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छात्रों की प्रतिभा को निखारने के लिये प्रधानमंत्री नवाचार शिक्षण कार्यक्रम ‘ध्रुव’ शुरू

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बेंगलुरू. युवा प्रतिभाओं को निखारने एवं प्रोत्साहित करने के लिये रूस के सोची स्कूल की तर्ज पर केंद्र सरकार ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नवाचार शिक्षण कार्यक्रम ‘ध्रुव’ की शुरूआत की, जिसके तहत जाने-माने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में छात्रों की प्रतिभा को निखारा जायेगा.

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बेंगलुरू स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रांगण में इस कार्यक्रम की शुरुआत की. इस अवसर पर निशंक ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों एवं समाज के लिये मील का पत्थर साबित होगा और प्रधानमंत्री ने भी इस कार्यक्रम पर प्रसन्नता व्यक्त की है.

उन्होंने कहा, ‘‘ इस कार्यक्रम में चयनित छात्र ऐसे ध्रुवतारा हैं, जो देश के लाखों बच्चों के लिये प्रेरणा स्रोत बनेंगे.’’ गौरतलब है कि इस कार्यक्रम के तहत प्रायोगिक तौर पर 10 अक्टूबर से विभिन्न राज्यों के 60 प्रतिभाशाली छात्रों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया जायेगा. निशंक ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रांगण से ‘‘प्रधानमंत्री नवाचार शिक्षण कार्यक्रम’’ का शुभारंभ हो रहा है.

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का नाम ‘ध्रुव’ रखा गया है, जिसके तहत देश के 60 प्रतिभावान बच्चों को चिह्नित कर उन्हें देश भर के उत्कृष्ट केंद्रों में प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा परामर्श और शिक्षा देकर उनकी क्षमता के विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है. मंत्री ने कहा कि इसमें 30 बच्चे विज्ञान के क्षेत्र से एवं 30 बच्चे कला के क्षेत्र से होंगे . इसके माध्यम से देश में शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और ये नवाचार 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की तरफ हमारे बढ़ते कदमों को सशक्त करेंगे.

इस अवसर पर इसरो के अध्यक्ष प्रो. के सिवन ने छात्रों से संवाद किया. ंिवग कमांडर राकेश शर्मा ने छात्रों से अधिक परिश्रम करने और प्रधानमंत्री नवाचार शिक्षण कार्यक्रम के तहत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने को कहा. इस कार्यक्रम में नैनो उपग्रह ‘कलाम सैट वी2’ का डिजाइन तैयार करने वाले तमिलनाडु के तीन नवोदित वैज्ञानिक रिफत शारूक, यज्ञ साई और विजय लक्ष्मी नारायणन ने भी अपनी बात रखी .

प्रधानमंत्री नवाचार शिक्षण कार्यक्रम के तहत देश के विभिन्न राज्यों से विज्ञान एवं प्रदर्श कला (परफॉर्मिंग आर्ट्स) क्षेत्रों से 60 प्रतिभाशाली छात्रों का चयन किया है. इन छात्रों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की यात्रा कराने के बाद दिल्ली में 15 दिन तक विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उनके क्षेत्रों में दुनिया में हो रही गतिविधियों से अवगत कराया जायेगा.

उल्लेखनीय है कि प्रतिभाशाली बच्चों से जुड़े इस कार्यक्रम की संकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 2018 में संपन्न रूस यात्रा के बाद की गई जब वे रूस के सोची में इस तरह का केंद्र देखने गए थे.

विज्ञान संकाय से जुड़े छात्रों को आईआईटी दिल्ली में जाने माने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में रखा जायेगा. कला, संगीत सहित प्रदर्श कला क्षेत्र से जुड़े छात्रों को भारतीय कला केंद्र में रखा जायेगा. इन 60 छात्रों को छह टीम में विभाजित किया जायेगा. इसके तहत तीन टीम विज्ञान संकाय और तीन टीम प्रदर्श कला संकाय से होंगे. दिल्ली में इनका प्रबोधन कार्यक्रम 14 से 23 अक्टूबर तक होगा. ये पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आतंकवाद जैसे विषयों पर संवाद करेंगे .

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