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अयोध्या राम की जन्मस्थली: अधिवक्ता ने न्यायालय में पुराणों से लेकर यात्रा वृतांत तक का उल्लेख किया

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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय में बुधवार को ‘राम लला विराजमान’ के अधिवक्ता ने ऋषियों द्वारा लिखे गए पुराणों से लेकर अंग्रेज व्यापारी के यात्रा वृतांत, एक इसाई धर्मप्रचारक (मिशनरी) और चिकित्सक का उल्लेख करते हुए दावा किया कि हिन्दुओं का लंबे समय से विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है. दशकों पुराने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में एक पक्षकार ‘राम लला’ ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से शीर्ष अदालत को बताया कि ये सभी ऐतिहासिक सामग्री हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को दर्शाती है कि अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है और विवादित स्थल पर एक मंदिर था. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ को ‘राम लला’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने बताया कि विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों ने भगवान राम की जन्मभूमि के बारे में हिन्दुओं की आस्था और विश्वास को दर्ज किया है. वैद्यनाथन ने पीठ से कहा कि इन प्रकाशनों में जो महत्वपूर्ण है वह है भगवान राम और अयोध्या में हिन्दुओं की आस्था और विश्वास. हिन्दुओं की यह आस्था और विश्वास अतीत में भी रहा है और इसे विभिन्न पुस्तकों में दर्ज किया गया है. यदि लोगों की यह धारणा है, तो भूमि को दो या तीन हिस्सों में विभाजित नहीं किया जा सकता.

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.वर्ष 1608-11 के दौरान भारत आए अंग्रेज व्यापारी विलियम ंिफच के यात्रा वृतांत का उल्लेख करते हुए वैद्यनाथन ने पीठ को बताया कि उन्होंने इस तथ्य को दर्ज किया था कि अयोध्या में एक किला या महल था जहां हिन्दुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म हुआ है.अकबर और जहांगीर के शासन काल में यात्रा करने वाले ंिफच ने ‘अर्ली ट्रैवल्स टु इंडिया’ पुस्तक लिखी. वरिष्ठ अधिवक्ता ने इसमें प्रकाशित यात्रा वृत्तांत का हवाला देते हुये कहा कि इस अंग्रेज व्यापारी ने उल्लेख किया है कि हिन्दुओं का मानना है कि अयोध्या भगवान राम का ‘जन्मस्थान’ है.वैद्यनाथन ने भगवान राम के जन्म स्थान के प्रति जनता की आस्था के बारे में अपनी दलीलों के समर्थन में ब्रिटिश सर्वेक्षक मोंटगोमेरी मार्टिन और जेसूट मिशनरी जोसेफ टाइफेन्थलर द्वारा लिखित वृत्तांत सहित अन्य यात्रा वृत्तांतों का भी हवाला दिया. इनमें स्काटलैंड के चिकित्सक फ्रांसिस बुचनेन जिन्होंने 1807-1814 के मध्य भारत की यात्रा की, का यात्रा वृतांत शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह लोगों का विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां भगवान राम का जन्म हुआ था. इसे हमेशा से ही भगवान राम का जन्म स्थान माना गया है.’ वैद्यनाथन ने अपनी दलीलों के समर्थन में ‘पुराणों’ का भी हवाला दिया और कहा कि इनके अनुसार भी हिन्दुओं का यह विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और न्यायालय को इसके आगे जाकर यह नहीं देखना चाहिए कि यह कितना तर्कसंगत है. इस प्रकरण में छठे दिन की सुनवाई के दौरान पीठ ने वैद्यनाथन से जानना चाहा, ‘‘पहली बार कब इसे बाबरी मस्जिद नाम से पुकारा गया?’’ वैद्यनाथन ने इस पर कहा, ‘‘19वीं सदी में. ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जिससे पता चले कि इससे पहले (19वीं सदी से पहले) इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था.’’ इस पर पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या ‘बाबरनामा’ इस बारे में पूरी तरह खामोश है?’’

वैद्यनाथन ने जब यह कहा कि ‘बाबरनामा’ इस बारे में खामोश है तो पीठ ने सवाल किया, ‘‘ऐसा कौन सा तथ्यपरक साक्ष्य उपलब्ध है कि बाबर ने इसे (मंदिर) गिराने का निर्देश दिया था?’’ इस पर राम लाल विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि बाबर ने अपने सेनापति को यह ढांचा गिराने का हुक्म दिया था. एक मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने ‘बाबरनामा’ में बाबर की अयोध्या यात्रा के बारे में कोई जिक्र न होने के वैद्यनाथन के कथन पर आपत्ति की. धवन ने कहा कि ‘बाबरनामा’ में इस बात का उल्लेख है कि बाबर ने अयोध्या के लिये नदी पार की और इस पुस्तक के कुछ पन्ने नदारद भी हैं. बहस के दौरान वैद्यनाथन ने कहा कि इसे लेकर दो कथन हैं–पहला बाबर द्वारा मंदिर गिराने के बारे में और दूसरा मुगल शासक औरंगजेब द्वारा इसे गिराने के बारे में. लेकिन मस्जिद पर लिखी इबारत से पता चलता है कि बाबर ने विवादित जगह पर तीन गुंबद वाले ढांचे का निर्माण कराया था.

