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जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने अपने ‘राजनीतिक’ बयान की आलोचना को खारिज किया

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जम्मू. जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनके राजनीतिक बयानों के लिये पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की आलोचना को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह ‘नयी दिल्ली की राष्ट्रपति की सरकार के नजरिये को पेश कर रहे’ थे.

पिछले सप्ताह मलिक ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की एक सैन्य अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को ठुकरा दिया था. उन्होंने कहा था कि महबूबा मुफ्ती को गंभीरता से लिये जाने की जरूरत नहीं है और वह सुरक्षा बलों के साथ खड़े हैं. सैन्य अधिकारी पर एक आम नागरिक को यातना देने और धमकाने के आरोप थे.

मलिक के बयान पर आपत्ति जताते हुए पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्यपाल पर ‘खुल्लम-खुल्ला पक्ष लेने’ और ‘‘अनावश्यक राजनीति में दखलअंदाजी’’ करने का आरोप लगाया था.

मलिक ने रियासी जिले के कटरा टाउनशिप में शनिवार को एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘क्या राजभवन हर समय गोल्फ खेलने के लिये है. राजभवन राष्ट्रपति का प्रतिनिधि है और नयी दिल्ली में राष्ट्रपति की सरकार है—मैं उस सरकार का प्रतिनिधि हूं और मैंने उसके विचार रखे हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप (केंद्र) सरकार को रोजाना गाली देते हैं तो किसी को जवाब देना है. मैं सिर्फ वही कर रहा हूं. मैं न सिर्फ राज्यपाल बल्कि मुख्यमंत्री भी हूं.’’ गत पांच फरवरी को मुफ्ती ने मांग की थी कि राज्यपाल और सेना प्रमुख मेजर शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई करें. उन्होंने बल के शादीमर्ग शिविर में पुलवामा निवासी तौसीफ वानी को कथित तौर पर यातना दी थी और मुठभेड़ में मार डालने की धमकी दी थी.

मलिक ने अगले दिन कहा था कि वह ऐसे बयानों से सुरक्षा बलों का मनोबल गिरने नहीं देंगे. उन्होंने आरोप लगाया था कि पीडीपी प्रमुख के बयान का उद्देश्य आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले जन समर्थन हासिल करना है.

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