Home छत्तीसगढ़ आदिवासियों की रिहाई का मामला बना गले की फांस

आदिवासियों की रिहाई का मामला बना गले की फांस

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दंतेवाड़ा. नक्सलियों से जुड़े मामलों में जेलों में बंद कथित निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का मामला अब सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. भूपेश बघेल सरकार के सत्तारूढ़ होने के 9 महीने बाद भी एक भी आदिवासी की रिहाई न होने से आदिवासियों का सब्र खत्म हो रहा है. अंदरूनी इलाको के आदिवासी लामबंद होकर जगह-जगह प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

वहीं पुलिस को संदेह है कि इस मामले के पीछे नक्सलियों की साजिश है. दंतेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव का कहना है कि पालनार में ज्यादा ग्रामीण नहीं हैं. पर जो भी ग्रामीण आये थे वे नक्सलियों के दबाव में अंदरूनी इलाको से कई किमी पैदल चलकर यहां तक पहुंचे
थे. शनिवार 5 अक्टूबर को पालनार में जब ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे थे तब प्रशासन ने सोनी सोरी को गिरμतार कर ग्रामीणों को वापस जाने के निर्देश दिये थे.

किं तु सैकड़ों ग्रामीण अब तक वहां डटे हुए हैं. वे प्रदर्शन करने पर अड़े हैं, पर पुलिस प्रशासन प्रदर्शन की इजाजत नहीं दे रहा है. आज पालनार में ग्रामीणों द्वारा रैली निकाले जाने की खबर मिलने के बाद यहां के हालात तनावपूर्ण हो गये थे.

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