सेंसेक्स ने रचा इतिहास, पहली बार 60,000 अंक के पार, इस साल हुई दस हजार अंक की रिकार्ड वृद्धि

31 साल में 1,000 से 60,000 अंक पर पहुंचा, इस साल 25 प्रतिशत से अधिक चढ़ा

मुंबई/नयी दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के दौर से उबरते हुये देश के शेयर बाजारों में तेजी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा. निवेशकों की लिवाली जारी रहने से बीएसई सेंसेक्स 163 अंक की बढ़त के साथ पहली बार 60,000 के स्तर को पार कर एतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया. वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख के बावजूद निवेशकों के बैंक, वित्त और वाहन शेयरों में लिवाली से बाजार में तेजी आयी.

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 163.11 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ अब तक के उच्चतम स्तर 60,048.47 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 60,333 के उच्च स्तर तक चला गया था. इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 30.25 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ रिकार्ड 17,853.20 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह 17,947.65 अंक तक पहुंच गया था.

सेंसेक्स ने 1,000 अंक से 60,000 अंक के एतिहासिक स्तर तक पहुंचने में 31 साल से कुछ अधिक समय लिया. मानक सूचकांक 25 जुलाई, 1990 को 1,000 अंक पर था और यह करीब 25 साल में चार मार्च, 2015 को 30,000 के स्तर पर पहुंचा. उसके बाद 30,000 से 60,000 के स्तर पर पहुंचने में उसे छह साल से थोड़ा अधिक समय लगा. यह बाजार में जारी जोरदार तेजी को बताता है. सेंसेक्स में आखिरी 10,000 अंक की वृद्धि रिकार्ड गति से हुई है. बाजार इस साल जनवरी में ही 50,000 के स्तर पर पहुंचा था.

बीएसई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक आशीष कुमार चौहान ने कहा, ‘‘सेंसेक्स आज 60,000 अंक पर पहुंच गया. यह भारत की वृद्धि की संभावना को दर्शाता है. साथ ही जिस तरीके से भारत कोविड अवधि के दौरान एक विश्व नेता के रूप उभरा है, उसे भी अभिव्यक्त करता है… इसके अलावा दुनियाभर में सरकारों ने अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रा प्रसार किया और वित्तीय नीतियों को उदार बनाया, उससे भी शेयर बाजारों में गतिविधियां बढ़ी हैं.’’

सेंसेक्स के शेयरों में 3.72 प्रतिशत की तेजी के साथ सर्वाधिक लाभ में एशियन पेंट्स रहा. इसके अलावा मंिहद्रा एंड मंिहद्रा, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, मारुति और इन्फोसिस में भी प्रमुख रूप से तेजी रही. दूसरी तरफ, गिरावट वाले शेयरों में टाटा स्टील, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईटीसी, एनटीपीसी और बजाज फाइनेंस शामिल हैं. इनमें 3.60 प्रतिशत तक की तेजी आयी.

वाटरफील्ड एडवाइजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी (सूचीबद्ध निवेश) नीमेश शाह ने कहा, ‘‘बाजार में शेयरों का मूल्यांकन ऊंचा है लेकिन दूसरी तरफ आर्थिक वृद्धि अनुकूल है….’’ उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिये हमारा सुझाव है कि वे निवेश को संतुलित कर सकते हैं. वे मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश कम कर या उससे बाहर निकलकर दीर्घकालीन स्तर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं. कई मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन उच्च स्तर पर पहुंच गया है. सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 1,032.58 अंक यानी 1.74 प्रतिशत जबकि निफ्टी 268.05 अंक यानी 1.52 प्रतिशत मजबूत हुआ.

कोटक बैंक सिक्योरिटीज के इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, ‘‘60,000 के स्तर पर भी निवेशक मध्यम से लंबी अवधि के लिये प्रबंधन और वृद्धि के लिहाज से मजबूत कंपनियों में निवेश कर सकते हैं.’’ चीन के एवरग्रांड समूह को लेकर ंिचता से वैश्विक बाजारों में शुक्रवार को कमजोर रुख रहा. कंपनी ने बांड ब्याज भुगतान में चूक की है.

नाइट फ्रेंक इंडिया के पूंजी बाजार, कार्यकारी निदेशक शरद अग्रवाल ने आज के कारोबार में बीएसई रियल्टी सूचकांक के चार हजार के स्तर को छू जाने पर कहा कि बड़े डेवलपर ने महामारी के दौरान बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की है. पूंजी जुटाकर उन्होंने कर्ज कम किये हैं, संपत्ति की बिक्री की है और दूसरे तरीके अपनाये हैं. वह अब बाजार में आगे बढ़ने और वृद्धि हासिल करने के लिये बेहतर स्थिति में हैं.

एशिया के अन्य बाजारों में शंघाई, सियोल और हांगकांग नुकसान में रहें जबकि तोक्यो में तेजी रही. यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर कारोबार में गिरावट का रुख रहा. इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.23 प्रतिशत मजबूत होकर 77.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इधर घरेलू बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर 4 पैसे फिसलकर 73.68 रुपये पर बंद हुई. शेयर बाजार के आंकड़े के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक बृहस्पतिवार को पूंजी बाजार में शुद्ध लिवाल रहें. उन्होंने 375.93 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे.

31 साल में 1,000 से 60,000 अंक पर पहुंचा, इस साल 25 प्रतिशत से अधिक चढ़ा
बंबई शेयर बाजार के प्रमुख शेयर सूचकांक बीएसई सेंसेक्स ने 25 जुलाई 1990 को पहली बार 1,000 अंक का स्तर छुआ था और शुक्रवार को इसने पहली बार 60,000 के रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जो एक ऐतिहासिक और यादगार यात्रा है. सेंसेक्स को 1,000 से 60,000 के स्तर तक पहुंचने में 31 साल से थोड़ा अधिक समय लगा. दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स ने 2021 में ही नौ माह की अवधि में 50,000 अंक और 60,000 अंक, दोनों स्तर को पार किया, जो कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच बाजार के लचीलेपन को दर्शाता है.

