोग की अंतहीन संभावनाओं को तलाशने की जरूरत पर बल दिया.

उन्होंने कहा ‘‘पानी की प्रत्येक बूंद के इस्तेमाल से उपज को बढ़ाने (मोर क्रॉप पर ड्रॉप) के मूल मंत्र को साकार करने के लिये हमें प्रभावी सिचाई साधनों को विकसित करना होगा. इसके साथ ही जैविक कृषि को बढ़ावा देने और कीटनाशकों के प्राकृतिक तरीके अपनाने की जरूरत है.’’

नायडू ने कहा कि सतत विकास में समावेशी विकास भी शामिल है और यातायात, शहरीकरण, कृषि, कचरा प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा के सतत संसाधन भी इसका अहम हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा कि सतत विकास विश्व के सभी देशों का साझा लक्ष्य है. इसमें पर्यावरण के हृास और इसके खतरनाक परिणामों से निपटने के उपाय समाहित हैं. इस दौरान नायडू ने जलवायु परिवर्तन के विकासशील देशों के परिणामों के प्रति आगाह करते हुये कहा कि इस चुनौती से आपसी सहयोग से ही निपटा जा सकता है.

सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है कृषि क्षेत्र, सरकार हुई संवेदनहीन : किसान कांग्रेस
कांग्रेस की किसान इकाई ने सोमवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर किसानों के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाया और दावा किया कि देश का कृषि क्षेत्र और किसान आजाद भारत के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं.

अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष रामकुमार वालिया ने एक बयान में कहा, ” भाजपा सरकार ने किसानों के खादों के कट्टों एवं कृषि यंत्रों पर भी जीएसटी लगाकर उन्हें तबाह करने का काम किया है. यही नहीं, कुछ उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किये गए, लेकिन किसानों का एक रुपया माफ नहीं किया गया.”

वालिया ने आरोप लगाया, ”प्रधानमंत्री कहते हैं कि किसानों की आय दोगुनी करेंगे, पर किसान आज आजाद भारत के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं. यह सरकार कृषि क्षेत्र और किसानों को लेकर संवेदनहीन हो चुकी है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फायदा किसानों की बजाय बीमा कंपनियों को हुआ है.

वालिया ने कहा, ”राहुल गांधी ने राज्य विधानसभा चुनावों में जहां-जहां किसानों के कर्ज माफी की बात की, वहां सरकार बनते ही इसे पूरा किया गया. हमें विश्वास है कि किसान आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और राहुल गांधी को समर्थन देंगे.”

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