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शीर्ष अदालत ने मराठा कोटा पर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के मामले में मराठा समुदाय के लिये आरक्षण को सही ठहराने संबंधी बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने मराठा समुदाय के लिये आरक्षण को सही ठहराने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक नहीं लगायी लेकिन स्पष्ट किया कि मराठा समुदाय के लिये 2014 से आरक्षण देने संबंधी कानून कार्यान्वित नहीं किया जायेगा.

पीठ उच्च न्यायालय के 27 जून के आदेश के खिलाफ जे लक्ष्मण राव पाटिल सहित दो याचिकाकर्ताओं की अपीलों पर सुनवाई कर रही थी. अदालत ने महाराष्ट्र में शैक्षिणक संस्थाओं और नौकरियों में मराठा समुदाय के लिये कोटा निर्धारित करने संबंधी कानून की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया था.

उच्च न्यायालय ने यह जरूर कहा था कि अपरिहार्य परिस्थितियों में आरक्षण के लिये शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा पार की जा सकती है. अदालत ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार किया था कि मराठा समुदाय सामाजिक और शैंक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हैं और उनका विकास के लिये उचित कदम उठाना सरकार का कर्तव्य है.

बहरहाल, उच्च न्यायालय ने कहा था कि 16 प्रतिशत आरक्षण न्यायोचित नहीं है और यह राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुरूप 12 या 13 प्रतिशन होना चाहिए. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में मराठा समुदाय के लिये शिक्षा के क्षेत्र में 12 प्रतिशत और नौकरियों के मामले में 13 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने की सिफारिश की थी.

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