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महबूबा का ‘‘ डैडीज गर्ल’’ के रूप में उल्लेख उन्हें पीएसए के तहत हिरासत में रखने का आधार नहीं

श्रीनगर. पुलिस द्वारा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का उल्लेख ‘‘डैडीज गर्ल’’ के रूप में किया जाना सख्त जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत उन्हें हिरासत में रखने के आधारों में शामिल नहीं है. यह बात आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलती है. छह फरवरी को जारी सात पन्नों के आदेश में 60 वर्षीय पीडीपी प्रमुख और पार्टी संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी को पीएसए के ‘‘ लोक व्यवस्था’’ प्रावधान के तहत हिरासत में रखने के लिए 12 आधार बताए गए हैं. पीएसए लगाने के निर्णय में शामिल जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पुलिस डोजियर जिला अधिकारी को सौंपा जाता है और वह अपने विवेक से किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने का फैसला करते हैं. पीएसए की धारा 13 का उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने बताया कि जब किसी व्यक्ति को हिरासत आदेश के तहत हिरासत में लिया जाता है तो संबंधित प्राधिकार के लिए जरूरी है कि वह इसके आधार की जानकारी उस व्यक्ति को दे, ताकि वह सरकार के फैसले को चुनौती दे सके. पुलिस ने अपने डोजियर में महबूबा मुफ्ती को हिरासत में रखने का समर्थन करते हुए उनका उल्लेख खतरनाक, कपटी, अन्यायी रुख वाली और ‘‘ डैडीज गर्ल’’ तथा मध्यकाल की शासिका ‘‘कोट रानी’’ के रूप में किया है.

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, जिलाधिकारी ने इन कारणों को पीएसए के तहत उन्हें हिरासत में रखने के आधार के तौर पर शामिल नहीं किया.उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा जिलाधिकारी को दिया गया डोजियर केवल हिरासत के आधार की पहचान करने के लिए होता है और ‘‘डैडीज गर्ल’’ तथा ‘‘कोट रानी’’जैसी भावनाओं को पूर्व मुख्यमंत्री को छह फरवरी से पीएसए के तहत हिरासत में रखने के आधार के तौर पर शामिल नहीं किया गया. दस्तावेज में पीडीपी के राजनीतिक पार्टी के रूप में गठन पर भी टिप्पणी नहीं की गई है. हिरासत में रखने का आधार वह दस्तावेज है जिसका इस्तेमाल नजरबंद व्यक्ति उचित मंच पर अपनी कैद को चुनौती देने के लिए करता है. अधिकारियों ने बताया कि पुलिस के डोजियर में महबूबा मुफ्ती के खिलाफ विशेषण का इस्तेमाल किया गया है लेकिन साथ ही इनका इस्तेमाल पूर्व मुख्यमंत्री को सौंपे गए अंतिम पीएसए आदेश और हिरासत में रखने के आदेश में नहीं किया गया है. उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग ंिसह ने पुलिस डोजियर में इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल पर माफी मांगी है. अधिकारियों ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि किस तरह से गोपनीय दस्तावेज लीक होकर सार्वजनिक मंच पर आया. पीएसए आदेश के मुताबिक, ‘‘पिछले दस साल की घटनाओं को संज्ञान में लिया गया जिनमें महबूबा मुफ्ती ंिहसा भड़काने में शामिल थीं और जिसकी वजह से कानून व्यवस्था से संबंधित समस्या हुई.’’

आदेश में कहा गया कि महबूबा का भड़काऊ भाषण देने का इतिहास है और उनके राजनीतिक करियर में दिए गए भड़काऊ बयानों से कई मौकों पर ंिहसा भड़की. पीएसए आदेश के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री ने आतंकवादियों का महिमामंडन करने के लिए भाषण दिए जिससे बड़े पैमाने पर विभाजनकारी राजनीति के कारण बहुमत आबादी में भय का माहौल पैदा हुआ. पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से हासिल रिपोर्ट को उद्धृत करते हुए पीएसए आदेश में पिछले साल पांच अगस्त को महबूबा द्वारा किए गए ट्वीट का उल्लेख किया गया जिसमें उन्होंने कहा था, ‘‘ अनुच्छेद-370 खत्म करने से न केवल जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय निष्प्रभावी हो जाएगा, बल्कि भारत की स्थिति जम्मू-कश्मीर पर कब्जे की रह जाएगी.’’ महबूबा ने यह ट्वीट राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद -370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए किया था.

पीएसए आदेश में जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘सभी नागरिकों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन उनके (महबूबा) द्वारा दिया गया बयान स्पष्ट रूप से विभाजित करने की रणनीति को प्रतिंिबबित करता है जो एक खास इलाके या विचारधारा के राजनीतिक कार्यकर्ता को सड़कों पर प्रदर्शन करने और ंिहसा करने के लिए भड़काने की कोशिश थी.’पीएसए आदेश में अन्य बयानों का संदर्भ देते हुए कहा गया, ‘‘ इस कद के राजनीतिक नेता से संयंमित व्यवहार की उम्मीद की जाती है और ंिहसा भड़काने, कानून व्यवस्था खराब करने, धर्म या पहचान के आधार पर विभाजन कर जानमाल की हानि करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.’ आदेश में कहा गया कि 21वीं सदी में किसी राजनीतिक नेता का लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश, वह भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाके में… यह वास्तव में कानून व्यवस्था के लिए खतरा है.

महबूबा मुफ्ती द्वारा अप्रैल 2019 में किए गए ट्वीट को भी हिरासत में रखने का आधार बनाया गया है. इसमें उन्होंने कहा था, ‘‘ आतंकवादियों सहित सभी इंसान मौत के बाद गरिमा के हकदार हैं. मुठभेड़ में शव को क्षत-विक्षत करने के लिए सैन्य बलों द्वारा रसायन का इस्तेमाल किया जाना अमानवीय है. मैं उस लड़के की भावना को महसूस कर सकती हूं जिसने अपने भाई का क्षत-विक्षत शव देखा. अगर वह बंदूक उठाता है तो क्या आप आश्चर्यचकित होंगे?’’पीएसए आदेश में आरोप लगाया गया है कि महबूबा मुफ्ती ‘‘ राष्ट्र विरोधी तत्वों की गतिविधियों का महिमंडन करती रही हैं और इन्हें न्यायोचित करार देती रही हैं….’’ इसमें राज्य में जमात-ए-इस्लामी को दिए गए उनके समर्थन का उल्लेख किया गया है जिसे गैर कानूनी गतिविधि (निवारण) कानून के तहत प्रतिबंधित किया गया है. पीएसए आदेश में कहा गया कि इन आधारों पर महबूबा मुफ्ती को पीएसए कानून के तहत हिरासत में रखना अनिवार्य है.

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