अदालत ने धनशोधन मामले में अभिनेत्री लीना पॉल की हिरासत बढ़ाई

नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने एक कारोबारी की पत्नी से 200 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़े धनशोधन के मामले में अभिनेत्री लीना मारिया पॉल से हिरासत में पूछताछ की अवधि 16 अक्टूबर तक बढ़ा दी है. विशेष न्यायाधीश परवीन ंिसह ने पॉल के पति एवं 21 मामलों में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत की अवधि भी 11 दिन बढ़ा दी है. दंपति को पूर्व में तीन दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया था जिसकी अवधि समाप्त होने पर दोनों को 12 अक्टूबर को अदालत के समक्ष पेश किया गया.

दंपति ने फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिंिवदर मोहन ंिसह की पत्नी अदिति ंिसह से कथित तौर पर धोखाधड़ी की थी. जांच एजेंसी ने दंपति की हिरासत की अवधि 11 दिन के लिए बढ़ाने का आग्रह किया था. न्यायाधीश ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड को देखने के बाद, मैंने पाया है कि अपराध से अर्जित धन की कड़ी को स्थापित करने और अन्य अभियुक्तों के बयानों से आरोपियों का सामना कराने के लिए, आरोपियों से हिरासत में और पूछताछ की आवश्यकता है. हालांकि, मुझे आरोपी लीना मारिया पॉल को 11 दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजने का कोई आधार नहीं मिला है.’’

ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक अतुल त्रिपाठी द्वारा दायर आवेदन में दावा किया गया कि धनशोधन में मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका तथा अन्य चीजों का पता लगाने के लिए आरोपियों से हिरासत में और पूछताछ किए जाने की आवश्यकता है. यह मामला अदिति ंिसह की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया था. ंिसह ने शिकायत में कहा था कि पिछले साल जून में एक व्यक्ति ने खुद को कानून मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताकर उस समय जेल में बंद उसके पति को पैसे के बदले जमानत दिलाने में मदद करने की पेशकश की थी.

शिंिवदर ंिसह को 2019 में रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) में धन की कथित हेराफेरी से संबंधित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस के मुताबिक, निर्वाचन आयोग रिश्वत मामले समेत 21 मामलों में आरोपी चंद्रशेखर ने अदिति को फोन किया था जिसे अगस्त में गिरफ्तार कर लिया गया था.

घटना के वक्त चंद्रशेखर दिल्ली की रोहिणी जेल में बंद था और वहां से रंगदारी वसूलने का रैकेट चला रहा था. पुलिस ने कहा था कि जांच के दौरान पता चला कि कनॉट प्लेस में एक बैंक के प्रबंधक और उसके दो सहयोगी धन के प्रवाह और नकदी की व्यवस्था के लिए संदिग्ध लेनदेन में शामिल थे जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था. इसने कहा था कि रोहिणी जेल के एक सहायक जेल अधीक्षक और उपाधीक्षक को रैकेट में शामिल पाया गया जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

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