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निपाह विषाणु : छह संदिग्ध मरीजों की जांच के नतीजे निगेटिव आए, स्वास्थ्य मंत्री ने बड़ी राहत बताई

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कोच्चि/ नयी दिल्ली. केरल की स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा ने बृहस्पतिवार को कहा कि निपाह विषाणु की चपेट में आए छह लोगों के नमूनों के परिणाम निगेटिव आए हैं और इससे संकेत मिलता है कि यह विषाणु फैला नहीं है.

इन छह लोगों में एक र्निसंग असिस्टेंट और तीन नर्स भी शामिल हैं जो विषाणु से संक्रमित कॉलेज छात्र के इलाज के वक्त मौजूद थे. इन छह लोगों के रक्त परीक्षण के परिणाम केरल के अधिकारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं जो इस अति संक्रामक विषाणु को रोकने का प्रयास कर रहे हैं जिसने पिछले साल राज्य में 17 लोगों की जान ले ली थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने नयी दिल्ली में कहा कि निपाह संक्रमण की चपेट में आए कॉलेज छात्र की हालत स्थिर है और उसके संपर्क में आए कुल 314 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है.

शैलजा ने कहा कि जिन छह लोगों के जांच परिणाम निगेटिव आए हैं, वे संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क में आए थे.
मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘निपाह की जांच निगेटिव आई है. इसका मतलब है कि विषाणु फैला नहीं है. यह हमारे लिए बड़ी राहत की बात है.’’ उन्होंने कहा कि सातवें व्यक्ति के जांच परिणाम का इंतजार किया जा रहा है.

इन सबका फिलहाल यहां के सरकारी मेडिकल कॉलेज कलमासेरी में इलाज चल रहा है. इन नमूनों की जांच पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान में की गई. सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक बुलेटिन में बताया गया था कि विभिन्न जिलों के कुल 314 लोगों को निगरानी में रखा गया है.

इन 314 में से सात लोगों को अस्पताल के ‘आइसोलेशन वार्ड’ में रखा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने संक्रमण के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाने और ‘आइसोलेशन वार्ड’ का जायजा लेने के लिए महामारी रोग विशेषज्ञ समेत छह लोगों की टीम को काम पर लगाया है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने केरल में जनस्वास्थ्य उपायों का बुधवार को जायजा लेने के बाद कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.

समीक्षा बैठक के दौरान केंद्र ने रोग के संपर्क में आने वाले लोगों, नमूने एकत्रित करने या उनकी जांच के लिए अस्पताल में अलग कमरा रखने की मानक संचालन प्रक्रिया तथा संक्रमण के संभावित स्रोत एवं संपर्क के तरीके और वजह का पता लगाने के लिए कई विषयों के विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा महामारी की जांच और प्रशिक्षित स्वास्थ्यर्किमयों के साथ एक अलग आइसोलेशन वार्ड बनाए जाने पर चर्चा की. कालीकट, त्रिशूर और कोट्टायम के मेडिकल कॉलेजों में भी आइसोलेशन वार्ड सुनिश्चित करने को कहा गया है.

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