मेदवेदेव ने जोकोविच का सपना तोड़कर अमेरिकी ओपन जीता

न्यूयॉर्क. पिछले 52 वर्ष में एक कैलेंडर वर्ष में चारों ग्रैंडस्लैम जीतने वाले पहले पुरूष खिलाड़ी बनने का नोवाक जोकोविच का सपना दानिल मेदवेदेव ने तोड़ दिया जिन्होंने अमेरिकी ओपन फाइनल में दुनिया के इस नंबर एक खिलाड़ी के अश्वमेधी अभियान पर नकेल कसी.

मेदवेदेव ने आश्चर्यजनक रूप से एकतरफा रहे फाइनल में 6 . 4, 6 . 4, 6 . 4 से जीत दर्ज की . इसके साथ ही जोकोविच को रिकॉर्ड 21वां ग्रैंडस्लैम जीतने के लिये अभी और इंतजार करना होगा . उनके रोजर फेडरर और रफेल नडाल के समान 20 ग्रैंडस्लैम खिताब हैं.

दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जोकोविच इस टूर्नामेंट में 2021 में ग्रैंडस्लैम में जीत का 27 . 0 रिकॉर्ड लेकर उतरे थे . उन्होंने फरवरी में आस्ट्रेलियाई ओपन फाइनल में मेदवेदेव को हराया था जबकि जून में फ्रेंच ओपन और जुलाई में विम्बलडन जीता . उन्होंने हार्डकोर्ट, ग्रासकोर्ट, क्लेकोर्ट सभी पर जीत दर्ज की थी.

अमेरिकी ओपन फाइनल में हालांकि वह अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थे . उन्होंने 38 सहज गलियां की और ब्रेक प्वाइंट नहीं भुना सके. उन्होंने गुस्से में अपना रैकेट भी तोड़ दिया जिससे चेयर अंपायर ने उन्हें चेताया और आर्थर एशे स्टेडियम पर जमा दर्शकों ने हूंिटग भी की.

दूसरी ओर छह फुट छह इंच लंबे मेदवेदेव ने बेहतरीन खेल दिखाया. जोकोविच अपने कैरियर के 31वें ग्रैंडस्लैम फाइनल में फ्लंिशग मीडोस के हार्डकोर्ट पर छह जीत के साथ पहुंचे थे . लेकिन जरूरत के समय लय कायम नहीं रख सके. उन्होंने हार के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा ,‘‘ राहत. शुक्र है कि यह खत्म हुआ . इस टूर्नामेंट से पहले हाइप इतनी थी . मुझे मानसिक और जज्बाती तौर पर हर चीज से जूझना पड़ा. यह आसान नहीं था. शुक्र है कि यह खत्म हुआ.’’

वहीं रूस के मेदवेदेव ने कहा ,‘‘ मुझे नोवाक के लिये दुख हो रहा है क्योंकि मैं सोच भी नहीं सकता कि उस पर क्या गुजर रही होगी . उसे हराकर मिला खिताब और खास है क्योंकि इससे मेरा आत्मविश्वास बढा है.’’ आखिरी बार एक ही वर्ष में सारे खिताब रॉड लावेर ने जीते थे जिन्होंने 1962 और 1969 में दो बार यह कारनामा किया. महिला वर्ग में एकमात्र स्टेफी ग्राफ यह कमाल कर चुकी हैं जिन्होंने 1988 में चारों खिताब जीते थे.

मेदवेदेव ने ट्रॉफी थामने के बाद जोकोविच की तारीफ करते हुए कहा ,‘‘ तुमने इस साल और अपने कैरियर में जो कुछ भी हासिल किया , मैं इतना ही कहूंगा कि तुम मेरे लिये टेनिस के इतिहास के महानतम खिलाड़ी हो.’’

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