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अमेरिका की मुस्लिम सांसद ने विवाद खड़ा करने वाली अपनी टिप्पणी पर माफी मांगी

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वाशिंगटन. अमेरिकी कांग्रेस में शामिल पहली दो मुस्लिम महिलाओं में से एक इल्हान अब्दुल्लाही उमर ने अपनी उस टिप्पणी को लेकर माफी मांग ली है जिससे विवाद खड़ा हो गया था और जिसे यहूदियों के खिलाफ की गई टिप्पणी माना गया.राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी निन्दा करते हुए इसे ‘‘भयानक बयान’’ करार दिया.

उमर नवंबर में डेमोक्रेट सदस्य के रूप में प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गईं.रविवार को उन्होंने एक ट्वीट में प्रभावशाली अमेरिकन इजराइल पब्लिक अफेयर्स कमेटी (एआईपीएसी) और कांग्रेस सदस्यों के बीच वित्तीय संबंध पर सवाल खड़ा किया था.

उमर (37) ने एक रिपब्लिकन आलोचक को प्रतिक्रिया देते हुए और बेंजामिन फ्रैंकलिन की तस्वीर वाले 100 डॉलर के नोट का जिक्र करते हुए कहा था कि यह धन का मामला है. उन्होंने कहा, ‘‘यहूदियों के प्रति दुर्भावना एक वास्तविकता है और मैं यहूदी सहयोगियों और सहर्किमयों की आभारी हूं जो मुझे यहूदी विरोध के दुखद इतिहास के बारे में शिक्षित कर रहे हैं.’’

उनके ट्वीटों पर शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं की ओर से माफी की मांग उठने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘अपने निर्वाचकों या यहूदी समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाने का मेरा कभी भी कोई इरादा नहीं रहा.इसलिए मैं माफी मांगती हूं.’’

ट्रंप ने सोमवार को एअरफोर्स वन में सवार संवाददाताओं से कहा कि माफी पर्याप्त नहीं है. राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उन्हें (उमर) खुद पर र्शिमन्दा होना चाहिए.मेरा मानना है कि यह भयानक बयान है और मुझे नहीं लगता कि माफी पर्याप्त है.’’ हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक नेताओं ने उमर के ट्वीटों को अत्यंत आपत्तिजनक बताया.

अफगानिस्तान को आतंकवादियों की पनाहगाह नहीं बनने देना चाहता अमेरिका : शानाहान
अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शानाहान ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को कहा है कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल कभी भी आतंकवादियों के पनाहगाह के तौर पर नहीं हो. तालिबान के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के इरादे से शानाहान युद्धग्रस्त देश की अचानक यात्रा पर गये थे.

शानाहान ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में गनी से बात की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दक्षिण एशिया रणनीति पर अमल के माध्यम से अफगानिस्तान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी. ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में अपनी दक्षिण एशिया रणनीति की शुरुआत की थी.

पेंटागन के प्रवक्ता कमांडर सीन रॉबर्टसन ने कहा, ‘‘नेताओं ने रक्षा मुद्दों पर व्यापक चर्चा की. इसमें अमेरिका-अफगानिस्तान सुरक्षा संबंध का महत्व और युद्ध को लेकर राजनीतिक समझौते पर पहुंचना शामिल है ताकि यह सुनिश्चित हो कि अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल कभी भी आतंकवादियों की पनाहगाह के तौर पर तथा अमेरिका के खिलाफ आतंकवादी हमलों के लिये नहीं किया जा सके.’’

बैठक के दौरान शानाहान ने अफगान और गठबंधन सेनाओं के बलिदान की प्रशंसा की और अपने देश की रक्षा के लिये लड़ाई का नेतृत्व कर रहे अफगान सेना के प्रति अमेरिकी समर्थन की एक बार फिर पुष्टि की. शानाहान सोमवार को अफगानिस्तान की अचानक यात्रा के लिये रवाना हुए थे. यह उनकी पहली अफगानिस्तान यात्रा है जहां अमेरिकी सेना पिछले 17 साल से मौजूद है.

प्राप्त सूचना के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अफगानिस्तान में 14,000 अमेरिकी सेना की संख्या में कटौती कर इसे तकरीबन आधी करना चाहते हैं और तालिबानी नेताओं ने शांति वार्ताओं में अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का अहम शर्त रखा है. शानाहान ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि फिलहाल अमेरिकी सेना की संख्या में कटौती का उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि अमेरिका की भूमिका अहम है लेकिन आखिरकार शांति तलाशना तो अफगानियों पर है.

उन्होंने कहा, ‘‘अफगानों को यह फैसला करना होगा कि वे अफगानिस्तान को किस रूप में देखना चाहते हैं. यह अमेरिका के बारे में नहीं यह अफगानिस्तान के बारे में है.’’ कार्यवाहक अमेरिकी रक्षा मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पिछले महीने कतर में तालिबान अधिकारियों के साथ अमेरिका की अहम वार्ता हुई थी. यह वार्ता 17 साल से जारी संघर्ष को खत्म करने का प्रयास थी.

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