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छत्तीसगढ़ से पूछेगा एनसीएसटी, क्या शरणार्थियों को बसाने से बदल गई है आदिवासी इलाकों की जनसांख्यिकी

नयी दिल्ली. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) छत्तीसगढ़ सरकार से यह जांच करने को कहेगा कि क्या बांग्लादेशी शरणार्थियों के पुनर्वास से जनजातीय इलाकों की जनसांख्यिकी में कोई परिवर्तन आया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. आयोग के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि वह छत्तीसगढ़ सरकार से उन शिकायतों की जांच करने को भी कहेगा जिनमें कहा जा रहा है कि शरणार्थियों के कारण बस्तर क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासी अपनी जमीन से ‘‘विस्थापित’’ हो रहे हैं और ये शरणार्थी उन पर ‘‘अत्याचार’’ करते हैं.

अधिकारी ने बताया कि राज्य में पिछले महीने हुए आयोग के दौरे के दौरान आदिवासियों के कई प्रतिनिधियों ने इन मुद्दों को उठाया था. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने 1958 में शुरू हुए दंडकारण्य परियोजना के तहत पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत आए असंख्य बंगाली शरणार्थियों को विभाजन के बाद ओडिशा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर में बसाया था. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद और शरणार्थी यहां आ गए.’’ छत्तीसगढ़ में बंगाली शरणार्थियों को बस्तर क्षेत्र खास कर कांकेर जिले में बसाया गया था.

अधिकारी ने कहा, ‘‘छत्तीसगढ़ के हमारे दौरे के समय, आदिवासियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि बीते वर्षों में शरणार्थियों के प्रवाह के चलते जनजातीय इलाकों की जनसांख्यिकी में बदलाव हुए हैं.’’ उन्होंने कहा कि आयोग को शरणार्थियों द्वारा, ‘‘आदिवासियों को उनकी जमीन से विस्थापित करने और उन पर अत्याचार किए जाने’’ की भी शिकायतें मिली हैं.

आयोग के प्रमुख नंद कुमार साई ने कहा, ‘‘यह मामला बस्तर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. हमने छत्तीसगढ़ सरकार को बताया है कि यह गंभीर मुद्दा है और एक विस्तृत जांच की जरूरत है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जनजातीय इलाके संविधान के मुताबिक विशेष इलाके होते हैं और जनसांख्यिकी में बदलाव देशी लोगों के अधिकारों के लिए गंभीर खतरा है.’’ आयोग राज्य सरकार से राज्य में शुरुआत में बसाए गए बांग्लादेशी शरणार्थियों की संख्या और उनकी मौजूदा आबादी बताने को कहेगा.

अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य सरकार से यह पता करने को कहा जाएगा कि क्या शरणार्थियों की संख्या आदिवासी जनसंख्या से ज्यादा है और बांग्लादेशी शरणार्थियों द्वारा आदिवासियों को उनकी जमीन से हटाने के कितने मामले सामने आए हैं.’’ एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आयोग ने छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके को इस मुद्दे से अवगत करा दिया है.

छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति विभाग के सचिव डी डी ंिसह ने संपर्क करने पर कहा, ‘‘आयोग ने उनके दौरे के वक्त सामने आए कुछ मुद्दों के बारे में सूचित किया है और कहा कि वे रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. हम एनसीएसटी से औपचारिक पत्र मिलने का इंतजार कर रहे हैं.’’

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