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भारतीय लोकतंत्र में सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन में अंतर होता है, सभी इसका सम्मान करें: कांग्रेस

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नयी दिल्ली. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश यात्रा पर जाने संबंधी खबरों की पृष्ठभूमि में पार्टी ने सोमवार को कहा कि भारत की लोकतंत्रिक परंपराओं में सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत जीवन में अंतर किया गया है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए.

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोगों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके गांधी के विदेश जाने संबंधी खबरों को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भारतीय लोकतांत्रित परंपराओं में सार्वजनिक और व्यक्तिगत जीवन में हमेशा अंतर रखा गया है.

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान हमेशा होता रहा है। ये बात उन सभी के लिए लिए है जिन्होंने सूत्रों का हवाला देकर विवाद पैदा करने की कोशिश है.’’ झा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की इस परंपरा का उन व्यक्तियों और संस्थाओं को भी सम्मान करना चाहिए जिन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करके नेताओं की यात्राओं को सार्वजनिक करने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा पर टिप्पणी करने वालों पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘ प्रगतिशील लोकतंत्र और उदार लोकतंत्र रातोंरात नहीं बनता. हम और आप ऊपर वाले की कठपुतली हो सकते हैं, लेकिन नीचे वाले की बन जाएं तो भगवान ही मालिक है.’’

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु ंिसघवी ने रविवार को ट्वीट करके कहा, ‘‘किसी इंसान के व्यक्तिगत जीवन को उसके सार्वजनिक जीवन से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। हमें हर किसी की निजता और आजादी की भावना का सम्मान करना चाहिए. आखिरकार यही तो एक प्रगतिशील और उदार लोकतंत्र की पहचान है.’’

भारतीय अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास टूटा, सरकार के पास समग्र नीति नहीं
कांग्रेस ने वाणिज्यिक क्षेत्र में धन का प्रवाह 88 फीसदी गिर जाने से जुड़ी खबर को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों का विश्वास टूट गया है, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार कोई समग्र नीति नहीं अपना रही है. पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी कहा कि स्थिति को ठीक करने के लिए जरूरी है कि सरकार पहले स्वीकार करे कि अर्थव्यवस्था में दिक्कत है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरबीआई की एक रिपोर्ट आई है जो ंिचताजनक है. इससे पता चलता है कि आर्थिक मंदी की स्थिति गंभीर है. इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में वाणिज्यिक क्षेत्र में धन का प्रवाह 88 फीसदी कम हुआ है. कहीं न कहीं यह बात साफ है कि आर्थिक गतिविधि थम गई है.’’

सुप्रिया ने दावा किया, ‘‘ आज पूरे विश्वास से कह सकती हूं कि विकास दर पांच फीसदी नहीं है. अगर निवेश और कर्ज लेना इतना गिर जाए तो इतनी विकास दर की बात सही नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि यह तब हो रहा है जब रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को कम किया है यानी कि कर्ज लेना सस्ता हुआ है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘‘रेपो रेट कम होने के बावजूद लोग कर्ज नहीं ले रहे हैं. इसका कारण है कि लोगों का विश्वास कम हुआ है. कमी साफ तौर पर नजर आ रही है लेकिन चीजों को ठीक करने के लिये कोई समग्र नीति नहीं अपनाई जा रही है.’’ उन्होंने कहा कि जो आंकड़े सामने आए हैं उससे स्पष्ट है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास टूट गया है.

सुप्रिया ने कहा, ‘‘पहले सरकार को स्वीकार करना होगा कि अर्थव्यवस्था में दिक्कत है. इसके बाद समग्र नीति अपनानी होगी. विडंबना यह है कि वित्त मंत्री कहती हैं कि अर्थव्यवस्था में नकदी की कोई समस्या नहीं है.’’ एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि आखिरकार अर्थव्यवस्था चुनाव का मुद्दा बनेगी.

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