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नान घोटाला, फोन टेपिंग मामले में हैं आरोपी डीजी मुकेश गुप्ता, एसपी रजनेश सिंह को सरकार ने किया निलंबित

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रायपुर. बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम में हुए कथित घोटाले की जांच के दौरान अवैधानिक रूप से फोन टेंिपग तथा दस्तावेजों में छेड़छाड़ के मामले के आरोपी विशेष पुलिस महानिदेशक समेत भारतीय पुलिस सेवा के दो अधिकारियों को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है.

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को यहां बताया कि राज्य शासन ने विशेष पुलिस महानिदेशक मुकेश गुप्ता और नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक रजनेश ंिसह को निलंबित कर दिया है.

गृह विभाग से जारी आदेश के अनुसार आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में दर्ज अपराध की आफिस फाइल और शिकायत रजिस्टर में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि हुई है. मुकेश गुप्ता और रजनेश ंिसह का यह कृत्य अखिल भारतीय सेवा नियम का उल्लंघन है तथा इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है इसलिए प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों को निलंबित करना आवश्यक है.

अधिकारियों ने बताया कि निलंबन अवधि में अधिकारियों का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय रायपुर रहेगा. राज्य में कथित नान घोटाले की जांच के दौरान एसआईटी के अधिकारी अनिल बक्शी ने गुप्ता और ंिसह के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो थाने में दर्ज शिकायत में बक्शी ने कहा है कि जब वह घोटाला मामले की जांच कर रहे थे तब उन्होंने पाया कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों से छेड़छाड़ की गई है. जब इस मामले की छानबीन की गई तब गुप्ता और ंिसह का नाम सामने आया.

बक्शी का दावा है कि यह कार्य दोनों अधिकारियों ने दबावपूर्वक अपने मातहत अधिकारियों से कराया था जिससे विधि विरूद्ध फोन टेंिपग की कार्यवाही को वैध किया जा सके. इस मामले के सामने आने के बाद विशेष पुलिस महानिदेशक मुकेश गुप्ता ने अपने खिलाफ आरोपों को खारिज किया है तथा कहा है कि सभी टेलीफोन टैंिपग वैधानिक तरीके से किये गये है तथा गृह विभाग से अनुमति के बाद ही किये गये है.

छत्तीसगढ़ में नान घोटाले का यह मामला तब सामने आया था जब वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों में छापे मारे थे. इस दौरान ब्यूरो ने भारी मात्रा में नकदी और एक डायरी बरामद की थी. डायरी में कुछ रसूखदार लोगों के नाम थे. बाद में इस मामले में ब्यूरो ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया था.

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक नई सरकार के गठन के बाद आरोपी अधिकारी अनिल टुटेजा ने राज्य सरकार से इस मामले में जांच की मांग की थी. उनकी मांगों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से राय मांगी थी जिसके आधार पर राज्य सरकार ने इस मामले की एसआईटी से जांच कराने का फैसला किया और बस्तर के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर दिया.

राज्य के सत्ताधारी दल कांग्रेस के मुताबिक यह लगभग 36 हजार करोड़ रुपए का घोटाला है जिसमें कई बड़े लोगों का नाम सामने आ सकता है.

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