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महाराष्ट्र गतिरोध: फड़णवीस ने दिया इस्तीफा, कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे

मुंबई. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना के साथ मुख्यमंत्री पद की साझेदारी को लेकर जारी गतिरोध के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. राज्यपाल भगत ंिसह कोश्यारी ने उनसे ‘‘कार्यवाहक मुख्यमंत्री’’ के तौर पर काम करते रहने को कहा है.

फड़णवीस का इस्तीफा महाराष्ट्र की 13वीं विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से एक दिन पहले आया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भाजपा सरकार बनाएगी और 24 अक्टूबर को नतीजे आने के बाद भाजपा से बात न कर कांग्रेस और राकांपा से बात करने के लिये शिवसेना पर निशाना साधा. अपने कुछ मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ फड़णवीस राज भवन पहुंचे और राज्यपाल कोश्यारी को अपना इस्तीफा सौंपा.

फड़णवीस ने यहां कहा, ‘‘राज्यपाल ने मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. महाराष्ट्र के लोगों ने मुझे पांच सालों तक उनकी सेवा का मौका दिया. मैं उनका और अपने नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जे पी नड्डा और अन्य को धन्यवाद देता हूं.’’ फड़णवीस ने कहा कि राज्यपाल ने उनसे अगली व्यवस्था– नयी सरकार बनने या राष्ट्रपति शासन लगने– तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है.

उन्होंने कहा कि अगली सरकार भाजपा के नेतृत्व वाली होगी और उनकी पार्टी विधायकों की खरीद-फरोख्त में नहीं जाएगी. उन्होंने कहा कि उन्होंने ईमानदारी और पारर्दिशता के साथ स्वच्छ सरकार दी है. फड़णवीस ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के लोगों ने लोकसभा चुनावों में हमें अच्छा जनादेश दिया और विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 160 से ज्यादा सीटें मिलीं.’’ शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने हालांकि नतीजे आने के बाद जब कहा कि ‘‘सरकार बनाने के लिये शिवसेना के पास सभी विकल्प खुले हैं’’ तो यह भाजपा के लिये झटका था.

उन्होंने पूछा, ‘‘लोगों ने महायुति (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) के लिये वोट दिया था. उद्धव जी ने यह क्यों कहा कि सभी विकल्प खुले हैं जब मैंने कहा था कि नयी सरकार महायुति की होगी.’’ मुख्यमंत्री पद दोनों दलों के पास ढाई-ढाई साल रहने के शिवसेना के दावों को खारिज करते हुए फड़णवीस ने जोर देकर कहा कि ‘‘मेरी मौजूदगी में दोनों दलों द्वारा मुख्यमंत्री पद की साझेदारी को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है. वास्तव में हमनें इस मुद्दे पर बातचीत बंद कर दी थी. मैं सभी बातचीत के दौरान मौजूद था. मैंने अमित शाह जी से भी पूछा, उन्होंने भी कहा कि मुख्यमंत्री पद की साझेदारी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन कोई फैसला नहीं लिया गया था.’’ फड़णवीस ने आरोप लगाया कि बातचीत से गलतफहमी दूर की जा सकती थी लेकिन शिवसेना ने बातचीत से किनारा कर लिया.

उन्होंने कहा, ‘‘उद्धव ठाकरे मेरा फोन नहीं उठा रहे थे. हमने बातचीत बंद नहीं की. हमारे दरवाजे खुले थे.’’ भाजपा पर लगातार हमले करने वाले शिवसेना नेता संजय राउत का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ ऐसे बयान सरकार गठन के अनुकूल नहीं थे.

उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी टिप्पणियों का जवाब दे सकते थे लेकिन हमनें ऐसा किया नहीं. हमारे विरोधियों ने भी ऐसे बयान नहीं दिये जैसा कि पिछले पांच सालों में मोदी जी के खिलाफ दिये गए (शिवसेना और उसके के मुखपत्र सामना में).’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम मोदी जी की आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकते.’’ उन्होंने कहा, ‘‘नए चुनाव नहीं थोपे जाने चाहिए…राज्य को नयी सरकार मिलनी चाहिए और हम इस दिशा में प्रयास करेंगे. मुझे विश्वास है कि हम भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनाएंगे.’’

भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर रस्साकशी के कारण उनके पास संयुक्त रूप से 161 विधायकों के साथ बहुमत से अधिक का आंकड़ा होने के बावजूद सरकार गठन पर गतिरोध बना हुआ है. महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 145 है. विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 105 सीट, शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीट जीती हैं.

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