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दविंदर सिंह को वीरता पदक से पुरस्कृत करने की खबर सही नहीं है : जम्मू कश्मीर पुलिस

श्रीनगर/जम्मू. जम्मू कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को कहा कि ऐसी खबरें सही नहीं हैं कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों के साथ गिरफ्तार किए गए निलंबित पुलिस अधिकारी दंिवदर ंिसह को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वीरता पदक से नवाजा गया था. पुलिस ने कहा कि उन्हीं के नाम के एक अन्य अधिकारी को पदक मिला था.

पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) ंिसह को कुलगाम जिले के मीर बाजार में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था. उस वक्त वह एक कार में दो आतंकियों नवीद बाबा और अल्ताफ को ले जा रहे थे. कुछ मीडिया खबरों में दावा किया गया था कि ंिसह को विशिष्ट सेवा के लिए पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर पुलिस पदक से पुरस्कृत किया गया था.

जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि डीएसपी दंिवदर ंिसह को गृह मंत्रालय से कोई बहादुरी पदक नहीं दिया गया था, जैसा कि कुछ मीडिया संस्थानों और लोगों ने खबरें दी हैं. उन्हें केवल 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व जम्मू कश्मीर राज्य द्वारा उनकी सेवा के लिए बहादुरी पदक दिया गया था.’’ ंिसह हाइजैक रोधी दस्ते में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात थे. पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारियों की एक टीम उनसे पूछताछ कर रही है. श्रीनगर हवाई अड्डे पर उनके कार्यालय को भी सील कर दिया गया है.

गिरफ्तार पुलिस अधिकारी था ‘भेड़ की खाल में भेड़िया’ : उपराज्यपाल के सलाहकार
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल जी सी मुर्मू के सलाहकार फारूक खान ने हिज्बुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी दंिवदर ंिसह को ‘भेड़ की खाल में भेड़िया’ करार दिया. उन्होंने कहा कि ंिसह की पहचान करने और उन्हें पकड़ने का श्रेय पुलिस को जाता है जिसका आतंकवाद के खिलाफ हजारों बलिदान का इतिहास रहा है.

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ अभियान केंद्रशासित प्रदेश से इस समस्या का सफाया होने तक जारी रहेगा. पुलिस ने ंिसह को हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी नवीद बाबा और अलताफ के साथ गिरफ्तार किया गया था. आतंकी संगठन के लिए काम करने वाले एक अज्ञात वकील को भी पकड़ा गया. यहां एक कार्यक्रम के इतर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि किसी भी संगठन में नाम खराब करने वाले लोग होते हैं. उसकी पहचान करने और साजिश को उजागर करने का श्रेय पुलिस को जाता है.

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी खान ने नब्बे के दशक में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. उन्होंने मामले में चल रही जांच का ब्यौरा देने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि मामले के सभी पहलुओं को खंगाला जाएगा. उन्होंने कहा कि मामले में छानबीन जारी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

गिरफ्तारी पर राजनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने कहा , ‘‘मैं उन पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा लेकिन ऐसी घटनाएं जिसका सीधा असर सुरक्षा पर पड़ता है, इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.’’ ंिसह की गिरफ्तारी से पुलिस बल की छवि पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे गए सवाल पर खान ने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें गिरफ्तार किया वो भी पुलिसकर्मी ही थे.

उन्होंने कहा कि ंिसह की गिरफ्तारी से पुलिस की छवि पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पुलिस बल में कई लोगों ने शहादत दी है. हजारों लोगों ने प्राण न्यौछावर की है, इसलिए ‘भेड़ की खाल में भेड़िया’ या एक ‘गंदी मछली’ से पुलिस बल की छवि खराब नहीं हो जाती.

निलंबित डीएसपी पिछले वर्ष आतंकवादियों को जम्मू ले गया था
जम्मू-कश्मीर पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक दंिवदर ंिसह हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी नावीद बाबू को पिछले वर्ष जम्मू ले गया था और उसके ‘‘आराम तथा स्वास्थ्य लाभ’’ के बाद शोपियां लौटने में भी उसकी मदद की थी. उससे पूछताछ करने वाले अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. पूछताछ करने वाले एक अधिकारी ने ंिसह के हवाले से बताया, ‘‘मेरी मति मारी गई थी.’’ एक बड़े आतंकवादी को पकड़ने की कहानी के माध्यम से जब वह जांचकर्ताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया तब उसने यह बात कही.

ंिसह को शनिवार को नावीद बाबू उर्फ बाबर आजम और उसके सहयोगी आसिफ अहमद के साथ पकड़ा गया था. आजम दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के नाजनीनपुरा का रहने वाला है. अधिकारियों ने बताया कि उपाधीक्षक ने दोनों को चंडीगढ़ में कुछ महीने तक आवास मुहैया कराने के लिए कथित तौर पर 12 लाख रुपये लिए थे.

अधिकारियों ने कहा कि उसके बयानों में काफी अनियमितताएं हैं और हर चीज की जांच की जा रही है और पकड़े गए आतंकवादियों के बयान से उसका मिलान किया जा रहा है. उनको दक्षिण कश्मीर के पूछताछ केंद्र में अलग-अलग कमरों में रखा गया है. अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि ंिसह उन्हें 2019 में जम्मू लेकर गया था.

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि डीएसपी आतंकवादियों को ‘‘आराम कराने और स्वास्थ्य लाभ’’ के लिए ले जाता था. उन्होंने कहा कि नावीद ने पूछताछ करने वालों को बताया कि वे पहाड़ी इलाकों में रहते थे ताकि जम्मू-कश्मीर पुलिस से बच सकें और कड़ाके की ठंड से बचने के लिए वहां से हट जाते थे. अधिकारी ने कहा कि डीएसपी के बैंक खाते एवं अन्य संपत्तियों का आकलन पुलिस कर रही है और कागजात जुटाए जा रहे हैं. इस तरह के कयास हैं कि मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जा सकता है.

ंिसह के सेवा इतिहास के बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस के कई सेवारत एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों ने कहा कि अगर प्रोबेशन काल में ही अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो ऐसी बात नहीं होती. 1990 में उपनिरीक्षक के तौर पर भर्ती हुए ंिसह एवं एक अन्य प्रोबेशनरी अधिकारी पर अंदरूनी जांच हुई थी जिसमें एक ट्रक से मादक पदार्थ जब्त किए गए थे. अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित पदार्थ को ंिसह और एक अन्य उपनिरीक्षक ने बेच दिया था.

उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का कदम उठाया गया था लेकिर महानिरीक्षक स्तर के एक अधिकारी ने मानवीय आधार पर उसे रोक दिया था और दोनों को विशेष अभियान समूह में भेज दिया गया था.

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