भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘सुधार’, सरकार और पैसा खर्च करने को तैयार : पनगढ़िया

नयी दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘सुधार’ आ रहा है और सरकार वृद्धि को समर्थन के सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए और पैसा खर्च करने की योजना बनायी है. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरंिवद पनगढ़िया ने मंगलवार को यह बात कही.

हालांकि, इसके साथ पनगढ़िया ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से पैदा हुई अड़चनों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचाने में अभी समय लगेगा. नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में अगले वित्त वर्ष में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के फैसले को एक ‘असाधारण’ प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि यह 50 साल पहले जो गलत हुआ था, उसे अंतत: ठीक करने का प्रयास है.

उनका इशारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा बैंकों के राष्ट्रीयकरण की ओर था. पनगढ़िया फिलहाल कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं. उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर सुस्त लगती है. लेकिन जिस तरह से पहली और दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में क्रमश: 24.4 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई है उसके मद्देनजर तिमाही-दर-तिमाही आधार पर यह वृद्धि काफी मजबूत दिखती है.

पनगढ़िया ने कहा कि इस तरह के संकेत हैं कि सरकार तेजी से पुरानी गलतियों को ठीक कर रही है. साथ ही सरकार ने चालू तिमाही में पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में खर्च को दोगुना करने की भी तैयारी की है.

उन्होंने कहा कि इन चीजों से मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था की वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा. ऐसे में वृद्धि के मोर्चे पर खबर काफी उत्साहवर्धक है. यह पूछे जाने पर कि क्या भारत 2024-25 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल कर लेगा, पनगढ़िया ने कहा कि कोविड-19 के झटके की वजह हमें इसके लिए एक या दो साल अधिक इंतजार करना होगा.

यह पूछे जाने पर कि क्या मुद्रास्फीति के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य की समीक्षा के पक्ष में हैं, उन्होंने कहा कि मैं इस लक्ष्य को एक प्रतिशत ऊंचा करना चाहूंगा. सरकार के संपत्ति पुनर्गठन कंपनी और संपत्ति प्रबंधन कंपनी के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा, ‘‘इस तरीके या दूसरे तरीके से हमें तेजी से एनपीए को साफ करना होगा.’’

उन्होंने कहा कि यदि सरकार तेजी से बैड बैंक का गठन करती है और बैंकों के बही-खाते से गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) को हटाती है, तो यह सही दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

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