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अयोध्या फैसला: ‘‘तथ्यों पर विश्वास’’ की जीत, मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन को खारिज करने की सलाह

हैदराबाद/नयी दिल्ली/इस्लामाबाद. एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायलय के फैसले को ‘‘तथ्यों पर विश्वास की जीत’’ करार देते हुए मस्जिद बनाने के लिए विकल्प के तौर पर पांच एकड़ जमीन दिये जाने को खारिज करने की सलाह दी है. उच्चतम न्यायालय के फैसले से असंतुष्ट ओवैसी ने संवाददाताओं से बातचीत में पूर्व प्रधान न्यायाधीश जे एस वर्मा के बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय वस्तुत: सर्वोच्च है….और अंतिम हैं, लेकिन उनसे भी गलती हो सकती है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह तथ्यों के ऊपर विश्वास की जीत वाला फैसला है.’’ उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि केंद्र मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए विकल्प के तौर पर पांच एकड़ जमीन मुहैया कराये . इस पर ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष कानूनी अधिकार के लिए लड़ रहा था और किसी से भी दान की जरूरत नहीं है .

उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है कि मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन के दिये जाने के प्रस्ताव को खारिज कर देना चाहिए. ओवैसी ने कहा, ‘‘हमें किसी से दान (में भूमि लेने) की जरूरत नहीं है….हमें सहायता देने की आवश्यकता नहीं है. आज भी, अगर मैं हैदराबाद की सड़कों पर मांगना शुरू कर दूं तो आवाम इतना पैसा दे देगी कि मैं उत्तर प्रदेश में पांच एकड़ भूमि खरीद सकता हूं .’’

मस्जिद निर्माण में किसी प्रकार का समझौता नहीं किये जाने पर जोर देते हुए ओवैसी ने कहा कि वह अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय के साथ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि संध परिवार और भाजपा देश को ‘‘ंिहदू राष्ट्र’’ की ओर ले जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिरायी थी, उन लोगों को न्यास का गठन करने और राम मंदिर निर्माण शुरू कराने के लिए कहा गया है.

ओवैसी ने कहा, ‘‘अब संघ परिवार और भाजपा अयोध्या से शुरू करेंगे और राष्ट्रीय नागरिक पंजी, नागरिक संशोधन विधेयक…..भाजपा इसका इस्तेमाल करेगी.’’ उन्होंने सवाल किया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से क्या होगा, कि 1992 में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया गया था और 1949 में मूर्तियां नहीं रखी गयी थी. उन्होंने दावा किया कि विवादित ढ़ांचा संघ परिवार एवं कांग्रेस की साजिश की ‘‘भेंट’’ चढ़ गया. ओवैसी ने कहा कि उन्हें अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है कि वह इससे संतुष्ट नहीं हैं और यह अदालत की अवमानना नहीं हो सकती है.

अयोध्या पर फैसले का दिल्ली के मुस्लिमों ने किया स्वागत, कुछ बोले-अस्पताल या कॉलेज बनता तो अच्छा होता
राष्ट्रीय राजधानी में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग ने अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का शनिवार को स्वागत किया लेकिन कुछ ने कहा कि शीर्ष अदालत विवादित स्थल पर कोई अस्पताल या कॉलेज बनाने का आदेश दे सकती थी. पुरानी दिल्ली से यमुना पार के सीलमपुर इलाके के कई मुस्लिम निवासी फैसले को लेकर खुश हैं और उन्होंने लोगों से शांत रहने तथा शांति एवं भाईचारा बनाने की अपील की है.

न्यू सीलमपुर इलाके के निवासी मोहम्मद उस्मान ने कहा, ‘‘फैसला सही है लेकिन यह और बेहतर हो सकता था अगर अदालत वहां कोई अस्पताल या कॉलेज बनाने का आदेश देती.’’ 25 वर्षीय उस्मान ने कहा, ‘‘लेकिन हम खुश हैं कि उच्चतम न्यायालय ने विवाद हल कर दिया.’’ कपड़ों का कारोबार करने वाले ब्रह्मपुरी के 30 वर्षीय सनीबुल अली ने कहा, ‘‘हम भी इसका समर्थन करते हैं लेकिन यह बेहतर हो सकता था अगर अयोध्या में विवादित स्थल पर मस्जिद या मंदिर बनाने पर विचार करने के बजाय अदालत कोई अस्पताल या कॉलेज बनाने का आदेश देती.’’

