Home देश मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में बाधा पैदा करने का चीन...

मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने में बाधा पैदा करने का चीन ने किया बचाव

22
0

बीजिंग/संयुक्त राष्ट्र. चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के मार्ग में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तकनीकी रोक लगाने के अपने फैसले का बृहस्पतिवार को बचाव किया और कहा कि इससे ‘‘स्थायी समाधान’’ तलाशने के लिए संबंधित पक्षों के बीच वार्ता में मदद मिलेगी.

यह पूछे जाने पर कि चीन ने मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के कदम को एक बार फिर क्यों बाधित किया, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बींिजग का फैसला समिति के नियमों के अनुसार है.

उन्होंने कहा कि चीन को ‘‘वास्तव में यह उम्मीद है कि इस समिति के प्रासंगिक कदम संबंधित देशों की मदद करेंगे ताकि वे वार्ता एवं विचार-विमर्श करें और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए और जटिलता पैदा नहीं हो.’’ लु ने कहा, ‘‘जहां तक 1267 समिति में तकनीकी रोक की बात है, तो हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया है कि समिति के पास मामले के अध्ययन के लिए उचित समय हो और संबंधित पक्षों को वार्ता और विचार-विमर्श के लिए समय मिल सके.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान ही इस मसले के स्थायी समाधान का अवसर मुहैया करा सकता है. चीन इस मामले से उचित तरीके से निपटने के लिए भारत समेत सभी पक्षों से बातचीत एवं समन्वय के लिए तैयार है.’’ लु ने कहा कि संगठनों और व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रियाओं को लेकर सुरक्षा परिषद 1267 समिति के स्पष्ट मानक हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘चीन इन आवेदनों की पूर्ण और गहन जांच करता है और हमें अब भी और समय चाहिए इसीलिए हमने तकनीकी रोक लगाई है.’’ भारत ने मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के कदम को चीन की ओर से तकनीकी रूप से बाधित किए जाने के बाद निराशा जताई थी.

उल्लेखनीय है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव पर बुधवार को तकनीकी रोक लगा दी. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’’ के तहत मसूद को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी. इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है. समिति के सदस्यों के पास प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 कामकाजी दिन का वक्त था. यह समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले चीन ने प्रस्ताव पर ‘तकनीकी रोक’ लगा दी और प्रस्ताव की पड़ताल करने के लिए और वक्त मांगा.

लु ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनंिफग के बीच पिछले साल हुई वुहान शिखर वार्ता संबंधी एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘शी और मोदी ने चार बार मुलाकात की. खासकर वुहान शिखर वार्ता ने काफी प्रगति की. चीन भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है ताकि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बनाए जा सकें.’’

उन्होंने कश्मीर मामले पर कहा कि चीन का रुख स्पष्ट एवं स्थिर है. लु ने कहा, ‘‘यह भारत एवं पाकिस्तान के बीच का मामला है. हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष मित्रवत् वार्ता करेंगे और इस मामले एवं अन्य संबंधित मामलों को सुलझाएंगे.’’

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय ने प्रतिबंध समिति को अजहर से जुड़े प्रस्ताव पर चीन की रोक के बारे में बताया
संयुक्त राष्ट्र सचिवालय ने सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के सदस्यों को पाकिस्तान स्थित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन की रोक के बारे में जानकारी दे दी है.

फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’’ के तहत मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था. संयुक्त राष्ट्र के आधा दर्जन से ज्यादा देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 आईएसआईएल और अल कायदा प्रतिबंध समिति’’ को भेजे गए नोट को पीटीआई-भाषा ने देखा है. इसमें कहा गया है कि सचिवालय समिति के सदस्यों को बताना चाहता है कि चीन ने मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी को आईएसआईएल तथा अलकायदा प्रतिबंधों की सूची में डालने के अमेरिका, ब्रिटेन तथा फ्रांस के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है.

प्रस्ताव पर चीन की रोक छह महीने तक वैध रहेगी. अगर समिति के सदस्य प्रस्ताव पर विचार करने के लिये अतिरिक्त समय मांगते हैं तो इसे तीन और महीनों के लिये बढ़ाया जा सकता है. उधर, नयी दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के इस कदम पर निराशा जाहिर की.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here