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भारतीय नौसेना ने पीएलए के पोत को अंडमान से लौटने पर मजबूर किया

नयी दिल्ली/कोलकाता. नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर ंिसह ने मंगलवार को कहा कि भारतीय नौसेना ने अंडमान सागर में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में हाल में प्रवेश करने वाले चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के पोत को लौटने पर मजबूर किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से कड़ाई से निपटा जाएगा.

सेना के सूत्रों ने कहा कि अनुसंधान पोत शी यान एक सितम्बर में भारतीय जल क्षेत्र में घुस आया था लेकिन जासूसी में संलिप्त पाए जाने के संदेह में उसे वहां से वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया. नौसेना प्रमुख ने घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दिए बगैर यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमारा रूख रहा है कि अगर आप हमारे क्षेत्र में कुछ भी करते हैं तो आपको हमें सूचना देनी होगी या हमसे अनुमति लेनी होगी.’’ सूत्रों ने कहा कि पोत भारतीय जल क्षेत्र में कुछ अनुसंधान गतिविधियां करता पाया गया.

ंिहद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव पर एडमिरल ंिसह ने कहा कि किसी भी समय सात से आठ चीनी पोत क्षेत्र में सामान्य तौर पर मौजूद रहते हैं. ंिहद महासागर में 2008 से चीनी नौसेना की स्थायी मौजूदगी है और ये पोत खास तौर पर समुद्री डकैती निरोधक एस्कोर्ट बल के रूप में होते हैं.

नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘यह वास्तविकता है कि वे (ंिहद महासागर क्षेत्र में) मौजूद हैं. समुद्री शोध पोत संचालित हो रहे हैं. उन्हें गहरे समुद्री खनन के लिए कुछ क्षेत्र दिए गए हैं. इस इलाके में औसतन सात से आठ चीनी पोत मौजूद रहते हैं.’’ क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर भारत ंिचतित है. भारत ने श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, म्यामां और ंिसगापुर सहित क्षेत्र के देशों के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया है. इसका प्राथमिक उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करना है.

यह पूछने पर कि 41 देशों के साथ मिलान समुद्री अभ्यास में चीन को क्यों नहीं आमंत्रित किया गया तो नौसेना प्रमुख ने कहा कि केवल समान विचारधारा वाले देश इसका हिस्सा होंगे. अमेरिका, भारत, आॅस्ट्रेलिया और जापान के समूह ‘क्वाड’ को चीन को रोकने के कदम के तौर पर देखे जाने के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि समूह की फिलहाल कोई सैन्य भूमिका नहीं है. भारतीय नौसेना ंिहद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरीकरण की भूमिका निभाएगी.

नौसेना के वार्षिक बजट आवंटन में कटौती पर नौसेना प्रमुख ने जताई चिंता
चीन द्वारा आक्रामक तरीके से नौसेना का विस्तार किये जाने की पृष्ठभूमि में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर ंिसह ने मंगलवार को अपने बल के लिये ज्यादा बजटीय आवंटन की आवाज उठाते हुए रक्षा आवंटन में नौसेना की हिस्सेदारी 2012-13 के 18 फीसद से घटकर 2018-19 में 13 फीसद रह जाने पर ंिचता जताई.

नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित अपने वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में नौसेना प्रमुख ने कहा कि कमियों को देखते हुए जोर ‘‘प्राथमिकता, तर्कसंगतता और व्यय की अर्थव्यवस्था’’ पर है. उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा बजट में नौसेना की हिस्सेदारी 2012 के 18 फीसद के मुकाबले घटकर 2019-20 में करीब 13 फीसद रह गयी है. हमने अपनी जरूरतों को सरकार के सामने रख दिया है, हम मौजूदा संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर बल के आधुनिकीकरण के लिये प्रतिबद्ध हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘उम्मीद है कि हमें कुछ और रकम मिलेगी.’’ चीनी नौसेना के व्यापक विस्तार के बारे में पूछे जाने पर एडमिरल ंिसह ने कहा कि वे अपनी क्षमता के अनुकूल बढ़ रहे हैं और ‘‘हम अपनी क्षमता के हिसाब से चल रहे हैं.’’ ंिहद महासागर क्षेत्र में चीनी घुसपैठ पर एडमिरल ंिसह ने कहा कि किसी भी समय सात से आठ चीनी पोत आम तौर पर क्षेत्र में मौजूद रहते हैं और पड़ोसी देश द्वारा इस क्षेत्र में तैनाती 2008 में शुरू हुई. प्रस्तावित चीफ आॅफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पर उन्होंने कहा कि रणनीतिक योजनाओं को लागू करने के लिये उसके पास पर्याप्त शक्तियां होनी चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि मिलन नौसैनिक अभ्यास के लिये 41 अन्य देशों के साथ चीन को आमंत्रित क्यों नहीं किया गया, उन्होंने कहा कि सिर्फ समान विचार वाले राष्ट्र इसका हिस्सा होंगे. पड़ोस की चुनौतियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी दूसरे देश की कार्रवाई का भारत पर असर नहीं पड़ना चाहिए, और अगर असर पड़ता है तो सुरक्षा बल उससे उचित तरीके से निपटेंगे.

