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अयोध्या के फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार के गठन में हो सकती है देरी

मुंबई. शिवसेना नेता संजय राउत ने शनिवार को संकेत दिया कि अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद महाराष्ट्र में सरकार बनने में देरी हो सकती है. उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने शनिवार को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करते हुये केंद्र को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिये किसी वैकल्पिक लेकिन प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ भूखंड आबंटित किया जाए.

राउत ने ट्वीट किया, ‘‘पहले मंदिर फिर सरकार!! अयोध्या में मंदिर महाराष्ट्र में सरकार… जय श्रीराम.’’ जब राउत से संपर्क किया गया तो उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अगला दो दिन केवल अयोध्या के लिए है. सरकार पर कुछ नहीं .

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र की 13 वीं विधानसभा का कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना ने 288 सदस्यीय विधानसभा की 161 सीटों पर जीत दर्ज की है लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर खींतचान की वजह से अबतक सरकार का गठन नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा दे दिया और राज्यपाल ने उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाया है.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने साफ कर दिया है कि जनता ने भाजपा-शिवसेना को स्थायी सरकार बनाने का जनादेश दिया है. पवार ने शनिवार को कहा, ‘‘ हमारी जिम्मेदारी रचनात्मक विपक्ष की है. हम देख रहे हैं कि कब सरकार का गठन होता है.’’ वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोराट कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हैं.

भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं कर रही ? : शिवेसना
शिवसेना ने एक बार फिर शनिवार को अपने सहयोगी दल भाजपा पर निशाना साधते हुए उससे पूछा कि वह सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं कर रही है? राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा की गई थी, जिसके 13 दिन बाद भी कोई पार्टी सरकार गठन के लिए आवश्यक 145 सीटें नहीं जुटा पाई है. विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105 सीटें और शिवसेना को 56 सीटें मिलीं.

मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान जारी है. शिवसेना इस पद के लिए 50:50 का फार्मूला चाहती है, लेकिन भाजपा इस पर तैयार नहीं है. कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के आमने-सामने आने पर शुक्रवार को दोनों दलों के बीच बात और बिगड़ गई थी.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पार्टी ने कहा, ‘‘गोवा और मणिपुर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी लेकिन उसने सरकार का गठन किया. यह बात किसी से छुपी नहीं है कि यह सब राज्यपाल के सक्रिय सहयोग से हुआ. लेकिन महाराष्ट्र में सबसे अधिक सीटें पाने के बावजूद भी भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं कर रही?’’ संपादकीय में पार्टी से एक बार फिर जल्द से जल्द सरकार बनाने की बात दोहरायी गयी.

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का सत्र नौ नवम्बर को पूरा हो रहा है. उसने कहा, ‘‘ राज्य के राज्यपाल भाजपा को सरकार गठन के लिए बुला सकते हैं, क्योंकि उसके पास सबसे अधिक सीटे हैं और भाजपा को यह मौका नहीं गंवाना चाहिए.’’ ‘सामना’ में भाजपा के शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने के दावे की आलोचना भी की गई.

शिवसेना ने कहा, ‘‘ उस वादे का क्या जो गठबंधन बनाते समय सत्ता के बंटवारे को लेकर किया गया था? भाजपा लगातार यह कह रही है कि सत्ता साझेदारी को लेकर कोई आश्वासन नहीं दिया गया.’’ मुख्यमंत्री पद साझा करने का वादा पूरा न करने को लेकर भी एकबार फिर शिवसेना ने भाजपा पर हमला बोला.

उसने कहा, ‘‘ शिवसेना के बिना राज्य में सरकार का गठन नहीं हो सकता, लेकिन भाजपा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने को तैयार नहीं है. यह कैसी राजनीति है. हम ऐसी गंदी राजनीति में शामिल नहीं हो सकते.’’ इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.


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