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जिला अस्पतालों की रैकिंग का काम अग्रिम चरण में, जल्द आएगी रिपोर्ट: नीति आयोग सदस्य

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नयी दिल्ली. देश के जिला अस्पतालों की रैंंिकग का काम काफी आगे बढ़ चुका है और इस बारे में रिपोर्ट जल्दी आने की उम्मीद है. नीति आयोग की इस रैंंिकग का मकसद जिला अस्पतालों को एक बेहतर चिकित्सा केंद्र बनाने के लिये उनके बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और प्रोत्साहन देना है. आयोग के सदस्य डा. विनोद के पॉल ने यह जानकारी दी है.

देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिये ऐसा माना जा रहा है कि जब तक जिला और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति में सुधार नहीं आयेगा, राज्यों की स्वास्थ्य के मोर्चे पर स्थिति मजबूत नहीं होगी.

पेशे से डाक्टर पॉल ने ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘जिले का अस्पताल मॉडल अस्पताल होता है और उसे पेशेवर तरीके से चलाने की जरूरत है. बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मतलब है कि जिले का अस्पताल मजबूत हो. जो भी सरकारी अस्पताल हैं, मेडिकल कॉलेज हैं, उनमें बेहतर सुविधाएं होनी चाहिए. हमारी राज्यों के साथ मिलकर सभी जिला अस्पतालों को एक मॉडल अस्पताल बनाने की योजना है. यह हमारे एजेंडे में है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसी को ध्यान में रखकर हम विभिन्न मानदंडों के आधार पर जिला अस्पतालों को रैंंिकग देने का काम कर रहे हैं ताकि उनके बीच प्रतिस्पर्धा बढ़े और सहयोग सृजित हों. इस बारे में रिपोर्ट इस साल आने की उम्मीद है.’’ हाल में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दिमागी बुखार (एक्यूट इनसेफलाइटिस सिन्ड्रोम) से हुई बच्चों की मौत तथा नीति आयोग की पिछले महीने स्वास्थ्य सूचकांक पर जारी रिपोर्ट में 21 बड़े राज्यों की रैंंिकग में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे देश के बड़ी आबादी वाले राज्यों के फिर से पीछे रहने के संदर्भ में पूछे गये सवालों के जवाब में उन्होंने यह बात कही.

आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार जिन मानदंडों पर अस्पतालों के प्रदर्शन आंके जा रहे हैं उसमें प्रति 1,00,000 आबादी पर अस्पताल में बेड, डाक्टर, नर्स और अन्य सहयोगी स्टाफ की संख्या, गुणवत्ता, प्रयोगशालाओं की स्थिति आदि शामिल हैं. देश में कुल 734 जिला अस्पताल हैं जिनकी रैंंिकग की जा रही है.

मॉडल अस्पताल के लिये कोष की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर पॉल ने कहा, ‘‘हमें कोष सृजित करना होगा. स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट आबंटन बढ़ाने की जरूरत है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2025 तक देश में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत करना है जो अभी लगभग 1.5 प्रतिशत है. साथ ही राज्यों को अपना बजटीय आबंटन मौजूदा 4.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है.’’

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और हमारी उनसे इस बारे में निरंतर बातचीत हो रही है. उन्हें उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा. साथ ही डाक्टर, विशेषज्ञों की जो कमी है, उन्हें आर्किषत करने के लिये राज्यों को बेहतर माहौल बनाने की जरूरत है.

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