हालांकि, सभी निवासी इस फैसले से खुश नहीं हैं और वह चाहते हैं कि सरकार अब लोगों को रोजगार मुहैया कराने पर ध्यान केंद्रित करे. जामा मस्जिद में मजदूरी करने वाले अशरफुद्दीन ने कहा, ‘‘अब मसला सुलझ गया है तो सरकार को रोजगार मुहैया कराने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी आजीविका कमाने के लिए रोजगार चाहते हैं. मैं असंतुष्ट हूं लेकिन खुश हूं कि कई वर्षों तक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाला यह मुद्दा सुलझ गया है.’’

जामा मस्जिद के समीप ऊनी कपड़ों की दुकान चलाने वाले फहीम ने कहा, ‘‘ंिहदू और मुस्लिम भाई-भाई हैं और वे बस शांति चाहते हैं.’’ सीलमपुर इलाके के निवासी मोहम्मद हसीबुल ने कहा, ‘‘हम फैसले का स्वागत करते हैं. हम लंबित विवाद पर फैसले का समर्थन करते हैं. इस मुद्दे को हल करने की जरूरत थी…देशभर में कोई ंिहसा नहीं होनी चाहिए.’’ जामा मस्जिद इलाके में पुलिसर्किमयों ने सड़कों पर मार्च किया और मोटरसाइकिल से गश्त दी.

जाफराबाद में रहने वाले 25 वर्षीय साकिब चौधरी ने कहा, ‘‘हमें नमाज पढ़ने के लिए कोई विशेष स्थान की जरूरत नहीं है. अल्लाह हर जगह है. हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं और इस संवेदनशील तथा लंबे समय से अटके मुद्दे को हल करने की जरूरत थी.’’

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अयोध्या फैसले के समय पर उठाए सवाल
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने करतारपुर गलियारा खोले जाने के दिन अयोध्या मामले में आए फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस तरह के खुशी के मौके पर दिखाए गई ‘‘असंवेदनशीलता’’ से ‘‘बेहद दुखी’’ हैं.

‘डॉन न्यूज टीवी’ ने कुरैशी के हवाले से कहा, ‘‘ क्या इसको थोड़े दिन टाला नहीं जा सकता था? मैं इस खुशी के मौके पर दिखाए गई ‘‘असंवेदनशीलता’’ से ‘‘बेहद दुखी’’ हूं.’’ करतारपुर गलियारे के बहुप्रतीक्षित उद्घाटन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ आपको इससे ध्यान भटकाने की बजाय इस खुशी के मौके का हिस्सा बनना चाहिए था. यह विवाद संवेदनशील था और उसे इस शुभ दिन का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए था.’’

यह गलियारा गुरदासपुर में बाबा नानक गुरुद्वारे को पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब से जोड़ता है. यहां गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे. गुरुद्वारा करतारपुर साहिब पाकिस्तान की रावी नदी के पास स्थित है और पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से करीब चार किलोमीटर दूर है. इस साल 12 नवंबर को गुरु नानक की 550वीं जयंती के जश्न के हिस्से के रूप में इसे खोला गया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि मुस्लिम ‘‘ भारत में पहले ही काफी दबाव में है और भारतीय अदालत का यह फैसला उन पर और दबाव बढ़ाएगा.’’ कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान फैसले को विस्तार से पढ़ने के बाद इस पर अपनी प्रतिक्रिया देगा. इस बीच, पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद हुसैन ने फैसले को ‘‘ शर्मनाक, बेहुदा, अवैध और अनैतिक’’ करार दिया.

सरकारी पाकिस्तानी रेडियो की एक खबर के अनुसार सूचना और प्रसारण मामलों में प्रधानमंत्री की विशेष सहायक फिरदौस एवान ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय शीर्ष अदालत ने बता दिया कि वह स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां करतारपुर गलियारा खोल पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकार सुनिश्चित कर रहा है वहीं दूसरी ओर भारत मुसलमानां सहित अल्पसंख्यकों पर जुल्म कर रहा है.


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