उन्होंने पीठ से कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि ढांचा (मंदिर) वहां पर था और यह (मस्जिद) निर्माण उस स्थान पर हुआ जिसे हिन्दु मानते हैं कि यह (राम का) ‘जन्मस्थान’ है.’’इससे पहले, सुनवाई शुरू होने पर वैद्यनाथन ने कहा कि वह पहले दस्तावेजी साक्ष्य के बारे में बहस करेंगे और फिर इस मामले के मौखिक सबूत तथा पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों पर आयेंग ‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने मंगलवार को शीर्ष अदालत से कहा कि भगवान राम का जन्मस्थान देवता भी है और मुस्लिम अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर अपना दावा नहीं कर सकते क्योंकि संपत्ति का किसी भी तरह का बंटवारा देवता को ही ‘नष्ट’ करना और ‘भंजन’ करने जैसा होगा.

शीर्ष अदालत राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सितंबर, 2010 के अपने फैसले में अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में एक पक्षकार ‘राम लला’ को 2.77 एकड़ विवादित भूमि में एक तिहाई हिस्सा देने का आदेश दिया गया था. इसमें निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड दूसरे पक्षकार हैं. मामले में सुनवाई अधूरी रही और अब यह 16 अगस्त को होगी.

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय में बुधवार को ‘राम लला विराजमान’ की ओर से दलील दी गई कि यह हिन्दुओं की आस्था और विश्वास है कि अयोध्या ही भगवान राम का जन्मस्थल है और उनका जन्म विवादित ढांचे वाले स्थान पर हुआ था. ‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से कहा कि ‘पुराणों’ के अनुसार हिन्दुओं का यह विश्वास है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और न्यायालय को इसके आगे जाकर यह नहीं देखना चाहिए कि यह कितना तर्कसंगत है.

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं. वैद्यनाथन ने अयोध्या प्रकरण की सुनवाई में छठे दिन बहस शुरू करते हुये 1608-1611 के दौरान भारत आये अंग्रेज व्यापारी विलियम ंिफच के यात्रा वृतांत का उल्लेख किया जिसमे दर्ज किया गया था कि अयोध्या में एक किला या महल था जहां, हिन्दुओं का विश्वास है कि भगवान राम का जन्म हुआ था.

उन्होंने कहा, ‘‘यह लोगों का विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां भगवान राम का जन्म हुआ था. इसे हमेशा से ही भगवान राम का जन्म स्थान माना गया है.’’ वैद्यनाथन ने कहा कि ंिफच का यात्रा वृत्तांत ‘अर्ली ट्रैवेल्स टू इंडिया’ पुस्तक में प्रकाशित हुआ. इसमें इस बात का उल्लेख है कि हिन्दुओं का मानना है कि अयोध्या ही भगवान राम का ‘जन्मस्थान’ है.

वरिष्ठ अधिवक्ता ने अयोध्या के ही भगवान राम का जन्म स्थान होने के बारे मे लोगों की आस्था को लेकर जोर देते हुये अपनी दलीलों के समर्थन में ब्रिटिश सर्वेक्षक मोन्टगोमेरी मार्टिन और मिशनरी जोसेफ टाइफेन्थर सहित अन्य के यात्रा वृत्तांतों का भी जिक्र किया.

सुनवाई के दौरान पीठ ने वैद्यनाथन से जानना चाहा, ‘‘पहली बार कब इसे बाबरी मस्जिद नाम से पुकारा गया?’’ वैद्यनाथन ने इस पर कहा, ‘‘19वीं सदी में. ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जिससे पता चले कि इससे पहले (19वीं सदी से पहले) इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था.’’ इस पर पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या ‘बाबरनामा’ इस बारे में खामोश है?’’

वैद्यनाथन ने जब यह कहा कि ‘बाबरनामा’ इस बारे में खामोश है तो पीठ ने सवाल किया, ‘‘ऐसा कौन सा तथ्यपरक साक्ष्य उपलब्ध है कि बाबर ने इसे (मंदिर) गिराने का निर्देश दिया था?’’ इस पर राम लाल विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि बाबर ने अपने सेनापति को यह ढांचा गिराने का हुक्म दिया था.

एक मुस्लिम पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने ‘बाबरनामा’ में बाबर की अयोध्या यात्रा के बारे में कोई जिक्र न होने के वैद्यनाथन के कथन पर आपत्ति की. धवन ने कहा कि ‘बाबरनामा’ में इस बात का उल्लेख है कि बाबर ने अयोध्या के लिये नदी पार की और इस पुस्तक के कुछ पन्ने नदारद भी हैं.

बहस के दौरान वैद्यनाथन ने कहा कि इसे लेकर दो कथन हैं–पहला बाबर द्वारा मंदिर गिराने के बारे में और दूसरा मुगल शासक औरंगजेब द्वारा इसे गिराने के बारे में. लेकिन मस्जिद पर लिखी इबारत से पता चलता है है कि बाबर ने विवादित जगह पर तीन गुंबद वाले ढांचे का निर्माण कराया था.

उन्होंने पीठ से कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि ढांचा (मंदिर) वहां पर था और यह (मस्जिद) निर्माण उस स्थान पर हुआ जिसे हिन्दु मानते हैं कि यह (राम का) ‘जन्मस्थान’ है.’’ इससे पहले, सुनवाई शुरू होने पर वैद्यनाथन ने कहा कि वह पहले दस्तावेजी साक्ष्य के बारे में बहस करेंगे और फिर इस मामले के मौखिक सबूत तथा पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों पर आयेंगे.

‘राम लला विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने मंगलवार को शीर्ष अदालत से कहा कि भगवान राम का जन्मस्थान देवता भी है और मुस्लिम अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर अपना दावा नहीं कर सकते क्योंकि संपत्ति का किसी भी तरह का बंटवारा देवता को ही ‘नष्ट’ करना और ‘भंजन’ करने जैसा होगा.

शीर्ष अदालत राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई कर रही है. उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान- के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था.

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