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ममता सरकार बंगाल में एक करोड़ रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को बचा रही : दिलीप घोष

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राज्य में एक करोड़ से अधिक रोंिहग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों को बचाने का आरोप लगाया. यहां पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने दोहराया कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करेगी और घुसपैठियों को बाहर निकाल फेंकेगी.

इससे पहले ममता ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य में एनआसी की प्रक्रिया को मंजूरी नहीं देगी. उन्होंने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाते हुए चुनौती दी कि ‘‘वह एनआरसी लागू करने के बहाने एक भी नागरिक को छू कर दिखाए.’’

इस चुनौती को स्वीकार करते हुए घोष ने कहा कि ‘‘ममता जल्द देखेंगी कि कैसे भाजपा बंगाल में एनआरसी लागू करती है’’ और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाल फेंकती है जो अब तृणमूल कांग्रेस का भरोसेमंद वोटबैंक बन चुके हैं.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ पिछले कुछ सालों में करीब दो करोड़ रोंिहग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों ने राज्य में अवैध रूप से प्रवेश किया. इनमें से एक करोड़ लोग देश के दूसरे राज्यों में चले गए और बचे एक करोड़ लोग बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार के संरक्षण में रह रहे हैं.

घोष ने कहा, ‘‘उन्हें बंगाल से बाहर निकाल फेंका जाएगा और भाजपा यह करेगी. आज नहीं तो कल बंगाल में एनआरसी को लागू किया जाएगा और ममता बनर्जी इसकी गवाह होंगी.’’

उल्लेखनीय है कि एनआरसी भारतीय नागरिकता का सबूत है और असम में हाल में इसे अद्यतन किया गया है. पड़ोसी राज्य असम में रह रहे 3.29 करोड़ लोगों में से 19 लाख लोगों को 31 अगस्त को प्रकाशित अंतिम एनआरसी में जगह नहीं मिली है.

ममता ने भाजपा को चेताया, एनआरसी के नाम पर आग से नहीं खेले
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा को बृहस्पतिवार को चेतावनी दी कि वह एनआरसी के नाम पर आग से नहीं खेले. साथ ही उन्होंने कहा कि वह राज्य में एनआरसी संबंधी प्रक्रिया को कभी इजाजत नहीं देंगी. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के नाम पर पश्चिम बंगाल के एक भी नागरिक को छू कर दिखाने की चुनौती दी.

एनआरसी के विरोध में यहां निकाली गई रैली में उन्होंने कहा, ‘‘हम बंगाल में एनआरसी को कभी इजाजत नहीं देंगे. हम उन्हें धार्मिक एवं जातिगत आधार पर लोगों को बांटने की इजाजत नहीं देंगे. हम असम में एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर असम के लोगों को चुप कराया है लेकिन वे बंगाल को चुप नहीं करा सकते.’’

एनआरसी पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच विवाद का नया विषय बन गया है जहां सत्तारूढ़ पार्टी इसका विरोध कर रही है वहीं, भगवा पार्टी घुसपैठियों को बाहर करने के लिए इसे लागू करने की वकालत कर रही है.

एनआरसी के मुखर आलोचकों में से एक बनर्जी ने कहा, ‘‘असम में एनआरसी की अंतिम सूची से करीब 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया है जिनमें ंिहदू, मुस्लिम और बौद्ध भी शामिल हैं. आजादी के 70 सालों के बाद भी आपको पहचान का और क्या सबूत चाहिए? हमें उन्हें अपनी पहचान का प्रमाण देने की क्या जरूरत है?’’

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि उनकी पार्टी केंद्र में सत्ता में आने के बाद घुसपैठियों को बाहर करने के लिए पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी प्रक्रिया को दोहराएगी लेकिन ंिहदू शरणार्थियों को हाथ नहीं लगाया जाएगा. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने हाल में कहा था कि अगर राज्य में एनआरसी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाए तो करीब दो करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान हो जाएगी.

बनर्जी ने रैली में कहा, ‘‘भाजपा कह रही है कि वह दो करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर कर देगी. मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वे दो लोगों को भी छू कर दिखाए. अगर वे आग से खेलेंगे तो उन्हें करारा जवाब दिया जाएगा. हम दशकों से सौहार्दपूर्ण तरीके से रह रहे हैं. भाजपा हमें बांट नहीं सकती.’’ उन्होंने असम में एनआरसी के खिलाफ उत्तरी कोलकाता के ंिसथी से श्यामबाजार तक निकाली गई रैली की अगुवाई की.

इस रैली के आयोजन से कुछ ही दिन पहले टीएमसी ने कांग्रेस और वाम मोर्चे के साथ मिलकर एनआरसी का विरोध करने के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था. पार्टी ने एनआरसी को अद्यतन किए जाने के खिलाफ राज्य के अन्य हिस्सों में सात और आठ सितंबर को रैलियां निकाली थी.

असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का प्रकाशन 31 अगस्त को हुआ. कुल 3.29 करोड़ से ज्यादा आवेदकों में 19 लाख से ज्यादा लोग इस सूची से बाहर रह गए. बनर्जी ने देश में अर्थव्यवस्था की स्थिति पर कहा कि पिछले कई सालों में जीडीपी वृद्धि अपने निचले स्तर पर है और अर्थव्यवस्था पड़ोसी राष्ट्रों के मुकाबले कमजोर होती जा रही है. टीएमसी सुप्रीमो ने भाजपा नीत केंद्र सरकार द्वारा बैंकों के विलय पर लिए गए फैसले की भी आलोचना की है.

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