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न्यायालय ने वीवीपीएटी पर्चियों के सत्यापन की विपक्ष के नेताओं की याचिका पर आयोग से मांगा जवाब

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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम के साथ संलग्न वीवीपीएटी की 50 फीसदी र्पिचयों की गणना के बाद ही लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित करने के लिये 21 विपक्षी दलों के नेताओं की याचिका पर शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुये मुख्य निर्वाचन आयुक्त से कहा कि वह न्यायालय की मदद के लिये अपने किसी अधिकारी को भेजे. पीठ ने निर्वाचन आयोग को याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया. विपक्षी नेताओं की इस याचिका पर अब 25 मार्च को सुनवाई होगी.

इस याचिका में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू के नेतृत्व में छह राष्ट्रीय और 15 क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने देश की 70 से 75 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया है. याचिका में विधान सभा की एक सीट का औचक सत्यापन करने संबंधी निर्वाचन आयोग का निर्देश निरस्त करने का भी अनुरोध किया गया है.

याचिका दायर करने वालों में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, आम आदमी पार्टी, मार्क्सवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल, लोकतांत्रिक जनता दल और डीएमके सहित 21 विपक्षी दल शामिल हैं. इन दलों ने निर्वाचन आयोग के साथ फरवरी में हुयी बैठक में इलेक्ट्रानिक वोंिटग मशीनों की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया था. हालांकि, आयोग ने मशीनों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ के आरोपों से इंकार किया था.

इन नेताओं ने याचिका में कहा है, ‘‘याचिकाकर्ता देश के 21 अलग अलग राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के अध्यक्ष या नेता हैं जो भारत की आबादी के करीब 70-75 प्रतिशत मतदाताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इन विपक्षी नेताओं ने लोकसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा से पहले आयोग को प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में वीवीपीएटी की कम से कम 50 प्रतिशत र्पिचयों का सत्यापन कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया या है.

याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देश के संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है.

इसी तरह, याचिका में भाजपा नेता सुब्रमणियन स्वामी के मामले में 2013 में शीर्ष अदालत के निर्णय का भी हवाला दिया गया है जिसमे उसने कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिये ईवीएम के लिये पर्ची की व्यवस्था अनिवार्य जरूरत है. निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित करते हुये कहा था कि लोकसभा के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिये एक मतदान केन्द्र के आधार पर ईवीएम और वीवीपीएटी का अनिवार्य निरीक्षण किया जायेगा.

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