देशव्यापार

देश को मोदी सरकार के नोटबंदी के ‘तुगलकी फरमान’ को न भूलने देंगे, न ही माफ करने देंगे: सोनिया

नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के तीन साल पहले आज ही के दिन लिये गये नोटबंदी के फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बताया और कहा कि इससे कई लोगों की आजीविका छिन गई. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि देश मोदी सरकार के इस फैसले को न तो कभी भूले और न ही इसके लिए उसे कभी माफ करे.

गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने इस गलत फैसले की कभी जिम्मेदारी नहीं ली जिसने 120 से अधिक लोगों की जान ले ली और यह भारत के मध्यम और छोटे व्यापार को तबाह करने वाला साबित हुआ. गांधी ने एक बयान में कहा, ‘‘मोदी सरकार इस ऊटपटांग और बिना सोचे समझे उठाये गए कदम की जिम्मेदारी से बचने का चाहे जितना भी प्रयास कर ले, देश की जनता यह सुनिश्चित करेंगी कि इसके लिये उसे जवाबदेह ठहराया जाये.’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने 2017 के बाद नोटबंदी के बारे में बोलना बंद कर दिया है और वह उम्मीद कर रहे हैं कि देश इसे भूल जाएगा. यह उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि न तो देश और न ही इतिहास इसे भूले या माफ करे. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा के उलट हम ‘राष्ट्र हित’ में कार्य करते हैं.’’

उन्होंने कहा कि नोटबंदी संभवत: भाजपा के बिना सोचे समझे शासन मॉडल का सबसे सटीक प्रतीक है. यह निरर्थक उपाय था जिसको लेकर दुष्प्रचार किया गया और इसने बेगुनाह देशवासियों को भारी नुकसान पहुंचाया.

गांधी ने कहा, ‘‘स्वयं जिम्मेदारी लेने के बारे में खोखली बयानबाजी के बावजूद प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने कभी भी इस गलत कदम की न तो जिम्मेदारी ली और न ही इसे स्वीकार किया. इस गलत फैसले ने 120 से अधिक लोगों की जान ले ली (एक मोटे अनुमान के अनुसार) और भारत के मध्यम एवं छोटे व्यापार को तबाह कर दिया, भारत के किसानों की आजीविका छीन ली और लाखों परिवारों को गरीबी के करीब ला दिया.’’

गांधी ने याद किया कि आठ नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने एक व्यापक प्रभाव वाले कदम के तहत 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिये थे और देश से कालाधन, जाली नोट समाप्त करने और आतंकवाद एवं नक्सलवाद से छुटकारा दिलाने का वादा किया था.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने उच्चतम न्यायालय से भी कहा था कि 3,00,000 करोड रुपये के कालाधन से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि यह फिर से चलन में नहीं आयेगा. उसके बाद प्रधानमंत्री ने नकदी का इस्तेमाल कम करने और इसके स्थान पर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का उद्देश्य भी जनता के सामने रखा था.

उन्होंने कहा, ‘‘तीन वर्ष बाद प्रधानमंत्री मोदी इन मोर्चों पर असफल रहे हैं.’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आरबीआई ने इसकी पुष्टि की है कि 500 रुपये और 1000 रुपये के जो नोट चलन से बाहर हुए थे उनमें से 99.3 प्रतिशत नोट वापस बैंकों में पहुंच चुके हैं और कोई फायदा नहीं हुआ. ‘‘नकली नोटों की बात कोरी साबित हुई और ऐसे बहुत मामूली प्रतिशत नोट ही चलन में थे (यह जानकारी भी रिजर्व बैंक ने ही दी).’’

गांधी ने कहा कि सरकार के अपने प्रकाशित आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद आतंकवादी और नक्सली गतिविधियों में वास्तव में बढ़ोतरी हुई है तथा प्रचलन में जारी नोटों की संख्या नोटबंदी के पहले के मुकाबले 22 प्रतिशत तक बढ़ गई. उन्होंने कहा, ‘‘हर भारतीय की ओर से आज यही सवाल पूछा जा रहा है… कि आखिर नोटबंदी से क्या हासिल हुआ?’’

उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में इससे यह हुआ कि अर्थव्यवस्था से एक करोड़ से अधिक नौकरियां समाप्त हो गईं (और यह अभी भी जारी है), बेरोजगारी की दर 45 वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जीडीपी की वृद्धि दर में स्पष्ट तौर पर दो प्रतिशत की कमी आयी और भारत की अंतरराष्ट्रीय रिण साख ‘स्थिर’ से ‘नकरात्मक’ हो चुकी है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों की नजर में यह एक बड़ी भूल है और इसने पूरी दुनिया को सिखाया है कि सरकारों को क्या नहीं करना चाहिए.

नोटबंदी को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला, राहुल ने ‘आतंकी हमला’ करार दिया
नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर कांग्रेस ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर कई ओर से निशाना साधा और पार्टी नेता राहुल गांधी ने 2016 में उठाये गये सरकार के इस कदम को ‘‘आतंकी हमला’’ करार दिया. विपक्षी पार्टी ने 500 और 1000 रुपये के, उस समय प्रचलित नोटों को बंद करने के सरकार के फैसले की तुलना 1330 में मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा मुद्रा को प्रचलन से बाहर करने के फैसले से की. कांग्रेस ने इस मौके पर सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1,000 रुपये के नोटों के प्रचलन से बाहर किए जाने की घोषणा की थी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘नोटबंदी आतंकी हमले को तीन साल गुजर गए हैं जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया, कई लोगों की जान ले ली, लाखों छोटे कारोबार खत्म कर दिए और लाखों भारतीयों को बेरोजगार कर दिया.’’

उन्होंने हैशटैग ‘डीमोनेटाइजेशन डिजास्टर’ का उपयोग करते हुए कहा कि इस ‘‘खतरनाक हमले’’ के लिए जिम्मेदार लोगों को अब तक सजा नहीं मिली है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी एक ‘आपदा’ साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘नोटबंदी को तीन साल हो गए. सरकार और इसके नीम-हकÞीमों द्वारा किए गए, ‘नोटबंदी सारी बीमारियों का र्शितया इलाज’ के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए. नोटबंदी एक आपदा साबित हुई जिसने हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी.’’ कांग्रेस महासचिव ने हैशटैग ‘‘डीमोनेटाइजेशन डिजÞास्टर’’ का उपयोग करते हुए सवाल पूछा है ‘‘ इस ‘तुगÞलकी’ कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा?’’ कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और उन्हें ‘‘आज का तुगलक’’ कहा.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने 1330 में देश की मुद्रा को अमान्य करार दिया था. आज के तुगलक ने भी आठ नवंबर, 2016 को यही किया था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘तीन साल गुजर गए और देश भुगत रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी है, रोजगार छिन गया है. न ही आतंकवाद रुका और न ही जाली नोटों का कारोबार थमा है.’’ सुरजेवाला ने पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने भी नोटबंदी को लेकर सवाल उठाये.

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