सीतारमण ने अमेरिका में वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भारत में निवेश अवसरों पर चर्चा की

बोस्टन/वांिशगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ अपनी बैठक के दौरान भारत में निवेश के अवसरों, सुधारों और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की. बैठक में अमेरिकी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे देश में निवेश को लेकर उत्साहित हैं.

सीतारमण वांिशगटन में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वार्षिक बैठकों के साथ-साथ जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इस समय एक हफ्ते की लंबी यात्रा पर अमेरिका में हैं.अमेरिका की आधिकारिक यात्रा के दौरान सीतारमण के अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन से मिलने की भी उम्मीद है.

सोमवार को न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद सीतारमण वहां से बोस्टन गयीं, जहां वह फिक्की और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में निवेशकों तथा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मिलेंगी. बोस्टन में मंत्री से मिलने वाली अमेरिकी उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों में बैन कैपिटल के सह-चेयरमैन स्टीफन पग्ल्युका एवं को-मैनेंिजग पार्टनर जॉन कनॉटन; अमेरिकन टावर कॉरपोरेशन (एटीसी) के कार्यकारी उपाध्यक्ष, मुख्य प्रशासन अधिकारी एवं सामान्य परामर्शदाता एडमंड डिसेंटो; र्पिकन एल्मर के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्र‘‘ाद ंिसह शामिल थे.

कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और देश में जारी सुधारों में अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि वे देश में निवेश को लेकर उत्साहित हैं. सीतारमण ने पूर्व अमेरिकी वित्त मंत्री लॉरेंस समर्स द्वारा आयोजित रात्रिभोज में भी हिस्सा लिया जहां अर्थशास्त्र, सार्वजनिक नीति, वित्त और विकास के क्षेत्र से जुड़े कई अन्य प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे. बोस्टन में सीतारमण के साथ बैठक के बाद प्र‘‘ाद ंिसह ने कहा, “वित्त मंत्री ने देश के विकास और वृद्धि में अधिक समावेशी होने के इरादे को स्पष्ट किया.” ंिसह ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य सेवा उद्योग निवेश के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच, गोवा में कंपनी के प्रतिष्ठानों में विकसित किए गए उत्पादों का उपयोग किया जा रहा है और कोविड-19 की जांच के लिए देश के बाहर उनका निर्यात किया जा रहा है. ंिसह ने कहा, “इसलिए यह एक बहुत अच्छा उदाहरण है कि हम किस तरह से समावेशी विकास का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसका लाभ उठा सकते हैं जिसपर वित्त मंत्री ने ध्यान दिलाया और साथ ही कहा कि भारत एक कंपनी के रूप में हमारे विकास के लिए अपनी क्षमताओं एवं कौशल के इस्तेमाल के लिए क्या कर रहा है. उन्होंने देश के नजरिये से भी यह बात रखी.”

बैठक के दौरान सीतारमण ने दवा क्षेत्र में जीव विज्ञान और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी प्रोत्साहन और पहल का उल्लेख किया. अमेरिकन टावर कॉरपोरेशन (एटीसी) के कार्यकारी उपाध्यक्ष एडमंड डिसेंटो के साथ अपनी बैठक में वित्त मंत्री ने निजी क्षेत्र के निवेश के लिए राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन (एनएमपी) सहित सुधारों पर प्रकाश डाला.

डिसेंटो ने कहा है कि सुधारों पर भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से पश्चिमी निवेशकों में एक ‘काफी मजबूत संदेश’ गया है. उन्होंने कहा कि इन उपायों ने वित्तपोषण को लेकर भारत को एक “बेहद अनुकूल स्थिति” में पेश किया है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि भारत सरकार ने हाल ही में जो कदम उठाए हैं, उन्होंने पश्चिमी निवेशकों की दुनिया में एक बहुत मजबूत संदेश भेजा है, जो एक नयी ग्रहणशीलता और एक नयी प्रणाली का संकेत देते हैं.

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत द्वारा 81.72 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आर्किषत करने के साथ डिसेंटो ने कहा, “मुझे लगता है कि नीतियां बहुत सफल रही हैं और हम उस तरह के सुधारों का स्वागत करते हैं जिन पर वे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए स्थिति को और बेहतर करने की खातिर विचार कर रहे हैं.”

एक्सॉनमोबिल में इंटरनेशनल गवर्नमेंट रिलेशंस के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ निदेशक पीटर लवॉय ने कहा कि एक्सॉनमोबिल जैसी कंपनियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य के अनुरूप 2047 तक देश को ऊर्जा के लिहाज से स्वतंत्र बनाने के उद्देश्य को पूरा करने में मदद करने के लिए भारत के साथ काम करने को लेकर आशान्वित हैं. ये कंपनियां ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत तलाशने में देश की मदद कर सकती हैं.

लवॉय ने कहा, “पूरी दुनिया अब ऊर्जा में बदलाव के दौर से गुजर रही है. जलवायु परिवर्तन की समस्याओं को कम करने के लिए इसे ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत तलाशने होंगे.” उन्होंने कहा कि भारत एक और ऊर्जा संक्रमणकाल (बदलाव) का अनुभव कर रहा है और उसे अब भी अपनी आबादी को सस्ती, सुलभ, सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध करानी है.

भारतीय कंपनियों में करीब पांच अरब डॉलर का निवेश करने वाली बेन कैपिटल के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी निजी निवेश कंपनी देश में “और निवेश” करने को लेकर आशान्वित है और अगला दशक भारत एवं अमेरिका दोनों के लिए वैश्विक आधार पर कारोबारों के निर्माण के लिए मिलकर काम करने के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होगा.

बैन कैपिटल के सह-चेयरमैन स्टीफन पग्ल्युका और सह-प्रबंधकीय भागीदार जॉन कनॉटन ने भी सोमवार को बोस्टन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. पग्ल्युका ने बैठक को “शानदार” बताया और कहा कि बैठक में गुजरात के वित्तीय सेवा जिले (गिफ्ट सिटी) पर भी चर्चा की गयी.

कनॉटन ने कहा कि “हम भारत में 12 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं और भारत में हो रहे सुधारों को देखकर हमें वहां अपनी निवेश गतिविधि तेज करने का प्रोत्साहन मिलता है, खासकर उन व्यापक क्षेत्रों में जहां हम भागीदारी कर रहे हैं जैसे कि बैंंिकग, आउटसोर्सिंग और दवा क्षेत्र.” उन्होंने कहा, “हम और भी निवेश करने की उम्मीद कर रहे हैं. हमने पहले ही पांच अरब डॉलर का निवेश किया है और हम इसमें तेजी देख रहे हैं.”

वहीं पग्ल्युका ने कहा कि बाजारों को और अधिक व्यापार-अनुकूल बनाया जा सकता है और “मुझे लगता है कि इस समय भारत में ऐसा ही हो रहा है. इससे भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए काफी आकर्षक माहौल बनेगा.” बोस्टन की अपनी यात्रा के दौरान सीतारमण ने इंडियन ओवरसीज स्कॉलर्स एंड स्टूडेंट्स के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की, जो दुनिया भर में स्थित भारत के विद्वानों, छात्रों और युवा पेशेवरों का एक नेटवर्क है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि प्रतिभागियों में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, एमआईटी स्लोन स्कूल आॅफ मैनेजमेंट, टफ्ट्स यूनिर्विसटी और बोस्टन यूनिर्विसटी सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षक और छात्र शामिल थे.

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