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विदेशी कंपनी के ‘‘लॉबीस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं राहुल गांधी : भाजपा

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नयी दिल्ली. भाजपा ने मंगलवार को राहुल गांधी पर विदेशी कंपनियों के ‘‘लॉबीस्ट’’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया . पार्टी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधने के लिये जिस ई मेल का हवाला दिया है, वह राफेल विमान सौदे पर नहीं बल्कि किसी हेलीकाप्टर सौदे से जुड़ा है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘‘बेशर्मी और गैरजिम्मेदारी की पराकाष्ठा’’ बताया. भाजपा नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया में आयी एक खबर की पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबानी के ‘‘बिचौलिये’’ की तरह काम करने और सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जो किया है वह देशद्रोह है.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री की आलोचना करने के लिए राहुल ने एयरबस के जिस ईमेल का जिक्र किया, उसमें लड़ाकू विमान की खरीदारी नहीं, बल्कि किसी हेलीकॉप्टर सौदे का उल्लेख है. भाजपा के वरिष्ठ नेता ने एयरबस को भी कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार में हुए सौदों को लेकर संदेह के घेरे में है.

उन्होंने राहुल गांधी से इस बात का जवाब देने को कहा कि उन्हें कंपनी का आंतरिक ईमेल कैसे मिला. उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी कंपनी के ‘‘लॉबीस्ट’’ के तौर पर काम करने का आरोप लगाया. मंत्री ने कहा, ‘‘इससे बड़ी और कोई बात नहीं सामने आ सकती कि वह विदेशी कंपनी के लाबीस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं.’’

प्रसाद ने कहा कि गांधी परिवार से आने वाले पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान हुए कई संदेहास्पद रक्षा सौदों को लेकर भाजपा के उनके साथ गंभीर मतभेद हैं, लेकिन उन पर कभी देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया गया. केंद्रीय मंत्री ने कहा, उन्होंने (राहुल गांधी ने) हमारे ईमानदार प्रधानमंत्री पर आरोप लगाकर स्वयं पर कीचड़ उछाली है. हम जनता के सामने उनके झूठ का पर्दाफाश करेंगे.

प्रसाद ने कहा, ” राहुल गांधी झूठ की मशीन हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाने के चक्कर में सभी सीमा पार कर दी है . ’’ उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का पूरा खानदान समय-समय पर देश को लूटता रहा है. ‘‘ जमीन घोटाले और शेयर लूट के आरोप में मां-बेटा बेल (जमानत) पर हैं. उनका बहनोई रॉबर्ट वाड्रा अपनी मां के साथ जांच के घेरे में हैं .

जेटली ने कहा ‘‘डूबते वंश’’ को बचाने के लिये राफेल पर लगातार झूठ बोल रही कांग्रेस
केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी एक ‘‘डूबते राजवंश’’ को बचाने के लिये झूठ पर झूठ फैलाने में लगी है.

जेटली ने फेसबुक पर अपनी एक टिप्पणी में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) राजीव मर्हिष पर राफेल मामले के आडिट में हितों के टकराव के आरापों को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय में 2014- 15 के अपने कार्यकाल के दौरान मर्हिष ने लड़ाकू विमान सौदे से जुड़ी कोई भी फाइल अथवा दस्तावेज को नहीं देखा.

जेटली ने ‘‘डूबते राजवंश परिवार’’ को बचाने के लिये और कितने झूठ बोले जायेंगे’’ शीर्षक से डाली गई अपनी फेसबुक पोस्ट में कहा है, ‘‘डूबते राजनीतिक परिवार को बचाने के लिये और कितने झूठ बोलने की जरूरत पड़ेगी? निश्चित रूप से भारत इससे बेहतर चीज का हकदार है.’’ उन्होंने कहा कि इस झूठ छुआ-छूत का प्रभाव काफी बढ़ गया. कांग्रेस द्वारा फैलाये जा रहे झूठ का असर अब ‘‘महाझूठबंधन’’ के उसके दूसरे साथियों पर भी दिखने लगा है.

जेटली ने कहा, ‘‘राफेल सौदे में जहां हजारों करोड़ों रुपये के सरकारी धन की बचत की गई है, उसको लेकर रोजाना एक नया झूठ खड़ा किया जा रहा है. इस मामले में ताजा झूठ मौजूदा कैग और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को लेकर गढ़ा गया है.’’ मौजूदा कैग राजीव मर्हिष 2014- 15 में आर्थिक मामलों के सचिव के तौर पर वित्त मंत्रालय में कार्यरत थे. मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने की वजह से उन्हें वित्त सचिव के तौर पर नामित किया गया.

