कोविड के साये में देश में नवरात्रि उत्सव शुरू, मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुले

नयी दिल्ली/मुंबई. सरकार द्वारा निर्धारित कोविड-19 सुरक्षा नियमों के साथ बृहस्पतिवार को नौ दिवसीय नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हुई तथा कोरोना वायरस के चलते लंबे अंतराल के बाद देश के कुछ हिस्सों में मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोले गये.

राष्ट्रीय राजधानी में मंदिरों के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने परिसर की स्वच्छता और आगंतुकों के बीच सामाजिक दूरी रखने के लिए समुचित उपाय किये हैं. कालकाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेंद्र नाथ ने कहा, ‘‘हमारे मंदिर में नवरात्र के दौरान लाखों लोग आते हैं इसलिए हम सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए एक बार में दो हजार आगंतुकों को आने की अनुमति देंगे. श्रद्धालुओं को मंदिर के मुख्य परिसर के बाहर से ‘दर्शन’ करने की अनुमति होगी. प्रवेश और निकासी के ंिबदु लिखे हुए हैं और आगंतुकों के उम्मीद की जाती है कि वे मंदिर के अंदर इसका पालन करेंगे.’’

दिल्ली सरकार ने पिछले सप्ताह शहर में धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दी थी. बिरला मंदिर में भी कड़े कोविड नियमों के तहत दर्शन पूजन हो रहा है. बिरला मंदिर के मीडिया प्रभारी राम गोपाल शुक्ला ने कहा, ‘‘हमने पुलिस से बात की है और सरकार के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है. प्रवेश द्वार पर स्वच्छता की सुविधा उपलब्ध है और किसी को मास्क के बिना प्रवेश नहीं दिया जाएगा.

महाराष्ट्र में कोविड-19 महामारी के कारण लगभग छह महीने तक बंद रहने के बाद बृहस्पतिवार को धार्मिक स्थल खुले तथा मुंबई और अन्य स्थानों पर मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं को देखा गया. नवरात्रि के पहले दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे और दोनों बेटे आदित्य और तेजस सुबह आठ बजकर 45 मिनट पर मुंबा देवी के मंदिर गए और देवी के दर्शन किये.

मुंबई में सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु मास्क लगाए और दो गज की दूरी का पालन करते हुए दिखे. मुंबई में मंदिर ऐसे समय खुले है जब एक दिन पहले ही शहर में 14 जुलाई के बाद से कोविड-19 के सर्वाधिक (629) मामले सामने आये. मुंबई के बाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी मंदिर बृहस्पतिवार को खुले.

ठाणे शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में कोपिनेश्वर मंदिर और अंबरनाथ में भगवान शिव के मंदिर को तड़के खोला गया. मंदिर प्रबंधनों ने आंगुतकों के लिए सेनेटाइजर का इंतजाम कर रखा था और उनके बीच दूरी सुनिश्चित किया.

निकटवर्ती जिले पालघर के दहानू में महालक्ष्मी मंदिर और वसाई में वज्रेश्वरी मंदिर संगीत कार्यक्रम के साथ खोले गये. फूल बेचने वालों और अन्य विक्रेताओं ने धार्मिक स्थलों के फिर से खुलने पर प्रसन्नता व्यक्त की. ठाणे में एक मंदिर के बाहर फूल माला बेचने वाली सपना माली ने कहा, ‘‘मंदिर खुल गए तो अच्छा लग रहा है नहीं तो जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा था.’’

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंडल के एक न्यासी महेश सूर्यवंशी ने कहा, ‘‘भगवान गणेश के दर्शन के लिए सुबह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आ रहे हैं. हम लोगों को गर्भगृह में प्रवेश देते समय कोविड-19 नियमों का पालन कराने के लिए सभी एहतियात बरत रहे हैं.’’

इस बीच , स्वास्थ्य मंत्राालय ने त्योहार एवं शादी सीजन में कोविड-19 के फिर सिर उठा लेने के खतरे पर जोर देते हुए लोगों से इस त्योहारी सीजन में अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, ‘‘ कृपया अपने अक्टूबर, नवबंर और दिसंबर का ध्यान रखिए.’’ उन्होंने लोगों से भीड़भाड़ एवं अनावश्यक यात्रा से बचने , घर में ही रहने , डिजिटल तरीके से त्योहार मनाने एवं आॅनलाइन खरीददारी करने की सलाह दी.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने सप्ताहांत पर मंदिर खोलने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को राज्य भर में विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुक ने आश्वासन दिया कि महामारी का खतरा कम होने पर मुख्यमंत्री एम के स्टालिन सप्ताहभर मंदिरों को खोलने के वास्ते कम उठाएंगे.

त्यौहारी मौसम में कोविड महामारी को फैलने से रोकने के लिए राज्य में फिलहाल मंदिर दर्शन के लिए सप्ताह के चार दिन खुले हैं और तीन दिन बंद हैं. राज्य के ंिहदू धार्मिक एवं परमार्थ अनुदान मंत्री पी के शेखर बाबू ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘केंद्र सरकार के परामर्श पर यह निर्णय लिया गया है. श्रद्धालुओं को शुक्रवार, शनिवार और रविवार को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है. हालांकि, इन दिनों पुजारी नियमित पूजा-अर्चना कर रहे हैं.’’

वह सप्ताहांत को मंदिर खोलने की भाजपा की मांग के बारे में पूछे गये एक सवाल का जवाब दे रहे थे. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा, ‘‘नवरात्रि का उत्सव आज से शुरू हो गया लेकिन राज्य सरकार ने वायरस जनित महामारी के फैलने का बहाना बनाकर शुक्रवार से रविवार तक मंदिरों को बंद रखने का निर्णय लिया है. इस तर्क का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि प्रतिबंधों पर केंद्र सरकार का परिपत्र केवल एक परामर्श है.’’

कर्नाटक में दस दिवसीय उत्सव कोविड-19 के साये में शुरू हुआ. मैसुरू में ‘नड्डा हब्बा’ के तौर पर मनाये जाने वाला उत्सव पूर्व मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा और मुख्यमंत्री बी बसावराज बोम्मई एवं अन्य गणमान्य लोगों द्वारा चामुंडी हिल पर देवी चामुंडेश्वर की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ उत्सव शुरू हुआ.

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