अपनी 60 हजार अंक तक पहुंचने की इस यात्रा में बाजार 1992 में हर्षद मेहता घोटाला का गवाह बना. उसने 1993 में मुंबई और बीएसई की इमारत में विस्फोट, कारगिल युद्ध (1999), अमेरिका में आतंकी हमला और भारतीय संसद पर आतंकी हमला (2001), सत्यम घोटाला, वैश्विक वित्तीय संकट, नोटबंदी, पीएनबी घोटाला और कोविड महामारी जैसे संकट को देखा. पिछले कुछ वर्षों में 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक ने कई रिकॉर्ड बनाए. सूचकांक पहली बार छह फरवरी 2006 को 10,000 अंक पर पहुंचा था.

इसके बाद 29 अक्टूबर 2007 को इसने 20,000 के स्तर को पार किया लेकिन इसके बाद 30,000 अंक तक पहुंचने में सेंसेक्स ने सात साल से अधिक समय लेते हुये चार मार्च 2015 को यह मुकाम हासिल किया. इसके बाद चार साल में 23 मई 2019 को 40,000 अंक और अगले दस हजार अंक की वृद्धि दो साल से भी कम समय में हासिल करते हुये यह 21 जनवरी 2021 को 50,000 अंक के पार निकल गया.

दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स ने 2021 में ही 50,000 अंक और 60,000 अंक, दोनों स्तर को पार किया, जो कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच बाजार के लचीलेपन को दर्शाता है. बीएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने शुक्रवार को किए एक ट्वीट में उक्त घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बाजार ने पिछले कुछ वर्षों में कई अनिश्चितताओं का सामना किया है. बीएसई सूचकांक इस साल अब तक 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है, जबकि पिछले महीने इसमें नौ प्रतिशत से अधिक की तेजी आई. हालांकि, इस तेजी से पहले मार्च 2020 में सेंसेक्स में करीब 15.7 प्रतिशत की भारी गिरावट भी हुई. इक्विटीमास्टर के शोध विश्लेषक बृजेश भाटिया ने कहा कि बाजार में धारणा मजबूत है और यहां से थोड़ी गिरावट निवेश के लिए एक अच्छा अवसर होगा.

इस वर्ष सेंसेक्स की चाल, जनवरी से सितंबर के बीच तय किया 50 से 60 हजार अंक का सफर
इस वर्ष शेयर बाजार में सेंसेक्स की चाल कुछ इस तरह रही. बंबई शेयर बाजार के संवेदी सूचकांक ने 21 जनवरी को पहली बार 50 हजार का आंकड़ा छुआ था लेकिन तीन फरवरी को यह इस महत्वपूर्ण अंक से ऊपर निकलकर बंद हुआ. बहरहाल, 21 जनवरी से 24 सितंबर 2021 के बीच सेंसेक्स ने दस हजार अंक की बढ़त हासिल करते हुये 60,000 अंक के आंकड़े को पार कर लिया.

* जनवरी 21 : बीएसई सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान 50,000 अंक के रिकॉर्ड स्तर को छुआ.
* फरवरी 3 : पहली बार सेंसेक्स 50,000 अंक से ऊपर बंद हुआ.
* फरवरी 5 : सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान 51,000 अंक के स्तर को पार किया.
* फरवरी 8 : सेंसेक्स 51,000 अंक के ऊपर बंद हुआ.
*15 फरवरी : सेंसेक्स पहली बार 52,000 अंक के स्तर से आगे निकला.
* जून 22 : सेंसेक्स पहली बार कारोबार के दौरान 53,000 अंक पर पहुंचा.
* जुलाई 7 : सेंसेक्स पहली बार 53,000 अंक से ऊपर बंद हुआ.
* अगस्त 4 : सेंसेक्स ने पहली बार 54,000 अंक को छुआ और इसी दिन इससे ऊपर बंद भी हुआ.
* अगस्त 13 : सेंसेक्स नया रिकॉर्ड बनाते हए 55,000 अंक के पार पंहुचा और इस स्तर के ऊपर बंद हुआ.
* अगस्त 18 : सेंसेक्स कारोबार के दौरान कीर्तिमान रचते हुए 56,000 अंक के पार निकला.
* अगस्त 27 : सेंसेक्स पहली बार 56,000 अंक के ऊपर बंद हुआ.
* अगस्त 31 : सेंसेक्स दिन के कारोबार में 57 हजार अंक के पार पंहुचा और इसी स्तर पर बंद भी हुआ, इस दिन बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 250 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा.
* सितंबर 3 : सेंसेक्स पहली बार 58,000 अंक की नयी उचाईयों पर पहुंचा और इसी स्तर से ऊपर बंद भी हुआ.
* सितंबर 16 : सेंसेक्स लंबी छलांग लगाते हुए 59,000 अंक के उच्चतम स्तर पर पहुंचा और इसी दिन इससे ऊपर बंद हुआ, वही बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 260 लाख करोड़ रुपये के पार पंहुचा.
* सितंबर 24 : बीएसई का सेंसेक्स कारोबार के दौरान पहली बार 60,000 अंक के स्तर को पार कर एतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा और इसी दिन इस एतिहासिक आंकड़े से ऊपर बंद भी हुआ.
इस साल (जनवरी से सितंबर) बीएसई का सेंसेक्स अब तक 12,297.14 अंक यानी 25.75 फीसदी चढ़ा.

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