देशविदेश

आतिश तासीर मामला: लेखकों ने सरकार के कदम को अपमानजनक और प्रतिशोधात्मक बताया

तासीर ने टाइम पत्रिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘डिवाइडर इन चीफ’ शीर्षक से आलेख लिखा था

नयी दिल्ली. लेखक एवं पत्रकार आतिश तासीर का ओवरसीज सिटीजन आॅफ इंडिया (ओसीआई) का दर्जा समाप्त करने के भारत सरकार के फैसले के बाद शुक्रवार को कई लेखक और विद्वान ब्रिटिश मूल के लेखक के पक्ष में सामने आए.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तासीर भारतीय पत्रकार तवलीन ंिसह और पाकिस्तान के दिवंगत नेता सलमान तासीर के बेटे हैं. उन्हें ओसीआई कार्ड के लिहाज से अयोग्य कर दिया गया है क्योंकि यह कार्ड ऐसे किसी व्यक्ति को जारी नहीं किया जाता है जिसके माता-पिता या दादा-दादी पाकिस्तानी हों और उस व्यक्ति ने वह तथ्य छिपाया हो.

सरकार के इस कदम पर साहित्य जगत में चर्चा हो रही है. लेखिका-कार्यकर्ता अरुंधति रॉय ने इस कदम को अपमानजनक और डरावना बताया तो कवि एवं लेखक जीत थायिल ने इसे ‘बदले की भावना से उठाया गया दुर्भाग्यपूर्ण कदम’ बताया. कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने भारत सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि क्या वह इतनी कमजोर है कि उसे एक पत्रकार से डर लगता है.

रॉय ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘सरकार मीडिया को अपने हिसाब से चलाने के लिए इस धमकी का, साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के विदेश मामलों के संवाददाताओं, स्वतंत्र रूप से काम करने वाले विद्वानों और पत्रकारों को वीजा नहीं देने की धमकी का भी इस्तेमाल कर रही है.’’ सात महीने पहले ही तासीर ने टाइम पत्रिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘डिवाइडर इन चीफ’ शीर्षक से आलेख लिखा था.

थायिल ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘यह बदले की भावना से उठाया गया दुर्भाग्यपूर्ण कदम है जो भाजपा के लिए र्शिमंदगी का कारण बनेगा. आतिश एक भारतीय, दिल्लीवाले और एक लेखक हैं. उन्हे निर्वासित करके आप उन्हें शहीद बना रहे हैं तथा उन्हें और किताबों के लिए सामग्री मुहैया करवा रहे हैं. निर्वासन लेखक की स्वाभाविक अवस्था है.’’

तासीर ने टाइम में एक लेख में लिखा था कि वह दो वर्ष की आयु से भारत में रह रहे थे और 21 वर्ष के होने तक अपने पिता से नहीं मिले थे. उनके माता-पिता का विवाह नहीं हुआ था और उनकी मां ने ही इकलौती अभिभावक के तौर पर उनकी परवरिश की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के जवाब में लेखक ने भारत के उप महावाणिज्य दूत के साथ ईमेल संवाद के स्क्रीन शॉट साझा किए और कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए महज 24 घंटे दिए गए जबकि नियमानुसार 21 दिन का वक्त दिया जाता है.

थरूर ने ट्वीट किया, ‘‘यह दुखद है कि हमारी सरकार के एक आधिकारिक प्रवक्ता झूठा दावा कर रहे हैं जिसे आसानी से असत्य प्रमाणित किया जा सकता है. यह और भी ज्यादा पीड़ा की बात है कि हमारे लोकतंत्र में इस तरह की चीजें होती हैं. क्या हमारी सरकार इतनी कमजोर है कि एक पत्रकार से डर रही है?’’ ‘द टेंपल गोअर्स’ के लेखक और पुरस्कार से सम्मानित , अमेरिका में बसे तासीर के प्रति एकजुटता दिखाते हुए अमेरिकी लेखक अमिताभ घोष ने स्वीडन की उप्पासल यूनिर्विसटी के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसल अशोक स्वैन की एक पोस्ट को रीट्वीट किया जिसमें लिखा है, ‘‘आप मोदी के खिलाफ लिखते हैं तो आप भारतीय नहीं रह जाते हैं.’’ इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने भी सरकार के कदम की आलोचना की.

उन्होंने लिखा, ‘‘अगर कोई सोचता है कि आतिश तासीर कट्टर इस्लामवादी है तो या तो वह पढ़ नहीं सकता, या उसने आतिश तासीर के लिखे एक भी शब्द को नहीं पढ़ा है, या वह मानता है कि नरेंद्र मोदी जो भी कहते हैं या करते हैं, उसका आलोचक हमेशा कोई कट्टर इस्लामवादी हो सकता है.’’ लेखक देवदत्त पटनायक ने भी तासीर के समर्थन में कुछ व्यंग्यात्मक ट्वीट किये.

उन्होंने लिखा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि सारे भारत माता त्यागी जिन्होंने डॉलर के लिए भारतीय पासपोर्ट छोड़ दिये, उनके पास यह साबित करने के लिए कागजात हैं कि उनके पिता भारतीय थे. नहीं तो ओसीआई चला जाएगा.’’ एक अन्य ट्वीट में पटनायक ने देवी सीता की उनके पुत्रों लव और कुश के साथ तस्वीर डाली और लिखा, ‘‘वन कभी भी लव और कुश को इसलिए अस्वीकार नहीं करेगा क्योंकि उनके पिता अयोध्या के राजा हैं.’’

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close