Home देश एम्स में अब सुई की नोंक के बराबर कैंसर की होगी पहचान

एम्स में अब सुई की नोंक के बराबर कैंसर की होगी पहचान

37
0

रायपुर. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इस महीने कैंसर और हृदय रोगियों के लिए एडवास्ड पेटसिटी स्कैन की सुविधा शुरू हो जाएगी. 20 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत वाले इस स्कैन मशीन के चलते शरीर में सूई की नोक के बराबर कैंसर डायग्नोस हो जाएगा. वहीं इसके लिए निजी अस्पतालों की तुलना में एम्स के मरीजों को बमुश्किल
3 हजार रुपए खर्च करने होंगे.

बताया गया कि पेटसिटी स्कैन की शुरुआत 15 हजार से शुरू होती है. एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम नागरकर ने बताया कि अभी बीएआरसी और डिपार्टमेंट आॅफ एटॉमिक रिसर्च से लायसेंस की प्रक्रिया शुरू हो गई है, पिछले एक महीने से इस मशीन के रिपोर्ट की
सूक्ष्म जांच पड़ताल की जा रही है. इसलिए अक्टूबर महीने के अंत तक इस मशीन से डायग्नोस शुरू हो जाएगी.

एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन डिपार्टमेंट में एक साल पहले शुरू हुए स्पैक्ट सिटी स्कैन के परिणाम अच्छे आए, इसीलिए इसकी एडवांस्ड
टेक्नालॉजी के रूप में पेट सिटी स्कैन अब शुरू हो जाएगी. डॉ.नागरकर ने बताया कि इस एडवॉस्ट टेक्नालॉजी को एम्स के शुरू करने से पहले ही चिकित्सकों के साथ टेक्नीशियन की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई.

दिल्ली एम्स व चंडीगढ़ से आएंगे विशेषज्ञ
पेटसिटी स्कैन के लिए दिल्ली एम्स, एसजीपीजीआई लखनऊ और पीजीआई चंडीगढ़ से चिकित्सक व टेक्नीशियन का चयन एम्स में कर
लिया गया. लायसेंस की प्रक्रिया पूरी होते ही इनकी भर्ती कर ली जाएगी.

अब पकड़ म ेंआएगा कंै सर
इस मशीन से कैंसर को प्रथम चरण से पहले ही डायग्नोस करने के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा. इसके चलते मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाएगी.

बाईपास सजर्र ी की स्थिति स्पष्ट होगी
एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. करन पिपरे ने बताया कि इस मशीन से हार्टअटैक की स्थिति में बाईपास सर्जरी हो पाएगी या नहीं इसका भी पता लग जाएगा.

आईसोटोप की लाईफ 1 घटं ा 10 मिनट
पेट सिटी के जरिए शरीर में छुपी कैंसर की सूक्ष्म कोशिकाओ ंकी जाच्ं ा के लिए मरीज को विशेष ग्लकू ोज के साथ रेडियोआइसोटोप का इंजक्े शन लगग्े ाा. डा.ॅ पिपरे ने बताया कि इस दवा की लाइफ 1 घंटे 10 मिनट है. इसीलिए इसे जरूरत के मुताबिक मंगाया जाएगा.

इस तरह काम करता है आइसोटोप
यह इंजेक्शन कैंसर कोशिकाओं में पहुंचकर पाजीट्रॉन निकालता है, जिसे रेडियोएक्टिव आइसोटोप पकड़कर इमेज भेजने में मदद करता है. इससे पता चल जाता है कि कैंसर वाली कोशिकाएं किस अंग से ज्यादा ग्लूकोज ले रही. यही सिग्नल पेटसिटी पकड़ लेगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here