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धन की कमी से जूझ रही कांग्रेस को राजनीति में प्रियंका के आने से होगा लाभ

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वाशिंगटन/लखनऊ. विदेश नीति से संबंधित अमेरिका की एक प्रभावशाली पत्रिका ने कहा है कि प्रियंका गांधी के कांग्रेस महासचिव बनने से पार्टी के चुनावी भविष्य पर पड़ने वाला प्रभाव भले ही स्पष्ट नहीं है लेकिन इससे सत्तारूढ़ भाजपा की तुलना में पार्टी को अपने धन एवं संसाधन के अंतर को कम करने में अवश्य मदद मिलेगी.

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मिलन वैष्णव ने प्रतिष्ठित ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका में लिखे अपने ताजा लेख में कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी की नई प्रचारक भले ही वास्तव में चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन वह ऐसे देश में पार्टी के वित्तपोषण संबंधी अंतर को कम कर सकती हैं जहां चुनाव जीतने के लिए बहुत धन की आवश्यकता होती है.’’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी को पिछले महीने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिये पार्टी का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया था. प्रियंका ने अपने भाई के साथ लखनऊ में सोमवार को रोड शो किया था. वैष्णव ने कहा कि प्रियंका के राजनीति में औपचारिक प्रवेश से पार्टी में जोश आया है जिसकी उसे बहुत आवश्यकता थी.

उन्होंने कहा, ‘‘खबरों के अनुसार वित्तीय कमी के कारण पार्टी आलाकमान से कांग्रेस की राज्य इकाइयों को धन नहीं मिल पा रहा है.’’ ‘कॉस्ट्स आॅफ डेमोक्रेसी: पॉलिटिकल फाइनेंस इन इंडिया’ पुस्तक के सह लेखक वैष्णव ने कहा, ‘‘प्रियंका गांधी ने ऐसे समय में सक्रिय राजनीति में कदम रखा है जब कांग्रेस को हर संभव मदद की आवश्यकता है. पार्टी को 2014 आम चुनावों के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद कुछ जगह जीत मिली है. प्रियंका के आने से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा हुआ है, जिसकी उन्हें बहुत आवश्यकता है.’’

उन्होंने लिखा,‘‘ पिछले ही महीने कांग्रेस को चुनावी रूप से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में अहम विपक्षी गठबंधन से बाहर रखा गया था. पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के पार्टी की प्रचार मुहिम का नेतृत्व करने से पार्टी साथी विपक्षी ताकतों से लाभ ले सकती है. इसी क्षेत्र में प्रियंका की मां, भाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीटें हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रियंका की भूमिका केवल सहयोगियों को साथ लाने और मनोबल बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इससे धन जुटाने में भी मदद मिलेगी. पार्टी धन की कमी से जूझ रही है.’’ वैष्णव ने कहा कि प्रियंका के आने से सोशल मीडिया पर भाजपा के प्रभुत्व को चुनौती मिलेगी. ट्विटर पर प्रियंका के आने के 24 घंटे के भीतर ही उनके 13000 से अधिक फॉलोवर हो गए थे.

जयपुर से लखनऊ लौटीं प्रियंका : शुरू हुआ बैठकों का सिलसिला
मिशन—उत्तर प्रदेश पर निकलीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज दोपहर जयपुर से लौटने के बाद अपने लखनऊ दौरे के दूसरे दिन लोकसभावार बैठकों का दौर शुरू किया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी प्रियंका ने जयपुर से लौटने के बाद अपने जिम्मे वाले लोकसभा क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू किया.

प्रियंका कल राजधानी में रोड शो करने के बाद अपने पति रॉबर्ट वाड्रा से मुलाकात के लिये देर रात विशेष विमान से जयपुर रवाना हो गयी थीं. वह दोपहर करीब एक बजे लखनऊ हवाई अड्डे पर पहुंची. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर समेत कई वरिष्ठ नेता उनकी अगवानी के लिये हवाई अड्डे पहुंचे थे.

प्रवर्तन निदेशालय वाड्रा और उनकी मां मॉरीन से बीकानेर में जमीन खरीद मामले में पूछताछ कर रहा है. पूर्वी उत्तर प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी प्रियंका लखनऊ के चार दिन के दौरे पर हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रियंका आज लखनऊ, मोहनलालगंज, प्रयागराज, अम्बेडकर नगर, सीतापुर, कौशाम्बी, फतेहपुर, बहराइच, फूलपुर और अयोध्या समेत 11 लोकसभा क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं तथा पदाधिकारियों के साथ एक—एक कर बैठक कर रही हैं. बैठकों का यह दौर देर रात तक जारी रहेगा.

इसके अलावा, प्रियंका बुधवार और गुरुवार को भी अपने प्रभार वाले बाकी लोकसभा क्षेत्रों में भी पार्टी की स्थिति का जायजा लेंगी. पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रियंका इन बैठकों में हर लोकसभा क्षेत्र में पार्टी संगठन की स्थिति का जायजा ले रही हैं. प्रियंका की इन बैठकों को आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

प्रियंका ने सोमवार को लखनऊ में एक रोडशो के जरिये अपने चुनाव अभियान की जोरदार शुरुआत की थी. इस दौरान उनके साथ उनके भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रभारी ज्योतिरादित्य ंिसधिया भी मौजूद थे. उल्लेखनीय है कि प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश की 42 सीटों की जिम्मेदारी दी गयी है और राज्य के इस हिस्से में भाजपा का खासा दबदबा माना जाता है. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी क्षेत्र के वाराणसी की नुमाइंदगी करते हैं.

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