ंिहद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति के बारे में पूछे जाने पर नौसेना प्रमुख ने कहा कि सुरक्षित समुद्र और नियम आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये साझा हितों को सुनिश्चित करने की खातिर भारतीय नौसेना समान विचार वाले राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करने के लिये तैयार है. उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और आॅस्ट्रेलिया के बीच बने गठजोड़ की फिलहाल ंिहद-प्रशांत क्षेत्र में कोई सैन्य भूमिका नहीं है.

नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत ंिहद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन कायम करने की भूमिका निभा रहा है. यह पूछे जाने पर कि क्या चीन के साथ संयुक्त अभ्यास की कोई योजना है, एडमिरल ंिसह ने कहा कि वह ऐसे फैसले लेने के लिये अधिकृत नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है.’’ नौसेना के आधुनिकीकरण की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि अभी 50 पोत और पनडुब्बियों का निर्माण चल रहा है और उनमें से करीब 48 का निर्माण भारत में किया जा रहा है.

भारतीय नौसेना द्वारा सितंबर में भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र से चीनी पीएलए के पोतों को खदेड़े जाने के संदर्भ में नौसेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि ऐसी गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा. नौसेना की दीर्घकालीन योजना है कि उसके पास तीन विमानवाहक पोत हों जिससे दो पोत ंिहद महासागर में तैनाती के लिये हमेशा तैयार रहें. उन्होंने कहा कि स्वदेश में विकसित पहला विमानवाहक पोत 2022 तक पूरी तरह परिचालन में आ जाएगा और उस पर मिग-29 के विमानों का बेड़ा तैनात होगा.

उन्होंने कहा कि योजना के मुताबिक दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत 65 हजार टन कोटाबार विमानवाही पोत होगा जिसमें इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन होगा तथा जल्द ही इस परियोजना की मंजूरी के लिये नौसेना सरकार से मंजूरी के लिये संपर्क करेगी. नौसेना फिलहाल रूसी मूल के आईएनएस विक्रमादित्य का संचालन कर रही है जो भारत का एकमात्र विमानवाहक पोत है.

ंिहद महासागर में चीन के पोतों की जासूसी बढ़ी : नौसेना अधिकारी
पिछले कुछ वर्षों में चीनी नौसैनिक पोतों द्वारा ंिहद महासागर में जासूसी की घटनाएं बढ़ गई हैं लेकिन भारतीय नौसेना इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रख रही है. बंगाल क्षेत्र के नौसेना के प्रभारी अधिकारी कोमोडोर सुप्रभो डे ने मंगलवार को बताया कि ंिहद महासागर में कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं जिससे नौसेना को क्षेत्र में चल रही गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है. इसमें बंगाल की खाड़ी भी शामिल है.

डे ने यहां नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘पी-81 समुद्री गश्ती विमान से हम ंिहद महासागर में गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं.’’ भारत के पास वर्तमान में पी-81 लंबे रेंज के समुद्री गश्ती विमान हैं और नौसेना ने विमान के निर्माता बोइंग से चार और विमान के लिए आॅर्डर दिया है. भारतीय बेड़े में इजाफा ऐसे समय में किया जा रहा है जब चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) ंिहद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है.

डे ने बताया कि 2021 तक भारत के पास 198 पोत होंगे जिनमें से 131 पोत विभिन्न तरह के हैं. डे ने बताया कि नौसेना इलाके पर नजर रखती है और तस्करी तथा देश विरोधी गतिविधियों की निगरानी के लिए बीएसएफ, तटरक्षक बल और राज्य पुलिस के साथ समन्वय करती है.

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