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दिल्ली उच्च न्यायालय का कमल हासन के खिलाफ जनहित याचिका पर सुनवाई से इंकार

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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें अभिनेता से नेता बने कमल हासन के एक बयान का उल्लेख करते हुए चुनावी लाभ के लिये धर्म के प्रयोग को ‘‘रोकने’’ के लिये चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि हासन ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुये कहा था, ‘‘स्वतंत्र भारत का पहला उग्रवादी एक ंिहदू था.’’ न्यायमूर्ति जी एस सिस्तानी और न्यायमूर्ति ज्योति ंिसह की पीठ ने कहा कि भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर यह अदालत विचार नहीं कर सकती है क्योंकि हासन ने इस उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर यह बयान दिया है. सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा कि यह घटना तमिलनाडु में हुई है और इसलिए, याचिकाकर्ता को वहां के उच्च न्यायालय में जाना होगा.

उपाध्याय के वकील ने कहा कि वे इस टिप्पणी के खिलाफ चुनाव आयोग में 13 मई को गये थे लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हो सका है. आयोग के वकील ने कहा कि यह सही है कि ये लोग इस तारीख को आयोग आये थे और आयोग को इस मामले को देखने के लिए और समय चाहिये. इस पर अदालत ने आयोग से कहा कि वह हासन की हालिया टिप्पणी के मामले में उपाध्याय की शिकायत पर जल्द फैसला करे और याचिका को खारिज कर दिया. यह याचिका पेशे से अधिवक्ता उपाध्याय ने दाखिल की है और इस याचिका में चुनावी लाभ के लिये धर्म के ‘‘दुरुपयोग’’ को लेकर दलों का पंजीकरण रद्द करने एवं प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई थी.उपाध्याय ने आरोप लगाया कि हासन ने चुनावी फायदे के लिये मुस्लिम समुदाय की भीड़ के बीच ‘‘जानबूझ’’ कर यह बयान दिया. याचिका में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए), 1951 की धाराओं के तहत स्पष्ट रूप से यह गलत आचरण है.

मक्कल नीधि मय्यम पार्टी के अध्यक्ष हासन ने रविवार को अपनी पार्टी के एक प्रत्याशी के पक्ष में आयोजित एक चुनावी रैली में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला ‘‘हिन्दू उग्रवादी’’ बताया था. यह उपचुनाव अरवाकुरूची विधानसभा सीट पर हो रहा है और यहां 19 मई को वोट डाले जायेंगे. याचिका में उन्होंने कहा है कि आदर्श आचार संहिता के मुताबिक कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता जिससे कि जाति और समुदायों के बीच मतभेद पैदा हो.
याचिका में कहा गया है कि हासन द्वारा चुनावी फायदे के लिए धर्म के कथित इस्तेमाल के बावजूद चुनाव आयोग ने इस संबंध में अब तक कुछ नहीं किया है.

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