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हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा हो सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय सुरक्षा एक बड़ा चुनावी मुद्दा हो सकता है क्योंकि यहां के मतदाताओं में पूर्व सैनिकों और सैन्य बलों में कार्यरत र्किमयों की संख्या बेहद ज्यादा है. राज्य की चार लोकसभा सीटों में से खासकर तीन सीटों-कांगड़ा, हमीरपुर और मंडी में इन मतदाताओं की संख्या अधिक है.

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी जनसभाओं में मोदी सरकार में किए गए र्सिजकल स्ट्राइक और हवाई हमलों का मुद्दा उठा रही है जबकि कांग्रेस जनता को यह याद दिला रही है कि 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार में किस प्रकार पाकिस्तान से नया देश बांग्लादेश बनाया गया था.

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में देश पूरी तरह से सुरक्षित है. ठाकुर ने शुक्रवार को मंडी में कहा, ‘‘जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उरी में हमारे कई जवान शहीद हुए. इसके जवाब में मोदी के मजबूत नेतृत्व में सेना ने सफलतापूर्वक र्सिजकल स्ट्राइक की.’’

उन्होंने कह, ‘‘पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए. कांगड़ा के तिलक राज भी शहीद हुए…. हमारी वायुसेना ने कुछ दिनों के भीतर हवाई हमले किए और पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया.’’ मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले के बाद ‘‘कुछ भी नहीं करने’’ का आरोप लगाया.

कांग्रेस नेता मुकेश अग्निहोत्री ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि शहीद जवानों के नाम पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए. अग्निहोत्री ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी पुलवामा हमले का जवाब देने को लेकर पूरी तरह सरकार के साथ है.

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा कांग्रेस की शीर्ष प्राथमिकता रही है. भाजपा नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1971 में जब केंद्र में इंदिरा गांधी नीत कांग्रेस सरकार थी, तब किस प्रकार नया देश अस्तित्व में आया था.’’

इस बीच, 18 ग्रेनेडियर्स के कमांंिडग आॅफिसर रहे (सेवानिवृत्त) कुशल ठाकुर ने कहा, ‘‘हालांकि सैन्य बल हमारी चयनित सरकार के निर्णय के अनुसार काम करते हैं, इसके बावजूद नेताओं को सैन्य बलों के नाम पर राजनीति करने से बचना चाहिए.’’

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के 50 लाख से अधिक मतदाताओं में से करीब 2.5 लाख मतदाता या तो रक्षा बलों में सेवारत हैं या सेवानिवृत्त हैं.

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