कोरोना वायरसछत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर केंद्र पर साधा निशाना

नयी दिल्ली. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना संकट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि अगर विदेश से आने वालों की समय पर जांच कर उन्हें पृथक कर दिया गया होता तो यह वायरस देश में इतना ज्यादा नहीं फैलता. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 अप्रैल को बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक में विचार-विमर्श करने के बाद उनकी सरकार भी राज्य में लॉकडाउन (बंद) को लेकर निर्णय लेगी.

बघेल ने वीडियो ंिलक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ”” हमने कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम को लेकर छत्तीसगढ़ में पहले से ही कदम उठाने शुरू कर दिये थे. बाहर से आने वालों की जांच की गयी. प्रशासन के स्तर पर जरूरी कदम उठाए गए. लोगों ने भी पूरा सहयोग किया.”” उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों और मजदूरों की मदद की व्यवस्था की गई. इसमें व्यापारी और समाज के दूसरे वर्ग ने भी सहयोग किया.

लॉकडाउन आगे बढ़ने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर बघेल ने कहा, ””प्रधानमंत्री 11 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंंिसग के माध्यम से बैठक करेंगे. इसमें हम अपने सुझाव देंगे. इसके बाद हम 12 अप्रैल को अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों और अधिकारियों से चर्चा करने के बाद निर्णय लेंगे.”” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से लॉकडाउन के बारे में सुझाव मांगे गए हैं. बघेल ने कहा की छत्तीसगढ़ में 11 मरीज मिले हैं जिनमें से नौ स्वस्थ हो चुके हैं और वे अपने घर जा चुके हैं.

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा, ””हवाई अड्डों की जिम्मेदारी केंद्र के पास है. अगर विदेश से आने वालों की हवाई अड्डों पर ही जांच हो जाती और उन्हें पृथक कर दिया जाता तो फिर कोरोना इतना ज्यादा नहीं फैलता.”” उन्होंने कहा, ””हमने छत्तीसगढ़ में विदेश से आने वाले 2100 लोगों की जांच की और उन्हें पृथक वास में रखा. इससे हमें कोरोना को रोकने में मदद मिली.”” ” बघेल ने यह भी कहा कि जनधन खातों में 750 रुपये महीने की दर से तीन महीने की राशि एकसाथ भेजी जाए और मजदूरों के खातों में भी तीन हजार रुपये दिए जाने चाहिए.

उनके मुताबिक यह अनुमान लगा पाना अभी मुश्किल है कि कोरोना संकट से राज्य को कितना वित्तीय नुकसान हुआ है. बघेल ने उनकी सरकार कमजोर वर्गों और गरीबों को राहत देने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, ” छत्तीसगढ़ में लगभग 65 लाख राशन कार्ड हैं जिसमें 56 लाख गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले लोग हैं. उन्हें हमने 2 महीने का राशन मुफ्त देने का फैसला किया है.”


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