Home शिक्षा 11 फरवरी : दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का गवाह

11 फरवरी : दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का गवाह

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आज का इतिहास

नयी दिल्ली: साल के दूसरे महीने का 11वां दिन कई अच्छी – बुरी घटनाओं के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यह दिन दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का साक्षी रहा। दक्षिण अफ्Þरीका में रंग-भेद की नीतियों के ख़लिाफÞ आंदोलन चला रहे नेल्सन मंडेला को 27 साल की कÞैद के बाद 11 फरवरी 1990 को ही रिहाई मिली थी। उन्हें जून 1964 में राजद्रोह और साजिश का दोषी ठहराते हुए उम्रकÞैद की सजÞा सुनाई गई थी। 11 फरवरी 1979 का दिन ईरान के आध्यात्मिक नेता आयतुल्लाह खामेनी के लिए भी एक नयी ंिजदगी का पैगाम लेकर आया था जब निर्वासन से लौटने के 10 दिन बाद ही उनके लिए सत्ता के रास्ते खुल गए।

देश-दुनिया के इतिहास में 11 फरवरी की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-

1847 : अमेरिका के महान आविष्कारक थॉमस एडिसन का जन्म। एडिसन के नाम पर अकेले या संयुक्त रूप से 1093 पेटेंट हैं, जो अपने आप में एक विश्व रिकार्ड है।
1856: अवध पर ईस्­ट इंडिया कंपनी का कब्­जा।
1956: ब्रिटेन के दो राजनयिक जो पांच वर्ष पहले रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे, सोवियत संघ में दोबारा दिखे।
1963: वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले सोवियत संघ ने भारत को 12 मिग लड़ाकू विमान देने का जो वादा किया था, उसकी पहली खेप के तौर पर चार विमान बम्बई :अब मुंबई: पहुंचे।
1975: एडवर्ड हीथ के स्थान पर मार्गेरेट थैचर को ब्रिटेन की कंज़र्वेटिव पार्टी की नेता चुना गया।
1979: आयतुल्लाह खामेनी के समर्थकों ने ईरान की राजधानी तेहरान पर कब्जा किया। सेना अपनी बैरकों में वापस लौट गई और मौजूदा शासन को बचाने के लिए हथियार उठाने से इंकार कर दिया।
1990: दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का विरोध करने वाले महान नेता नेल्सन मंडेला को कैद से रिहा किया गया।
1997: भारतीय खगोल भौतिकविद् जयंत वी नार्लीकर को यूनेस्को के ‘कंिलग पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 1996 के लिए दिया गया।
2003: इंग्लैंड की क्रिकेट टीम ने विश्वकप का अपना मैच खेलने से इंकार कर दिया क्योंकि वह जिम्बाब्वे में खेला जाने वाला था। विश्व कप क्रिकेट में आयोजन स्थल के कारण मैच न खेलने का यह अपने आप में पहला वाकया था।
2011: मिस्र के राष्ट्रपति हुस्री मुबारक ने 30 वर्ष तक सत्ता में रहने के बाद भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ा।

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