देश

भीमा कोरेगांव मामले में समर्पण के लिये नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने न्यायालय से मांगा समय

नयी दिल्ली. नागिरक अधिकार कार्यकता गौतम नवलखा और आनंद तेल्तुम्बडे ने कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुये उच्चतम न्यायालय से बुधवार को अनुरोध किया कि उन्हें भीमा कोरेगांव ंिहसा मामले में जेल अधिकारियों के समक्ष समर्पण करने के लिये और समय दिया जाए.

इन कार्यकर्ताओं ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जेल जाने का मतलब ‘मौत की सजा’ जैसा ही है. शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को इन कार्यकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुये कहा था कि यह नहीं कहा जा सकता कि उनके खिलाफ पहली नजर में कोई मामला नहीं बना है. हालांकि, न्यायालय ने इन कार्यकर्ताओं को जेल अधिकारियों के समक्ष समर्पण करने के लिये तीन सप्ताह का वक्त दिया था.

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच एजेन्सी की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष सुनने के बाद कहा कि इस आवेदन पर बाद में आदेश सुनाया जायेगा. मेहता ने कहा कि यह सिर्फ समर्पण करने से बचने के प्रयास का तरीका है जबकि दोनों ही आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं.

आरोपियों के वकील का कहना था कि ये कार्यकर्ता पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें समर्पण करने के लिये अधिक समय की आवश्यकता है. पुणे पुलिस ने कोरेगांव भीमा गांव में 31 दिसंबर 2017 की ंिहसक घटनाओं के बाद एक जनवरी, 2018 को नवलखा, तेल्तुम्बडे और कई अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ माओवादियों से कथित रूप से संपर्क रखने के कारण मामले दर्ज किये थे.


Join
Facebook
Page

Follow
Twitter
Account

Follow
Linkedin
Account

Subscribe
YouTube
Channel

View
E-Paper
Edition

Join
Whatsapp
Group

04 Jun 2020, 3:20 AM (GMT)

India Covid19 Cases Update

216,824 Total
6,088 Deaths
104,071 Recovered

Tags

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Join Our Group whatsapp
Close