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राफेल सौदे में किसी ने पैसा दिया और किसी ने लिया, जेपीसी जांच आवश्यक : कांग्रेस

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नयी दिल्ली. राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने से जुड़े अहम प्रावधानों को हटाने का दावा करने वाली खबर की पृष्टभूमि में कांग्रेस ने इस सौदे में धन की लेनदेन होने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच आवश्यक है.

पार्टी ने यह भी सवाल किया कि भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे? कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अंग्रेजी अखबार ‘द ंिहदू’ की एक खबर की पृष्ठभूमि में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सवाल पूछना चाहते हैं कि सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को क्यों हटाया? इसका जवाब यही है कि ऐसा इसलिए किया गया कि क्योंकि इस सौदे में भ्रष्टाचार है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस सौदे से जुड़े सभी घटनाक्रमों को देखेंगे तो पता चलेगा कि दसाल्ट (राफेल विमान निर्माता कंपनी) इस सौदे में हाÞवी रही है. प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है.’’ तिवारी ने दावा किया, ‘‘सामने आए तथ्यों से साफ है कि इस सौदे में किसी ने पैसा दिया है और किसी ने पैसा लिया है. इसलिए जेपीसी जांच की आवश्यकता है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) पिछले छह महीनों में सामने अए तथ्यों को संज्ञान में नहीं लेता है तो फिर उसकी रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.’’ इससे पहले कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मोदी जी, राफेल सौदे में सरकारी गारंटी माफ करने के बाद आपने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान में भी छूट दे दी. आखिर आप कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे?”

पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे ज्यादा तेजी से राफेल सौदे में खुलासे हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले कीमत बढ़ाई गई, फिर यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समानांतर बातचीत करके भारतीय वार्ता दल के प्रयासों को कमजोर किया. अब यह खुलासा हुआ है कि मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किए गए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दसाल्ट को इस सौदे में फायदा ही फायदा हुआ है.

गौरतलब है कि अखबार की खबर में कहा गया है कि फ्रांस के साथ इस सौदे के समझौते पर हस्ताक्षर करने से चंद दिन पहले ही सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ अर्थदण्ड से जुड़े अहम प्रावधानों को हटा दिया था. कांग्रेस राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लंबे समय से लगा रही है, हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज किया है.

राफेल सौदे के उजागर तथ्यों का संज्ञान लिए बिना कैग रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं होगा
राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को हटाने का दावा करने वाली खबर की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि अगर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) पिछले कुछ महीनों में उजागर हुए तथ्यों का संज्ञान नहीं लेता तो उसकी रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने अंग्रेजी अखबार ”द ंिहदू” की खबर का हवाला देते हुए संवाददाताओं से कहा, “इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच बहुत आवश्यक है और अगर इन सारे तथ्यों को संज्ञान में नहीं लिया जाता है ,जो अखबार के माध्यम से पिछले 6-8 महीनों में सार्वजनिक हुए हैं, तो उस रिपोर्ट का बिल्कुल कोई महत्व नहीं होगा”

उन्होंने सरकार पर उच्चतम न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि आगे शीर्ष अदालत को सामने आए तथ्यों पर विचार करना चाहिए. गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्टो में कहा गया है कि फ्रांस के साथ हुए इस सौदे के समझौते पर दस्तख्त करने से चंद दिन पहले ही सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ अर्थदंड से जुड़े अहम प्रावधानों को हटा दिया था. कांग्रेस राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लंबे समय से लगा रही है, हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज किया है.

राफेल सौदे में चोरी कराने के लिए चौकीदार ने दरवाजा खुद खोला : राहुल
राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी दंड से जुड़े अहम प्रावधानों को हटाने संबंधी खबर की पृष्टभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि ‘30 हजार करोड़ रुपये की चोरी कराने के लिए चौकीदार ने दरवाजा खुद खोला है.’

गांधी ने अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार ‘द ंिहदू’ की एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए गांधी ने कहा, ‘‘ चौकीदार ने अनिल अंबानी को वायुसेना से 30 हजार करोड़ रुपये की चोरी कराने के लिए खुद दरवाजा खोला.’’ आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर यहां अनशन कर रहे मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का समर्थन करने के लिए पहुंचे गांधी ने वहां भी राफेल का मुद्दा उठाया.

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की बात करके सत्ता में आए थे. क्या आप लोगों ने ंिहदू अखबार पढ़ा है? प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के लोगों के पैसे चुराए और वह अनिल अंबानी को दिए. चौकीदार चोर है.’’ गौरतलब है कि अखबार की खबर में कहा गया है कि फ्रांस के साथ इस सौदे के समझौते पर दस्तख्त करने से चंद दिन पहले ही सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पेनाल्टी से जुड़े अहम प्रावधानों को हटा दिया था.

