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जेएनयू विरोध प्रदर्शन ‘राजनीति से प्रेरित’, शुल्क वृद्धि का मुद्दा बहाना है: गिरिराज

नयी दिल्ली. केन्द्रीय मंत्री गिरिराज ंिसह ने मंगलवार को कहा कि छात्रावास शुल्क वृद्धि को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों का विरोध प्रदर्शन ‘‘राजनीति से प्रेरित’’है. उन्होंने कहा कि यह उन लोगों की मोदी सरकार के कड़े कदमों पर प्रतिक्रिया है जो संस्थान को ‘‘शहरी नक्सलवाद’’ का केंद्र बनाना चाहते थे.

ंिसह ने पत्रकारों से कहा कि शुल्क वृद्धि का मुद्दा महज एक बहाना है क्योंकि जेएनयू प्रशासन द्वारा लिये जाने वाले शुल्क की तुलना दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य केंद्रीय संस्थानों से की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘हमने पहले भी देखा है कि ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ ने भारत के खिलाफ नारे लगाये थे और संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनायी थी.’’

ंिसह ने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने इन गतिविधियों पर रोक लगाई है. अब हम जो विरोध प्रदर्शन देख रहे हैं, वह राजनीति से प्रेरित है और शुल्क वृद्धि का मुद्दा महज एक बहाना है.’’ उन्होंने कहा कि आंदोलन के पीछे छात्रों का एक समूह है क्योंकि अब उनकी मनमानी पर रोक लग गयी है. ंिसह ने जेएनयू परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के विरूपण पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि इससे प्रदर्शनकारियों की असल मंशा का पता चलता है.

गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा हटाने के मुद्दे पर कांग्रेस, द्रमुक और राकांपा का सदन से वाकआउट
संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा की बैठक हंगामे के साथ शुरू हुई और कांग्रेस नेताओं सोनिया, राहुल गांधी से एसपीजी की सुरक्षा वापस लिये जाने के मुद्दे पर कांग्रेस, द्रमुक के सदस्यों ने पूरे प्रश्नकाल में आसन के समीप नारेबाजी की. शून्यकाल में इन दलों ने इस विषय पर सदन से वाकआउट किया.
शून्यकाल में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने जब इस विषय को उठाने का प्रयास किया तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कांग्रेस सदस्य पहले ही इस विषय को नियम-प्रक्रिया के तहत उठा चुके हैं.

चौधरी ने कहा कि गांधी परिवार के सदस्यों की जान खतरे में है. सोनिया गांधी और राहुल गांधी साधारण सुरक्षा प्राप्त करने वाले लोग नहीं हैं और 1991 से एसपीजी की सुरक्षा प्राप्त कर रहे थे. उन्होंने प्रश्न किया कि अचानक से एसपीजी सुरक्षा क्यों हटा ली गयी. लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि चौधरी इस विषय को पहले ही उठा चुके हैं. स्पीकर ने उन्हें आगे बोलने की इजाजत नहीं दी.

संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस सदस्य के इस विषय पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के नोटिस को स्पीकर खारिज कर चुके हैं. यह अब शून्यकाल का विषय नहीं है और इसे बिना नोटिस के कांग्रेस सदस्य कैसे उठा सकते हैं. इस पर कांग्रेस के सभी सदस्य खड़े होकर विरोध दर्ज कराने लगे. चौधरी को इस विषय पर आगे बोलने की अनुमति नहीं दिये जाने पर कांग्रेस और राकांपा के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया.

इसके बाद द्रमुक के टी आर बालू ने भी इस विषय को उठाने का प्रयास किया. लेकिन उन्हें भी बोलने की अनुमति नहीं दी गयी. जिसके बाद द्रमुक सदस्यों ने भी सदन से वाकआउट किया. इससे पहले मंगलवार सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने आसन के पास आकर नारेबाजी शुरू कर दी. द्रमुक सदस्य भी गांधी परिवार के सदस्यों की एसपीजी सुरक्षा हटाये जाने के विरोध में आसन के समीप पहुंच कर नारेबाजी करने लगे.

कांग्रेस और द्रमुक के सदस्यों ने ‘बदले की राजनीति बंद करो’, ‘एसपीजी के साथ राजनीति करना बंद करो’ और ‘वी वांट जस्टिस’ जैसे नारे लगाए. गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी. अब उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है.

हंगामे के बीच ही लोकसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल चलाया और किसानों से संबंधित विषय पर सदस्यों ने कृषि मंत्री से प्रश्न पूछे. बिरला ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से अपने स्थान पर जाने की अपील करते हुए कहा कि किसानों के विषय पर चर्चा हो रही है और ऐसे में सदन में हंगामा अच्छी परंपरा नहीं है. हालांकि विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे.

इस दौरान अध्यक्ष बिरला ने आसन के समीप नारेबाजी कर रहे सदस्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि आसन के पास आकर आसन से बातचीत करने की परंपरा पहले रही होगी, लेकिन आगे से सदस्य आसन के पास आकर आसन से चर्चा नहीं करें, अन्यथा उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी होगी. हालांकि बाद में भी कांग्रेस के कुछ सदस्यों को आसन की ओर मुखातिब होकर कुछ कहते हुए देखा गया. बाद में शून्यकाल शुरू होने पर ही नारेबाजी कर रहे सदस्य अपने स्थानों पर गये.

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