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भारत ए और अंडर 19 सहयोगी स्टाफ से राठौड़ को जोड़ने पर उठे सवाल

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नयी दिल्ली. बीसीसीआई ने पूर्व टेस्ट सलामी बल्लेबाज विक्रम राठौड़ को भारत ए और अंडर 19 टीमों का बल्लेबाजी कोच नियुक्त करने की तैयारी कर ली है लेकिन वह अंडर 19 राष्ट्रीय चयनकर्ता आशीष कपूर के रिश्तेदार हैं जिसके कारण इस नियुक्ति से ‘हितों का टकराव’ विवाद हो सकता है.

पता चला है कि क्रिकेट संचालन महाप्रबंधक सबा करीम को राठौड़ और विकेटकींिपग कोच विजय यादव को ‘ए और अंडर 19 टीम के अतिरिक्त स्टाफ’ के रूप में अस्थाई तौर पर नियुक्त करने के लिए प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय की स्वीकृति मिल गई है. राठौड़ कपूर के रिश्तेदार हैं और बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार यह हितों के टकराव का प्रत्यक्ष मामला बन सकता है.

इस मामले की जानकारी रखने वाले बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘‘भारत ए और अंडर 19 कोच राहुल द्रविड़ ने ए टीम के अतिरिक्त स्टाफ के लिए विशिष्ट रूप से बल्लेबाजी कोच के तौर पर राठौड़ और क्षेत्ररक्षण कोच के रूप में विजय यादव के नाम की सिफारिश की है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह नियुक्ति अस्थाई तौर पर होगी और वे चतुष्कोणीय श्रृंखला के दौरान अंडर 19 टीम और एनसीए के साथ भी काम करेंगे. वह (राठौड़) ईरानी कप में शेष भारत के कोच भी होंगे.’’ माना जा रहा है कि राठौड़ भारत की अंडर 19 ए और बी टीमों की दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान की अंडर 19 टीमों के साथ आगामी चतुष्कोणीय श्रृंखला में भारत अंडर 19 ढांचे का हिस्सा होंगे.

सवाल यह उठता है कि क्या करीम ने सीओए प्रमुख राय को बता दिया है कि द्रविड़ की सिफारिश के बावजूद राठौड़ की नियुक्ति से क्या समस्या पैदा हो सकती है. संपर्क करने के बावजूद करीम प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हो सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने हालांकि इस प्रक्रिया पर कुछ सवाल उठाए.

अधिकारी ने कहा, ‘‘यह पता करना राय की जिम्मेदारी नहीं है कि कौन किसका रिश्तेदार है. क्या करीम ने उन्हें संभावित हितों के टकराव के बारे में बताया. यह पहला सवाल है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरा सवाल यह है कि क्या राठौड़ और यादव की नियुक्ति के दौरान पर्याप्त सतर्कता बरती गई. बोर्ड की वेबसाइट पर विज्ञापन के आधार पर क्या पर्याप्त साक्षात्कार लिया गया.’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘अंतिम ंिबदू यह है कि अगर वह अंडर 19 टीम के साथ अस्थाई तौर पर काम करेगा और उसके बल्लेबाजी सलाहकार के रूप में एनसीए में भी काम करने की संभावना है तो क्या इसका मतलब यह है कि अलग बल्लेबाजी कोच (एनसीए के लिए) की नियुक्ति बाद में की जाएगी.’’

रणजी ट्राफी में पहले पंजाब और फिर हिमाचल प्रदेश के लिए काफी रन बनाने वाले राठौड़ 1996 में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका में कुछ टेस्ट खेले. वह 2016 तक राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे और उनके कार्यकाल के दौरान पंजाब के बंिरदर सरन और हिमाचल प्रदेश के ऋषि धवन जैसे खिलाड़ियों को मौका दिया गया.

बायें हाथ के तेज गेंदबाज सरन को पूरी तरह से उनकी प्रतिभा के आधार पर चुना गया क्योंकि उनका घरेलू प्रदर्शन काफी उम्दा नहीं था. सरन बाद में गुमनामी में खो गए और अब उन्हें पंजाब की शुरुआती एकादश में भी नियमित जगह नहीं मिलती. धवन धर्माशाला की तेज गेंदबाजी की अनुकूल विकेट पर अब भी काफी विकेट चटकाते हैं लेकिन उन्हें अंतरराष्टूीय स्तर पर दावेदार नहीं माना जा रहा.

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