विदेश

अमेरिका ने भारत के नये नागरिकता कानून के तहत समान संरक्षण पर दिया जोर

वाशिंगटन. भारत में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की एक शीर्ष राजनयिक ने कानून के तहत समान संरक्षण के सिद्धांत का महत्व रेखांकित किया है.

दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स हाल में क्षेत्र के एक दौरे से लौटी हैं. उन्होंने नयी दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ में भी हिस्सा लिया था. एलिस वेल्स ने शुक्रवार को कहा कि उनकी यात्रा से नये नागरिकता कानून के संबंध में और अधिक सुनने का एक मौका मिला.

उल्लेखनीय है कि सीएए के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के बाद 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आये ंिहदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के सदस्यों को भारतीय नागरिकता मिलेगी. उन्होंने कहा, ‘‘उनकी यात्रा से उन्हें भारत के संशोधित नागरिकता कानून के संबंध में घटनाक्रमों के बारे में और अधिक सुनने का मौका मिला. मैं कहूंगी कि वहां लोकतंत्र एक परीक्षण के दौर से गुजर रहा है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम कानून के तहत समान संरक्षण के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित करते हैं.’ वेल्स ने जम्मू-कश्मीर पर कहा कि वह ‘‘कुछ वृद्धिशील कदमों को देखकर खुश हैं जिसमें इंटरनेट सेवाओं की आंशिक बहाली शामिल है.’’ पाबंदियां गत वर्ष पांच अगस्त को लगाई गई थीं जब भारत ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त कर दिये थे और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था.

वेल्स ने भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर और अन्य विदेशी राजनयिकों की जम्मू- कश्मीर के दौरे को एक ‘‘उपयोगी कदम’’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह हमारे राजनयिकों को नियमित पहुंच की इजाजत दे और बिना किसी आरोप के हिरासत में रखे गए नेताओं को रिहा करने पर त्वरित कदम उठाये.’’

उल्लेखनीय है कि अमेरिका सहित 15 देशों के राजनयिकों ने पिछले महीने जम्मू कश्मीर का दौरा किया था और वहां चुंिनदा राजनीतिक प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों के अलावा शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ संवाद किया था.

भारत ‘निष्क्रिय’ विदेश नीति से दूर जाकर अपने हितों पर ध्यान दे रहा है : अमेरिकी राजनयिक
अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने शुक्रवार को कहा कि भारत निष्क्रिय विदेश नीति से दूर जा रहा है और जोर-शोर से अपने हितों को तरजीह दे रहा है. दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह स्पष्ट है कि पिछले दो दशक से भारत अपने रणनीतिक क्षितिज का विस्तार कर रहा है जिसका परिणाम यह निकला है कि वह निष्क्रिय विदेश नीति से दूर होकर जोर-शोर से अपने हितों पर ध्यान दे रहा है.

नयी दिल्ली में रायसीना संवाद के अलावा क्षेत्र की यात्रा से हाल ही में लौटीं वेल्स ने कहा कि ंिहद-प्रशांत क्षेत्र में अब यह बदलाव अधिक स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है. वेल्स ने कहा कि रक्षा सहयोग, शांति रक्षा अभियानों, अंतरिक्ष, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, व्यापार, लोगों के बीच आपसी संपर्क पर निरंतर प्रगति के साथ ही भारत-अमेरिका नौसेना सहयोग की गुणवत्ता और निरंतरता, खासतौर से सूचना को साझा करने में अभूतपूर्व प्रगति हुई है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य एक ऐसा व्यापार समझौता हासिल करने पर है जो निष्पक्षता तथा परस्पर आदान-प्रदान को बढ़ावा देता हो. वेल्स ने पत्रकारों से कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर पर मुझे कुछ प्रगति देखकर खुशी हुई जिसमें कश्मीर में इंटरनेट सेवा आंशिक रूप से बहाल करना शामिल है.’’ उन्होंने जम्मू कश्मीर में अमेरिकी राजदूत तथा अन्य विदेशी राजनयिकों की यात्रा को ‘‘सार्थक कदम’’ करार दिया.

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