कोरोना वायरसलाइफस्टाइल

विशेषज्ञों की मशहूर हस्तियों को सलाह, महामारी के दौरान जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतें

नयी दिल्ली. कोरोना वायरस की महामारी के इस दौर में सोशल मीडिया और सामाजिक मुद्दों से जुड़े विशेषज्ञों ने देश की मशहूर हस्तियों को कोई भी जानकारी साझा करने से पूर्व अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन हस्तियों के प्रशंसकों की तादाद काफी बड़ी होती है, लिहाजा उनके द्वारा साझा की गई एक गलत जानकारी लाखों-करोड़ों लोगों को प्रभावित कर सकती है. साथ ही उनकी छवि पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

तथ्यों की जांच करने वाली वेबसाइट ‘आॅल्ट न्यूजÞ’ के संपादक प्रतीक सिन्हा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”मशहूर हस्तियों का बहुत सम्मान की नजर से देखा जाता है. लोग उनकी बात मानते हैं. लेकिन जब बहुत अधिक फॉलोवर वाली बड़ी हस्तियां गलत सूचनाएं साझा करती हैं तो वह खतरनाक हो सकता है.” यह मुद्दा इसलिये एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि सोशल मीडिया पर लाखों प्रसंशक रखने वाले अमिताभ बच्चन, रजनीकांत और मोहनलाल समेत कई नामचीन हस्तियां हाल ही में गलत सूचनाएं फैलाने की शिकार हुई हैं.

अमिताभ बच्चन के ट्विटर पर चार करोड़ फॉलोवर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रविवार को जब लोगों ने अपने-अपने घरों की बत्तिया बुझाकर चिराग, मोमबत्तियां, दीये और मोबाइल की टॉर्च जलाए तो अमिताभ ने एक ट्वीट साझा किया जिसमें दुनिया के मानचित्र की एक तस्वीर में भारत का नक्शा जगमगाता दिख रहा था. अमिताभ का मानना था कि वह तस्वीर प्रधानमंत्री की अपील के अनुसरण के बाद की है. हालांकि बाद में वह तस्वीर फर्जी साबित हुई.

इससे पहले उनके एक ट्वीट की भी काफी आलोचना हुई थी जिनमें उन्होंने 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ के दौरान शाम पांच बजे ताली और थाली बजाने की प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों को एक सलाह दी थी.

उन्होंने लिखा था, ”22 मार्च को शाम 5 बजे अमावस्या, महीने का सबसे काला दिन, वायरस, बैक्टीरिया और बुरी ताकतें अपने सबसे ज्यादा प्रभाव में होगीं. ताली और शंख की कंपन से इस वायरस की शक्ति कम/नष्ट हो जाएगी. चांद नए नक्षत्र ‘रेवती’ में प्रवेश करेगा. शरीर में खून का बहाव बेहतर होगा.” इसके अलावा उन्होंने 25 मार्च को एक वीडियो ट्वीट कर ‘लैंसेट’ के अध्ययन का हवाला देते हुए दावा किया था कि चीन के विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 मक्खियों के जरिये फैलता है. हालांकि बाद में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दावे को खारिज कर दिया था.

ट्विटर ने हाल ही में जनता कर्फ्यू को लेकर अभिनेता और नेता रजनीकांत का एक वीडियो हटाया है. बीते महीने 19 मार्च को साझा इस वीडियो संदेश में रजनीकांत ने कहा था, ”यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति से फैलने में 12 से 14 घंटे का समय लेता है, लिहाजा प्रधानमंत्री द्वारा 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की जो अपील की गई है उससे भारत सामुदायिक संक्रमण के तीसरे और मुश्किल चरण में जाने से बच जाएगा.” हालांकि ट्विटर ने इस उस वीडियो में दी गई सूचना को फर्जी बताते हुए इसे हटा दिया था.

इसी तरह जब जनता कर्फ्यू से एक दिन पहले यानि 21 मार्च को भारत में कोरोना वायरस से लड़ रहे स्वास्थ्य र्किमयों के समर्थन को सलामी देने के लिये कई लोग थालियां बजाते हुए अपनी-अपनी बालकनी में आए तो मलयालम फिल्मों के स्टार मोहनलाल ने मनोरमा समाचार चैनल से कहा कि ऐसा करने से वायरस मर सकता है.

पुडुचेरी की राज्यपाल भी मुर्गियों का एक वीडियो ट्विटर पर साझा करके विवाद में पड़ गई थीं. उन्होंने दावा किया था कि कूड़े में फेंके गए अंडे कोरोना वायरस के चलते फूट गए हैं. समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव कहते हैं, ”पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में मशहूर हस्तियों की बातों पर बहुत कम संदेह किया जाता है. हस्तियों की आलोचना न किया जाना एक तरह से उनकी हर बात को मान्यता देने जैसा है. लिहाजा उनके द्वारा गलत सूचनाएं फैलाने के बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं.”

‘आॅल्ट न्यूजÞ’ के संपादक प्रतीक सिन्हा ने कहा कि समाज के हर वर्ग से गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं और कोविड-19 के संदर्भ में तो सही जानकारी का अभाव और भी स्पष्ट दिखाई देता है. सिन्हा की बातों से इत्तेफाक रखते हुए श्रीवास्तव कहते हैं कि इन हस्तियों को अपने प्रशंसकों का ख्याल रखते हुए सही जानकारी पेश करनी चाहिये.


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