जेटली ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं गलत साबित होने के डर के बिना यह कह सकता हूं कि राफेल विमान सौदे से जुड़ी कोई भी फाइल अथवा दस्तावेज कभी भी उनके (मर्हिष) के पास नहीं गई और न ही रक्षा खरीद के इस सौदे से वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़े थे. सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा किये जाने वाले खर्च पर सचिव (व्यय) की मंजूरी लेनी होती है.’’

जेटली ने कहा कि यह समझ से परे है कि कैग के खिलाफ इस तरह का हितों के टकराव का झूठ क्यों उठाया जा रहा है जो कि कभी था ही नहीं. जेटली ने कहा कि ‘‘ यह राजनीतिक परिवार जानता है कि 500 करोड़ बनाम 1,600 करोड़ रुपये की उसकी बच्चों की कहानी कपोल कल्पित कहानी है. इस कहानी पर कोई विश्वास नहीं करता है. तथ्य इसका साथ नहीं देते . (इसीलिए) कैग रिपोर्ट के निष्कर्ष प्रकाशित होने से पहले ही कैग जैसी संस्था के खिलाफ पेशबंदी कर हमला शुरू कर दिया गया.’’

केन्द्रीय मंत्री ने राहुल गांधी का नाम लिये बिना ही कहा कि इस ‘‘ राजवंश के लाडले’’ और उनके मित्रों ने इससे पहले राफेल को लेकर दायर रिट याचिका को खारिज किये जाने पर उच्चतम न्यायालय को भी कटघरे में खड़ा किया था. जेटली ने कहा कि राफेल कीमत को लेकर कांग्रेस के पूरे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और इससे संबंध में जो प्रक्रियागत मुद्दे जो उठा रहे हैं कि कोई रक्षा खरीद परिषद नहीं थी, कोई सीसीएस नहीं थी, कोई अनुबंध बातचीत समिति नहीं थी, सरासर झूठ है.

उन्होंने कहा, ‘‘एक निजी कंपनी को जिस 30,000 करोड़ रुपये देने की बात की जा रही है वह कहीं है नहीं. एक समाचार पत्र द्वारा दस्तावेज के एक हिस्से का इस्तेमाल करना अपने आप में अप्रत्याशित है. अधूरे दस्तावेज का इस्तेमाल करना निश्चित तौर पर बोलने की आजादी की भावना के अनुरूप नहीं हो सकता.’’

जेटली ने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसी शर्त के न होने का तर्क इस तथ्य की अनदेखी करता है कि रूस और अमेरिका के साथ पहले हुए अंतर-सरकारी सौदों में भी इस तरह के अनुबंध नहीं थे. अब अंश मात्र सच्चाई के बिना भी कैग के खिलाफ हितों के टकराव का आरोप गढ़ा जा रहा है.

जेटली ने कहा कि सत्य बेशकीमती और पवित्र होता है. परिपक्व लोकतंत्र में जो लोग जानबूझ कर झूठ का सहारा लेते हैं वे सार्वजनिक जीवन से लुप्त हो जाते हैं. आज की दुनिया में राजवंशों की अपनी अंर्तिनहित सीमाएं होती है. प्रगति की अभिलाषा रखने वाला समाज राजतंत्र को पसंद नहीं करता. ऐसे समाज के लोग जवाबदेही और काम देखना पसंद करते हैं. लेकिन भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी एक राजवंश की कैदी हो चुकी है.

इसके तमाम वरिष्ठ नेताओं में साहस और नैतिक अधिकार नहीं है कि वह इस परिवार के लोगों को रास्ता बदलने की सलाह दे सकें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं में यह प्रवृत्ति 70 के दशक में शुरू हुई. आपातकाल के समय यह पराकाष्ठा पर थी और उसके बाद भी यह बनी हुई है. (पार्टी) के वरिष्ठ नेताओं की ‘गुलाम’ की सोच के कारण उन्हें ‘राजवंश’ की स्तुतिगान करना ही अच्छा लगता है. इसके विरुद्ध कोई बात करने से उनका राजनीतिक जीवन खत्म हो सकता है. इसी लिए जब ‘राजपरिवार का यह व्यक्ति’ बोलता है तो वे भी स्वर में स्वर मिलाने लगते हैं.

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