अयोध्यादेश

अयोध्या पर ”टकराव का माहौल” बनाने की कोशिश में पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत: नकवी

नयी दिल्ली/लखनऊ. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-ंिहद पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि अयोध्या मामले में पुर्निवचार याचिका की बात करने वाले लोग ”बिखराव और टकराव का माहौल” पैदा करने की कोशिश में हैं लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या का मुद्दा अब खत्म हो गया है और इसे अब उलझाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश की शीर्ष अदालत ने सर्वसम्मति के फैसले में इस मामले को हल कर दिया है. नकवी ने देश के इन दो प्रमुख मुस्लिम संगठनों पर उस वक्त निशाना साधा है जब इन दोनों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ अगले कुछ दिनों के भीतर पुर्निवचार याचिका दायर करने की घोषणा की है.

नकवी ने “पीटीआई-भाषा” को दिए साक्षात्कार में कहा कि मुस्लिम समाज के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा ”सिर्फ बाबरी नहीं, बराबरी (शिक्षा एवं सामाजिक सशक्तीकरण में) भी है.” पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ”कुछ अलग-थलग पड़ी आवाजें हैं जो पूरे समाज की नहीं हैं . सभी वर्गों की भावना यही है कि अदालत से मामला हल हो गया है और हम आगे बढ़ना चाहिए. हमें इसमें उलझना नहीं चाहिए.” नकवी ने सवाल किया, ” अगर वे (पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत) इतने ही गम्भीर थे तो फिर पहले ही अदालत के कहने पर समझौते के लिए सहमत क्यों नहीं हुए?”

उन्होंने कहा, ” ये लोग बिखराव और टकराव का माहौल बनाने की कोशिश में हैं, लेकिन कोई भी समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा.” उन्होंने कहा, ”आदर्श स्थिति यह होगी कि ऐसे दशकों पुराने मामले को उलझाने की कोशिश नहीं हो जिसका समाधान न्यायालय ने सर्वसम्मति के फैसले से कर दिया है.” मंत्री ने कहा, ”समाज के सभी वर्गों ने फैसले का सम्मान किया. लेकिन अगर कुछ लोगों को इस फैसले के बाद देश में दिखी एकता हजम नहीं हो रही है तो दुखद है.”

यह पूछे जाने पर कि पुर्निवचार याचिका अयोध्या मामले में नया अध्याय खोलने की कोशिश है तो नकवी ने कहा कि देश यह स्वीकार नहीं करेगा और लोगों के लिए यह मामला अब खत्म हो गया है. इस सवाल पर कि क्या मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ भूमि स्वीकार करनी चाहिए तो मंत्री ने कहा कि इस बारे में निर्णय सम्बंधित पक्षों को करना है और जहां तक अयोध्या की बात है तो वहां पहले से ही कई मस्जिदें हैं.

आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन : एआईएमआईएम : एआईएमआईएम : प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए नकवी ने कहा कि यह देश किसी की मर्जी से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है. उन्होंने यह भी कहा कि फैसले के बाद देश में जो शांति और एकजुटता दिखी उसके लिए वह जनता को सलाम करते हैं.

अयोध्­या मसले पर पुर्निवचार याचिका के हिमायती हैं मुल्­क के 99 फीसद मुस्लिम : रहमानी
देश में मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि बाबरी मस्जिद पर उच्­चतम न्­यायालय के फैसले के बाद न्­यायपालिका पर भरोसा ‘कमजोर’ हुआ है और 99 फीसद मुसलमान चाहते हैं कि इस निर्णय पर पुर्निवचार की याचिका दाखिल की जाए. बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने रविवार को ‘भाषा’ से बातचीत में कहा कि मुसलमानों को न्­यायपालिका पर भरोसा है, इसीलिये अयोध्­या मामले पर पुर्निवचार याचिका दाखिल की जा रही है, मगर बाबरी मस्जिद के फैसले के बाद वह भरोसा ‘कमजोर’ हुआ है.

उन्­होंने कहा ‘‘मुल्­क के 99 फीसद मुसलमान यह चाहते हैं कि उच्­चतम न्­यायालय के फैसले पर पुर्निवचार याचिका दाखिल की जाए. अगर यह समझा जा रहा है कि बहुत बड़ा तबका इस याचिका के विरोध में है, तो यह गलतफहमी है.’’ मौलाना रहमानी ने एक सवाल पर कहा ‘‘हमें शुबहा (आशंका) है कि हमारी पुर्निवचार याचिका ठुकरा दी जाएगी, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसे पेश भी न करें. यह हमारा कानूनी हक है. अदालत के फैसले की कई बातें एक-दूसरे को काटती हैं. कोई भी मुस्लिम या सुलझे हुए हिन्­दू भाई दिल पर हाथ रखकर सोचें तो समझ जाएंगे कि बाबरी मस्जिद का फैसला कितना दुरुस्­त है?’’

इस सवाल पर कि कई लोग कह रहे हैं कि मसले को यहीं खत्­म कर दिया जाए, मौलाना ने कहा कि ये वो लोग हैं जिन्­होंने मस्जिद के मुकदमे में अपना जहन नहीं लगाया, जिन्­हें मस्जिद से कोई अमली दिलचस्­पी नहीं है, जो खौफ की फिजा में जीते हैं और दूसरों को खौफजदा करना चाहते हैं. इसमें अच्­छी खासी तादाद दानिशवरों (प्रबुद्ध वर्ग) की है.

उन्­होंने कहा,‘‘ अक्­सर दानिशवर किस्­म के लोग इस तरह की बातें करते हैं. ये लोग मैदान में कहीं नहीं रहते. वे मुसलमानों के मसले हल करने के लिये कोरी बातों के सिवा कुछ नहीं करते और उनके पास समस्­याएं हल करने की कोई व्­यवहारिक योजना नहीं है. वे मौके-ब-मौके मीडिया को बयान देकर मशहूर होते रहते हैं. इन लोगों से पूछा जाए कि उन्­होंने मुसलमानों के भले के लिये क्­या किया.’’

मालूम हो कि उच्­चतम न्­यायालय ने गत नौ नवम्­बर को अयोध्­या मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित स्­थल पर भगवान राम का मंदिर बनवाने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिये अयोध्­या में किसी प्रमुख स्­थान पर पांच एकड़ जमीन देने के आदेश दिये थे. आॅल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पिछली 17 नवम्­बर को अपनी आपात् बैठक में इस आदेश पर पुर्निवचार की याचिका दाखिल करने का फैसला किया था.

हालांकि मामले के प्रमुख पक्षकार रहे उत्­तर प्रदेश सुन्­नी सेंट्रल वक्­फ बोर्ड ने पुर्निवचार याचिका नहीं दाखिल करने का निर्णय लिया है. मौलाना रहमानी ने आरोप लगाया कि पु­र्निवचार याचिका दाखिल करने के इच्­छुक अयोध्­या निवासी मुस्लिम पक्षकारों को पुलिस ऐसा करने से जबरन रोक रही है. प्रशासन अपनी सफाई में झूठ बोल रहा है. उसकी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता. बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने भी हाल में यही आरोप लगाये थे. मगर अयोध्­या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने इन इल्­जामात को गलत बताते हुए कहा था कि जीलानी के पास अगर सुबूत हों तो पेश करें.

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