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प्रदेश में माओवादियों के प्रति “शहरी नक्सलियों” के समर्थन पर अंकुश लगाने की जरुरत

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रायुपर. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि माओवादियों के प्रति शहरों में सहानुभूति रखने वालों के समर्थन पर अंकुश लगाने की जरुरत है ताकि वाम चरमपंथ का राज्य से सफाया किया जा सके.

जल संसाधन, कृषि, जैवप्रौद्योगिकी, पशुधन और मात्स्यिकी मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद राज्य के 75 फीसद क्षेत्रों से खत्म हो चुका है तथा अब 25 फीसद क्षेत्रों में उसका ‘थोड़ा बहुत प्रभाव’ है.

उन्होंने कहा, ‘‘25 फीसद उन क्षेत्रों में कुछ नक्सल गतिविधियां अब भी हैं जिनकी सीमा पड़ोसी राज्यों (ओड़िशा और आंध्रप्रदेश से) मिलती है. हम शीघ्र ही वहां से भी उसका सफाया कर देंगे.’’ इस नक्सल प्रभावित राज्य के गृहमंत्री रह चुके अग्रवाल ने कहा कि देश के शहरी क्षेत्रों से माओवादियों के लिए समर्थन तंत्र बना हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘‘अतएव उन पर अंकुश लगाने की जरुरत है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से नक्सलवाद का सफाया किया जा सके.’’ उन्होंने कहा कि वाम चरमपंथ बस छत्तीसगढ़ को ही प्रभावित नहीं कर रहा है, ‘‘(बल्कि) यह अन्य राज्यों का मुद्दा भी है. नक्सलवाद की समाप्ति के लिए संयुक्त नीति, संयुक्त कमान और संयुक्त प्रयास हो.’’

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने हाल ही में कहा था कि सरकार नक्सलियों को रायपुर से दिल्ली तक समर्थकों (उनके प्रति सहानुभूति रखने वालों से) मिल रहे वैचारिक और वित्तीय समर्थन को ‘शीघ्र ही खत्म करने’ के लिए विकास परियोजनाओं के माध्यम से प्रयास कर रही है.

सिंह ने कहा था, ‘‘जिस तरह नक्सली कमजोर पड़ रहे हैं, उसी तरह उनके समर्थक भी कमजोर पड़ेंगे. (नक्सलियों और उनके समर्थकों पर अंकुश की) लड़ाई छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों की है. हम (नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में) सफल रहे हैं तथा इस समर्थन तंत्र को शीघ्र ही निष्प्रभावी किया जाएगा. ’’

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