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सोनिया,राहुल, प्रियंका, अन्य के खिलाफ घृणा भाषण मामले में प्राथमिकी की मांग पर शुक्रवार को सुनवाई

नयी दिल्ली/मुजफ्फरपुर. दिल्ली उच्च न्यायालय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका वाड्रा तथा अन्य के लिए खिलाफ कथित रूप से घृणा भाषण देने के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई कर सकती है.

लॉयर्स वॉइस की याचिका गुरूवार को मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष आई. पीठ ने इसे शुक्रवार को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी. याचिका में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आप विधायक अमानतुल्ला खान, मुंबई से एआईएमआईएम के पूर्व विधायक वारिस पठान तथा एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भी कथित तौर पर घृणा भाषण देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है.

याचिका में कथित घृणा भाषणों की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का अनुरोध भी किया गया है. गुरूवार को कुछ नेताओं के कथित नफरत भरे भाषणों के संबंध में अनेक याचिकाएं दाखिल की गयीं. इनमें से ंिहदू सेना की ओर से दायर एक याचिका में आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी और अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भी घृणा भाषण देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग की गई.

याचिका में एआईएमआईएम के पूर्व विधायक वारिस पठान पर कथित घृणा भाषण देने का आरोप लगाते हुए दावा किया गया कि उनके बयान से ही दिल्ली में साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ, जिनमें कई लोगों की जान गई. उच्च न्यायालय शुक्रवार को घायलों और मृतकों के लिए अस्पतालों के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करने की मांग वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई कर सकता है.

अदालत ने जनहित याचिका में केंद्र को पक्षकार बनाया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस जनहित याचिका में केंद्र को पक्षकार बनाने को मंजूरी दे दी जिसमें संशोधित नागरिकता कानून को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़की ंिहसा में प्राथमिकियां दर्ज करने और गिरफ्तारी करने का अनुरोध किया गया है.

मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने कहा कि ‘‘स्थिति की जटिलता को देखते हुए’’ केंद्र सरकार याचिका पर जवाब देने के लिए और समय मांग रही है. याचिका में संशोधित नागरिकता कानून से जुड़ी ंिहसा के सिलसिले में कथित तौर पर नफरत भरे भाषण देने के लिए भाजपा के तीन नेताओं पर प्राथमिकियां दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने बुधवार को भाजपा के तीन नेताओं के खिलाफ उनके कथित नफरत भरे भाषण को लेकर प्राथमिकियां दर्ज करने में विफल रहने पर दिल्ली पुलिस से ‘‘नाराजगी’’ जताई थी. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत ंिसह शामिल थे. उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की अनुशंसा पर न्यायमूर्ति मुरलीधर का कल देर शाम को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तबादला कर दिया गया.

नयी पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को जब जिरह शुरू हुई तो सालीसीटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि सवालों के घेरे में कुछ कथित नफरत भरे भाषण तीन हफ्ते से एक महीने तक पुराने हैं और एक दिन इंतजार करने के बजाय याचिकाकर्ताओं ने न्यायमूर्ति मुरलीधर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला ‘‘अत्यावश्यक’’ होने का हवाला देते हुए उठा दिया.

मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता एक दिन और इंतजार कर सकते थे क्योंकि मामला बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था. एसजी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में हर कोई स्थिति सामान्य करने का प्रयास कर रहा है और उन्होंने अदालत से अपील की कि इस समय वह हस्तक्षेप नहीं करे क्योंकि महानगर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना अनुकूल नहीं होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों का यह विचार है कि इस समय कोई भी निर्णय स्थिति सामान्य बनाने के लिए अनुकूल नहीं होगा. निर्णय (प्राथमिकी दर्ज करने के बारे में) कानून के मुताबिक उचित समय पर लिया जाएगा.’’ एसजी ने कहा कि अधिकारियों ने सभी आॅडियो, वीडियो क्लीप और ट्विटर सहित अन्य सामग्रियों की जांच की है और ‘‘इन सभी सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सवालों के घेरे में निर्णय (प्राथमिकी दर्ज करने पर) को आगे के लिए टाल दिया गया.’’

उन्होंने अदालत से अपील की कि गृह मंत्रालय की तरफ से दिए गए पक्षकार बनने के आवेदन को अनुमति दी जाए न कि याचिकाकर्ता के जवाब का इंतजार किया जाए जैसा कि पूर्ववर्ती पीठ ने किया था. मेहता ने कहा, ‘‘भारत सरकार का पक्षकार बनना याचिकाकर्ता के हां या नहीं पर निर्भर नहीं करता है.’’ उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने उन्हें पुलिस की तरफ से पेश होने के लिए अधिकृत किया है.

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने भी पुलिस की तरफ से पेश होने का दावा किया. उन्होंने पीठ से अपील की कि महानगर के उत्तर-पूर्व जिले में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ निर्देश जारी करे. मेहरा ने कहा, ‘‘अदालत ने कल पूछा था कि नफरत भरे भाषण के बारे में प्राथमिकियां दर्ज क्यों नहीं हो रही हैं जबकि अन्य अपराधों के लिए प्राथमिकियां दर्ज की जा रही हैं.’’

मेहरा ने अदालत से कहा, ‘‘नागरिकों के व्यापक हित में कुछ निर्देश जारी किए जा सकते हैं.’’ बहरहाल, एसजी ने कहा कि गृह मंत्रालय और पुलिस को जवाब देने के लिए समय चाहिए. मेहता ने पीठ से कहा कि ंिहसा के सिलसिले में 48 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं और राष्ट्रीय राजधानी में स्थिति सामान्य होने तक न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हो. उन्होंने कहा कि अभी तक दर्ज प्राथमिकियां आगजनी, लूट और मौतों से जुड़ी हुई हैं. ंिहसा में बृहस्पतिवार तक मरने वालों की संख्या 34 हो चुकी है और करीब 200 व्यक्ति घायल हुए हैं.

मुजफ्फरपुर में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ परिवाद दायर
भाजपा नेता कपिल मिश्रा के दिल्ली के जाफराबाद में कथित भड़काऊ भाषण के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर की जिला अदालत में गुरुवार को एक परिवाद पत्र दायर किया गया. सामाजिक कार्यकर्ता एम राजू नय्यर ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश कुमार की अदालत में कपिल मिश्रा के खिलाफ उक्त परिवाद पत्र भादवि की धारा 307, 124(ए), 420, 120(बी), 307, 353, 302 और 34(ए) के तहत दायर किया है.

नय्यर ने आरोप लगाया है कि 23 फरवरी को मिश्रा द्वारा जाफराबाद में एक जनसभा के दौरान भड़काऊ भाषण दिया. उन्होंने आरोप लगाया है कि इसके बाद ही दिल्ली में सांप्रदायिक ंिहसा हुई. अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए आगामी 12 मार्च की तारीख मुकर्र की है .

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