कांग्रेस और राहुल गांधी राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप सरकार और अनिल अंबानी पर लंबे समय से लगा रहे हैं. सरकार और अनिल अंबानी के समूह ने आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज किया है.

राफेल सौदे में खरीद प्रक्रिया बदली गयी, क्या छिपाना चाहते थे प्रधानमंत्री : सुरजेवाला
कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि राफेल विमान सौदे पर हस्ताक्षर से कुछ दिन पहले मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया में बदलाव करते हुए भ्रष्टाचार विरोधी कुछ मुख्य प्रावधानों को हटा दिया गया था. पार्टी ने यह भी सवाल किया कि आखिर ‘ऐसा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे?’

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने अंग्रेजी अखबार ”द ंिहदू” की एक खबर शेयर करते हुए ट्वीट किया, ”मोदी जी, राफेल सौदे में सॉवरन गारंटी माफ करने के बाद अपने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान में भी छूट दे दी. आखिर आप कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे?”

पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा, ”सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे ज्यादा तेजी से राफेल सौदे में खुलासे हो रहे हैं.” उन्होंने कहा कि पहले कीमत बढ़ाई गई, फिर यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समानांतर बातचीत करके भारतीय वार्ता दल के प्रयासों को कमजोर किया. अब यह खुलासा हुआ है कि मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किए गए.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दसाल्ट को इस सौदे में फायदा ही फायदा हुआ है. गौरतलब है कि अखबार की खबर में कहा गया है कि फ्रांस के साथ इस सौदे के समझौते पर दस्तख्त करने से चंद दिन पहले ही सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पेनाल्टी से जुड़े अहम प्रावधानों को हटा दिया था. कांग्रेस राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लंबे समय से लगा रही है, हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज किया है.

राफेल जेट सौदे पर कैग की रपट मंगलवार को संसद में रखेगी सरकार
इस समय राजनीतिक विवाद का केंद्र बने राफेल जेट विमान सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रपट को सरकार मंगलवार को संसद में रखेगी. सूत्रों ने यह जानकारी दी है. इस सौदे को लेकर संसद में भी हंगामा हुआ है.

सूत्रों ने कहा कि सरकार इस सौदे पर कैग की रपट मंगलवार को संसद के पटल पर रखेगी. मौजूदा 16वीं लोकसभा का वर्तमान सत्र बुधवार को समाप्त हो रहा है और यह संभवत: इसका आखिरी सत्र है. अप्रैल-मई में आम चुनाव के बाद 17वीं लोक सभा का गठन होगा.

कैग की रपट को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को कुछ सवाल उठाए. उन्होंने इस मामले में हितों के टकराव की बात उठायी है.सिब्बल ने कहा है कि मौजूदा कैग राजीव मर्हिष सौदे के समय वित्त सचिव थे और इस सौदे से जुड़े थे ऐसे में उन्हें इसकी आॅडिट से अपने को अलग कर लेना चाहिए.

हालांकि केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सिब्बल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘मनगढ़ंत’ तथ्यों के आधार पर कांग्रेस कैग जैसे संस्थान पर कलंक लगा रही है.

जेटली ने रविवार को ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा, ‘‘ गलत तथ्यों के आधार पर ‘संस्थानों को नुकसान पहुंचाने वाले’ कैग जैसे संस्थान पर हमला कर रहे हैं. सरकार में 10 साल तक रहने के बाद भी संप्रग के मंत्री यह नहीं जानते कि वित्त सचिव ऐसा पद है जो वित्त मंत्रालय में सबसे वरिष्ठ सचिव को दिया जाता है.’’

सिब्बल ने कहा कि मर्हिष 24 अक्टूबर 2014 से 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव थे. इसी बीच में प्रधानमंत्री मोदी 10 अप्रैल 2015 को पेरिस गए और राफेल सौदे पर हस्ताक्षर की घोषणा की.

सिब्बल ने कहा, ‘‘ वित्त मंत्रालय ने इस सौदे की बातचीत में अहम भूमिका निभायी. अब यह साफ है कि राफेल सौदा राजीव मर्हिष के की निगरानी में हुआ. अब वह कैग के पद पर हैं. हमने उनसे दो बार मुलाकात की 19 सितंबर और चार अक्टूबर 2018 को. हमने उनसे कहा कि इस सौदे की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है. लेकिन वह खुद के खिलाफ कैसे जांच शुरू कर सकते हैं.’’

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