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विदेश यात्रा के लिए जमानती राशि बढ़ाने की सीबीआई की अर्जी पर अदालत ने कुरैशी से मांगा जवाब

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अदालत ने सीबीआई की याचिका पर मोइन कुरैशी को जारी किया नोटिस

नयी दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सीबीआई की उस याचिका पर विवादित मांस निर्यातक मोईन अख्तर कुरैशी को नोटिस जारी किया जिसमें विदेश जाने के लिए उनकी ओर से दी जाने वाली जमानती राशि बढ़ाने की मांग की गई है.

न्यायमूर्ति चंदर शेखर ने जांच एजेंसी की उस अर्जी पर कुरैशी का जवाब मांगा जिसमें अनुरोध किया गया है कि धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के केस में आरोपी कुरैशी से ली जाने वाली जमानती राशि दो करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ रुपए कर दी जाए. हाल में एक निचली अदालत ने कुरैशी को खाड़ी खाद्य महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए 15-23 फरवरी तक यूएई और अपनी एक रिश्तेदार की शादी में शिरकत के लिए 6-20 मार्च तक पाकिस्तान जाने की इजाजत दी थी.

अदालत ने कुरैशी को निर्देश दिया था कि वह बैंक गारंटी के तौर पर अतिरिक्त दो करोड़ रुपए की जमानती राशि जमा करें. उन्हें चेतावनी दी गई थी कि यदि उन्होंने किसी शर्त का उल्लंघन किया तो जमानती राशि जब्त कर ली जाएगी.

सीबीआई ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि जमानती राशि दो करोड़ रुपए से बढ़ाकर छह करोड़ रुपए इसलिए कर दी जाए क्योंकि एक सह-आरोपी को जब निचली अदालत ने विदेश जाने की अनुमति दी तो उससे बैंक गारंटी के तौर पर छह करोड़ रुपए लिए गए. सीबीआई के वकील ने अदालत से इस मामले की सुनवाई 13 फरवरी को करने का अनुरोध किया है क्योंकि कुरैशी 14-15 फरवरी की रात देश से रवाना होने वाले हैं.

उच्च न्यायालय ने सीबीआई के वकील के मौखिक अनुरोध को मानकर मामले की अगली सुनवाई की तारीख 13 फरवरी तय कर दी. हालांकि, न्यायाधीश ने वकील द्वारा बार-बार जल्द सुनवाई की तारीख का अनुरोध करने पर अप्रसन्नता जाहिर की.

न्यायाधीश ने ईडी के वकील संजीव भंडारी से कहा, ‘‘आप सीबीआई के वकील हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप बहस करते रहेंगे. मैंने आपसे रुकने को कहा. आप पहले अदालत के अधिकारी हैं और बाद में सीबीआई के वकील हैं.’’

इससे पहले, सीबीआई ने दलील दी थी कि निचली अदालत का आदेश विकृत है क्योंकि इसमें मामले की संवेदनशीलता और सह-आरोपी प्रदीप कोनेरू पर उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई सख्त शर्तों पर विचार नहीं किया गया.

इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि जमानती राशि के तौर पर कितनी रकम तय की जाए, यह निचली अदालत का विवेकाधिकार है और कुरैशी को विदेश यात्रा की अनुमति दिए जाने के उसके आदेश में कोई विकृति नहीं है. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत ‘‘अक्षम नहीं है’’ और सीबीआई को पहले यह अर्जी वहां देनी चाहिए थी.

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