सर्वोत्तम पठन-पाठन समाग्री भारतीय भाषाओं में सुलभ कराने की जिम्मेदारी लें विशेषज्ञ: मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) स्थानीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करती है. उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिये मिशन मोड में काम करने की जरूरत है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और गरीबों की प्रतिभा को पनपने का मौका मिल सके.

शिक्षा क्षेत्र के लिये केंद्रीय बजट में प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन पर एक वेबिनार को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय भाषाओं में देश और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सामग्री उपलब्ध कराना हर भाषा के शिक्षाविदों व विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा कि ज्ञान और अनुसंधान को सीमित करना देश की क्षमता के साथ एक बड़ा अन्याय है. मोदी ने कहा कि शिक्षा, कौशल, अनुसंधान और नवाचार पर बजट में स्वास्थ्य के बाद सबसे अधिक ध्यान दिया गया है. उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय बजट ने शिक्षा को रोजगार और उद्यमशीलता की क्षमता से जोड़ने के हमारे प्रयासों को व्यापक बनाया है. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत आज वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन देशों में शामिल है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ज्ञान और अनुसंधान को सीमित करना देश की क्षमता के साथ एक बड़ा अन्याय है. उन्होंने कहा, ‘‘इसी दृष्टिकोण के साथ, हमारे प्रतिभाशाली युवाओं के लिये अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, डीआरडीओ, कृषि जैसे कई क्षेत्रों के दरवाजे खोले जा रहे हैं.’’

मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने के लिये देश के युवाओं में आत्मविश्वास महत्वपूर्ण है. यह आत्मविश्वास तभी आयेगा, जब युवाओं को अपनी शिक्षा और ज्ञान पर पूरा विश्वास होगा. मोदी ने कहा कि भारत नवप्रवर्त के वैश्विक सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में शामिल हो गया है और इसमें लगातार सुधार हो रहा है.

शिक्षा प्रणाली में स्थानीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा, विशेषज्ञ जानते हैं कि भाषा किसी विषय को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने स्थानीय भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित किया है. अब यह सभी भाषाविदों और हर भाषा के विशेषज्ञों की जिम्मेदारी है कि वे भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करायें. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में, यह निश्चित रूप से संभव है.

मोदी ने कहा, ‘‘प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सर्वोत्तम सामग्री भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो. भारतीय भाषाओं में सामग्री तैयार करना करना आवश्यक है.’’ मोदी ने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. गांवों में रहने वाले और गरीब, जो अपनी स्थानीय भाषा के अलावा किसी भी भाषा को नहीं जानते हैं, उनके पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. हमें अपने गांवों की प्रतिभा को भाषा (कठिनाइयों) के कारण मरने नहीं देना चाहिये.

उन्होंने कहा कि गांवों और गरीबों को देश की विकास यात्रा से वंचित नहीं किया जाना चाहिये. भाषा की बाधा पर काबू पाने और प्रतिभा को पनपने के लिये स्थानीय भाषाओं में अवसर प्रदान करने को लेकर मिशन मोड पर काम करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि बजट में घोषित राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन इसके लिए बहुत प्रोत्साहन देगा.

मोदी ने एनईपी के सभी प्रावधानों को प्री-नर्सरी से पीएचडी स्तर तक जल्दी लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि बजट इस संबंध में बहुत मदद करेगा. उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर तालमेल का भी आ’’ान किया.

मोदी ने कहा कि कौशल विकास, उन्नयन और प्रशिक्षुता पर बजट में जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार पर निरंतर ध्यान देने के साथ छात्रों व युवा वैज्ञानिकों के लिये नये अवसर बढ़ रहे हैं.

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