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रहाणे का मंत्र : मजबूत इरादे दिखायें और ‘एंगल’ का सही अनुमान लगायें

क्राइस्टचर्च. अंजिक्य रहाणे चाहते हैं कि उनके बल्लेबाज न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट क्रिकेट मैच में तेज गेंदबाजों का मजबूत इरादों के साथ सामना करें और एक विशेष ‘एंगल’ (कोण) से की गयी शार्ट पिच गेंदों को समझे जो वेंिलगटन में पहले टेस्ट मैच में उनके लिये दु:स्वप्न बन गयी थी.

रहाणे ने पहले टेस्ट की पहली पारी में सर्वाधिक 46 रन बनाये थे और उन्होंने उम्मीद जतायी कि हेगले ओवल की पिच पर घास होने के बावजूद उनकी टीम वापसी करेगी. रहाणे ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमें अधिक आक्रामक होना चाहिए लेकिन मजबूत इरादे और स्पष्ट मानसिकता से हमें मदद मिलेगी.’’

न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ट्रेंट बोल्ट, टिम साउदी और काइल जेमीसन ने वेंिलगटन में क्रीज के बाहरी छोर से एक विशेष ‘एंगल’ (कोण) के रनअप से शार्ट पिच गेंदें की थी जिसे भारतीय बल्लेबाज नहीं समझ पाये थे. रहाणे ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वेंिलगटन में उन्होंने उस ‘एंगल’ (कोण) का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया. उन्होंने क्रीज के बाहरी छोर से या बीच से गेंदबाजी की. शार्ट पिच गेंद करते समय वे अपना ‘एंगल’ बदल रहे थे. मेरा मानना है कि उनकी रणनीति स्पष्ट थी.’’

भारतीय उप कप्तान ने कहा, ‘‘एक बल्लेबाज के रूप में अगर आप किसी खास शाट के बारे में सोचते तो आपको खुद पर भरोसा रखकर वह शाट खेलना चाहिए. आप खुद पर संदेह नहीं कर सकते. वेंिलगटन में जो कुछ हुआ हमें उसे भूलने की जरूरत है.’’ रहाणे के अनुसार भारतीय बल्लेबाज यहां दोनों अभ्यास सत्र में उस कोण से की गयी गेंदबाजी का सामना करने की कोशिश करेंगे जिसका इस्तेमाल नील वैगनर और उनके साथी कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यही कहता हूं कि कोशिश करो और एक टीम के रूप में हमने जो गलतियां की उनसे सबक लो. हमें उस कोण से की गयी गेंदों का अभ्यास करना होगा. हमने अभ्यास सत्र में भाग लिया और कल एक और अभ्यास सत्र में हिस्सा लेंगे. आपको उसका अभ्यास करना होगा और क्रीज पर अपनी क्षमता पर भरोसा दिखाना होगा. ’’

चेतेश्वर पुजारा की पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 81 गेंदों पर 11 रन बनाने के लिये कड़ी आलोचना की गयी. रहाणे ने इस बारे में कहा, ‘‘पुजारा अपनी तरफ से कोशिश कर रहा था वह असल में रन बनाने पर ध्यान दे रहा था. लेकिन बोल्ट, साउदी और अन्य गेंदबाजों ने ज्यादा मौके नहीं दिये. यह सभी बल्लेबाजों के साथ होता है. मेरे कहने का मतलब है कि सभी बल्लेबाज इस दौर से गुजरते हैं. ’’

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