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अयोध्या मामले पर पाकिस्तान की टिप्पणी की भारत ने की निंदा

नयी दिल्ली. भारत ने शनिवार को अयोध्या के फैसले के समय को लेकर आपत्ति के लिए पाकिस्तान की आलोचना की. भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की है, वह बेहद ंिनदनीय है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने करतारपुर गलियारा खोले जाने के दिन अयोध्या मामले में फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस तरह के खुशी के मौके पर दिखाए गई ‘‘असंवेदनशीलता’’ से ‘‘बेहद दुखी’’ हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘‘‘हम एक सिविल मामले पर भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पाकिस्तान द्वारा की गई अनुचित और अनावश्यक टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून के शासन और सभी धर्मों के लिए समान आदर की अवधारणाओं से संबंधित है जो उनके लोकाचार का हिस्सा नहीं हैं. इसलिए पाकिस्तान की समझ की कमी कोई आश्चर्य की बात नहीं है, घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने की उनकी यह आदत ंिनदनीय है.’’

विदेश मंत्रालय ने अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के फैसले की जानकारी विभिन्न देशों को दी
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को अयोध्या विवाद पर उच्चतम न्यायालय के आए ऐतिहासिक फैसले से रूस, फ्रांस और ईरान सहित विभिन्न देशों के शीर्ष राजदूतों को अवगत कराया. सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप और खाड़ी देशों के राजदूतों को फैसले की जानकारी दी गई.

उन्होंने बताया कि राजदूतों को फैसले से संबंधित तथ्य और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी दी गई. इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए अयोध्या के विवादित स्थान पर न्यास के जरिये राम मंदिर बनाने का समर्थन किया और ंिहदुओं के पवित्र शहर में ही मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया.

सूत्रों ने बताया कि फैसले के बाद मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न देशों और सहयोगी देशों के राजनयिकों को इससे अवगत कराया. उन्होंने बताया कि विदेश सचिव विजय गोखले ने रणनीतिक रूप से अहम कुछ देशों और भारत के करीबी सहयोगी देशों के राजदूतों को एक-एक कर फैसले की जानकारी दी.

डीन आॅफ डिप्लोमेटिक कोर और डोमिनिकन गणराज्य के राजदूत डैन्ननेबर्ग कास्टेलानोस ने कहा, ‘‘ हालांकि यह भारत का आतंरिक मामला है. हम विदेश मंत्रालय की ओर से सभी राजनयिकों को एक-एक कर संवाद करने और फैसले को विस्तार से समझाने और इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देने के कदम की प्रशंसा करते हैं.’’

उल्लेखनीय है कि अगस्त में भी जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के फैसले के बाद भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी और अन्य देशों को इस फैसले की जानकारी दी थी.

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